बीरगंज नाका से दैनिक ३२ कड़ोर रूपैया राजस्व का घाटा

कबिता दास, काठमांडू ४ फरबरी |
आर्थिक रूप से २०७२ साल नेपाल के हित में नहीं रहा है | किस भी देश का बिकाश उसका अर्थत्रन्त्र पर टिका होता है | हल ही में महाभूकम्प से जो तबाही हुई थी उससे जनता उभर भी नहीं पायी थी कि नेपाल के राजनीतीक खेल ने और भी नेपाली नागरिक का जीवन कास्टकर बना दिया है | आज के दिन में देश का बिकाश पूर्ण तह ठप हो गाया है | जारी मधेश आन्दोलन में भारत से जुडा सभी नाका सहज हो चुका है पर केबल बीरगंज नाका अभी भी पूरी तरह से बन्द है | जिसका असर केबल देश के बिकाश पर ही पड़ता है| क्योंकि आवश्यक सामग्री और भी दुसरे नाका से आयत हो रहा है | लेकिन बिकास की सामग्री सभी बिरगंज नाका पर रुका हुआ है | शायद नाकाबंदी करने वालोका उद्देश्य भी यही है कि अब नेपाल का बिकास ठप किया जाया |

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१३३ दिनो के मधेश आन्दोलन से केबल बिरगंज नाका से ४५ अर्ब राजस्वा क घाटा हो चुका है | साधारण तह बिरगंज नाका से दैनिक ३० से ३२ कड़ोर रूपैया राजस्व उठता है | देश में सब से ज्यादा राजस्व संकलन बिरगंज नाका से ही होता है | लेकिन यहं के ब्यपारी को बहुत ही घाटा सहना पड़ रहा है | स्थिति तो यह है कि बहुत सारे व्यापारियो की लगानी डूबने की स्थिति में है | बिरगंज केन्द्रित नाकाबंदी से यहां के ब्यब्सायी १५ बर्ष पीछे चला गाया है | कंटेनर का बिलम्ब-शुल्क ही ७ अर्ब तक पहुच गया है , यह और भी बाढ सकता है | वैसे  भी बिरजंग पथ्लैया कोडिदोर में श्रम समस्या के कारण से ब्यपारी परेशानी में है | वही दुरसी और कुछ ब्यापारी द्वारा कालाबाजारी बढ़ा दी गई है | मुख्य तह गैस सिलिंडर और तेल की कालाबाजारी बढ गाया है | काठमांडू में अभी गैस सिलिंडर रु ८००० से १२००० तक देकर खरीद रहे है | और पेट्रोल ३०० रु प्रति लीटर में मिलता है |

जब की नेपाल आयल निगम के पास पूरा स्टॉक है और तेल रखने की जगह नहीं है | खबर है कि सरकारी कर्मचारी की मिलीभागत से तेल की कालाबाजारी हो रही है |

बीरगंज नाका बंद के बिरोध में कुछ बीरगंज के ब्यपारी सामने आये है | उनका मानना है कि बीरगंज बसियो के साथ आन्यय होरहा है | या तो सारे नाका बांद करे या फिर बीरगंज नाका को भी खोला जाये |

इशी तरह का बयान पाटना से लौटने के बाद सद्भावना पार्टी के रास्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र महतो ने में भी दिया है | महतो ने स्पस्ट रूप से कहा है कि नाका बंद करना है तो देश की सभी नाका बंद किया जाये केवल बीरगंज नाका बंद करने से कुछ नहीं होगा | उन्होंने मोर्चा के नेता पर भी कटाक्ष किया है कि काठमांडू में बैठकर नाकाबंदी करने की बात नहीं करे | नाकाबंदी के लिए मोर्चा के नेता को नाक पर आना पडेगा | उन्होंने यह बात मोर्चा के आगामी बैठक में उठाये जाने की बात खी है |

देश की  बिगरती अबस्था  को सरकार द्वारा गंभीरता से नहीं लेना चिताजनक बात है | अगर फिर से नाका बंद होगया तो देश की आर्थिक गतिविधि और भी निचे चली जाएगी | और ब्यपारी की लगानी भी संकट में पड़ जाएगा | इसलिए सरकार को चाहिए कि समय पर ही सतर्क होकर समस्या का समाधान ढूंड निकाले
| नहीं तो देश और भी बुरी इस्थिति में चली जाएगी |

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