बुढ़ापे की दिक्कतों से बचा सकती है ग्रीन टी

नई दिल्ली॥  अगर आप ग्रीन टी को सिर्फ फैशन स्टेटमेंट मानते हैं या कड़वी होने की वजह से इसे पीने से बचते हैं तो अपनी सोच में थोड़ा बदलाव लाइए। जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन (जामा) में छपी स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, इसके इस्तेमाल से बुढ़ापे में होने वाली दिक्कतों का खतरा बेहद कम हो जाता है।

तीन साल तक चली स्टडी में 65 साल से अधिक उम्र वाले 13,988 पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया था। इनमें नियमित रूप से ग्रीन टी का इस्तेमाल करने वालों में दूसरे ग्रुप के मुकाबले हाथ कांपने, याददाश्त कमजोर होने, चक्कर आने से लेकर ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों का असर काफी कम देखा गया। जिन्होंने रोजाना एक से दो कप ग्रीन टी ली थी, उनमें खतरा 0.64 से 0.88 पर्सेंट तक कम हो गया था। इसी तरह 3-4 कप का इस्तेमाल करने वालों को 0.57 से 0.79 पर्सेंट और 5 कप ग्रीन टी लेने वालों में यह आंकड़ा 0.001 पर्सेंट था। स्टडी में शामिल वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रीन टी से न सिर्फ भविष्य में होने वाले खतरे को कम किया जा सकता है, बल्कि उन्हें भी काफी फायदा होता है, जिन्हें पहले से समस्या हो चुकी है। चूंकि, दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले पेय पदार्थों में चाय पहले नंबर पर है। सालाना करीब 300 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है, ऐसे में इसे लेने के तरीके और आदत में सुधार कर बड़ी संख्या में लोगों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।

फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं कि देश में 90 पर्सेंट से ज्यादा लोग चाय का इस्तेमाल करते हैं। यह अलग बात है कि रुचि के हिसाब से हर किसी के इस्तेमाल का तरीका अलग है, मगर ज्यादातर लोगों के इस्तेमाल का तरीका गलत होता है। यही वजह है कि चाय फायदे के बजाय नुकसान पहुंचाती है। मसलन, खाली पेट दूध के साथ पकी हुई सामान्य चाय पीने से पेट में गैस की समस्या आम है। काफी ज्यादा चीनी वाली गाढ़ी चाय कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने की वजह है। उनका कहना है कि ग्रीन टी पर पहले भी कई स्टडी हुई हैं, जिनमें इसके कई फायदे सामने आए हैं।नीतू सिंह

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