बुरी तरह बीमार वीर अस्पताल

मुक्ता झा:१२५ वर्षका इतिहास है- वीर अस्पताल । अस्पताल की आवश्यकता हरेक मानव के जीवन में होती ही है । क्योंकि मानव शरीर दुःखालय है । शरीर को दुःख से मुक्ति दिलाने वाला स्थान है अस्पताल । अतः मानव जीवन और अस्पताल का तादातम्य सम्बन्ध है । मानव और अस्पताल के बीच सम्वेदनशीलता का सम्बन्ध है । इसी मानवीय संवेदनशीलता के आधार पर १२४ वर्षपहले वीर शमशेर ने मेची से महाकाली तथा मधेश से लेकर हिमाली क्षेत्र की असहाय, लाचार, गरीब जनता की सेवा-सुविधा प्रदान करने हेतु चल-अचल सम्पत्ति देकर वीर अस्पताल स्थापित किया । इस अस्पताल की शुरुआत एक छोटी सी डिस्पेन्सरी के रूप में हर्ुइ थी । वही छोटी सी डिस्पेन्सरी समय के विभिन्न अन्तरालों को झेलते हुए, आज की विद्यमान अवस्था में वीर अस्पताल नामक संस्था चौबीसों घंटे मरीजों को सेवा-सुविधा प्रदान कर रही है । यह संस्था विभिन्न राजनीतिक -राणाकाल, पञ्चायतकाल, प्रजातान्त्रिककाल से लेकर वर्तमान गणतान्त्रिक शासन काल के) उतार चढÞाव को पार किया है । साथ ही अभी तक येन-केन-प्रकारेण एक सबल एवं सक्षम संस्था के रूप में सेवा ग्राहियों के बीच अपनी विश्वसनीयता दिखा चुकी है । लेकिन गणतन्त्र आने के बाद विभिन्न पार्टियों के हस्तक्षेप के कारण पदाधिकारियों की नियुक्तियों में भागबण्डा, विभिन्न भ्रातृ संगठनों के अनीतिपर्ूण्ा दबाव या हस्तक्षेप के कारण यह अति पुरानी संस्था भ्रष्टाचार का केन्द्रविन्दु बन चुकी है । इस संस्था के भ्रष्टाचार के बारे में दैनिक, साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाएं समय-समय पर नेपाल सरकार तथा सम्बन्धित निकायों का ध्यानाकार्षा कराती आ रही है । वीर अस्पताल प्रतिष्ठान में हो रहे भ्रष्टाचार तथा अन्य अनेक व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यानाकर्षा कराने का काम चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान वीर अस्पताल में कार्यरत नेपाल सरकार के ६३३ कर्मचारी की र्सवसम्मति से गठित आधिकारिक ट्रेड युनियन, नेपाल सरकार कर्मचारी हकहित संरक्षण संर्घष्ा समिति के द्वारा अति आवश्यक ३८ सूत्रीय मांगपत्र, नेपाल सरकार जनसंख्या मन्त्रालय द्वारा गठित सुझाव समिति के संयोजक डा. सेनेन्द्रराज उप्रेती के समक्ष प्रतिष्ठान में व्याप्त समस्या समाधानार्थ २०६८/९/८/६ के दिन पेश किया, किन्तु इस सर्न्दर्भ में आज तक कोई कारवाही नहीं हर्ुइ, जो चिन्ता का विषय है ।

bir hospital,बीमार वीर अस्पताल

बीमार वीर अस्पताल

समस्या समाधनार्थ संर्घष्ा समिति के आगे दो विकल्प बचे हुए है । एक- बन्द-हड्ताल, दूसरी- न्यायिक प्रक्रिया । लेकिन संगठन ने मानवीय संवेदनशीलता को ध्यान में रख कर और विवेक का प्रयोग करते हुए रोगियों के हित में अत्यावश्यकीय सेवाओं को बिना अवरुद्ध किए, नेपाल सरकार के स्वास्थ्य सम्बन्धी नीति तथा कार्यक्रम को सुचारु रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया को अपनाया और सर्वोच्च अदालत में नेपाल सरकार कर्मचारी हकहित संरक्षण संर्घष्ा समिति के द्वारा तथा कार्यरत पदाधिकारियों के द्वारा नौ-नौ बार रीट दायर किया जा चुका है । जो न्यायिक प्रक्रिया अदालत में लम्बित है ।
२०६३ साल में केन्द्रीय अस्पताल को नेपाल सरकार ने ऐन द्वारा स्वायत्त संस्था के रूप में मान्यता प्रदान की । ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ देश में स्वास्थ्य सम्बन्धी दक्ष जनशक्ति तैयार करना है । फलस्वरूप वर्तमान अवस्था में देश में ही दक्ष जनशक्ति तैयार किया गया । उदाहरण के लिए पोष्ट ग्रेजुएट, डी.एम, एम.डी, एम.एस, नर्सिंग, पैथोलाँजी, रेडियोलाँजी आदि विषयों में अध्ययन-अध्यापन कार्य करा कर विद्यार्थियों को सफल-सक्षम बना कर सेवाग्राहियों को अच्छी सेवा-सुविधा पदान करना है । इस लक्ष्य को पाने में प्रतिष्ठान सफल भी हुआ । परन्तु इस क्रम में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्राचीनतम संवेदनशील संस्था अनियमितता भ्रष्टाचार, कर्मचारी वृत्ति विकास में विभेद, कर्मचारी की सुविधा वृद्धि हेतु सेवा ग्राहियों पर शुल्क वृद्धि का कमरतोडÞ बोझ, विभिन्न उपकरण तथा अन्य आवश्यक सामग्री खरीद-विक्री से ऐन-नियम प्रतिकूल हो रहे कार्य के कारण विशुद्ध मानवीय संवेदनशील संस्था दिन प्रतिदिन अनियमितता का शिकार हो रही है, जो दाता के उद्देश्य प्रतिकूल तथा सेवा ग्राहियों को निराश करने तथा उनके मनोबल को गिराने का कार्य इस संस्था के द्वारा की जा रही है, जो चिन्ता का विषय है ।
स्वास्थ्य सेवा आम नागरिकों का आधारभूत एवं मौलिक अधिकार है । अन्तरिम संविधान में आम नागरिकों के लिए यह अधिकार सुनिश्चित किया गया है, किन्तु संस्था द्वारा किया जाने वाले व्यवहार में र्सवसाधारण जनता स्वास्थ्य सेवा के मौलिक अधिकार को उपभोग करने से वञ्चित हो रही है । अस्पताल व्यवस्थापन की नालायकी और चिकित्सकों के द्वारा गैर जिम्मेदार व्यवहारों के कारण र्सवसाधारण सेवाग्राही दुष्परिणाम भोगने के लिए बाध्य है ।
सर्न्दर्भ वीर अस्पताल का है । वैसे तो गैर जिम्मेवार व्यवहार सभी अस्पतालों एवं नसिर्ंग होम में किया जा रहा है । इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्ूण्ा रूप में माफियों का राज है । वीर अस्पताल प्राचीनतम वरिष्ठ और आम जनता के हित सुरक्षित करने वाले अस्पताल के रूप में पहचाना जाता है । चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान -नाम्स) अर्न्तर्गत २०६३ साल मंसीर महीने से सञ्चालित हुआ । यह अस्पताल दिन प्रतिदिन अनियमितता एवं विभिन्न प्रकार के भ्रष्टाचारों के कारण अस्तव्यस्त होता जा रहा है । इस संस्था में व्याप्त घोर अनियमितता, भयंकर भ्रष्टाचार तथा विभेदकारी नीति के घनचक्कर के बीच में दातृ देश कैसे सहयोग देता रहेगा, यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है । इस संस्था में खास कर प्रजातान्त्रिक पडÞोसी देश भारत का सहयोग सराहनीय है । भारतीय सहयोग से ही इस संस्था का अनेक निर्मित भवन हैं तथा ट्रमा सेन्टर तैयार है और नेपाल सरकार को यह भवन प्रर्त्यर्पण होने की प्रतीक्षा में है । अतः इस ट्रामा सेन्टर का सही सदुपयोग हो तथा दातृ संस्था, दातृ राष्ट्र का उच्च मनोबल की रक्षा हो, इसकी अपरिहार्य जरुरत है । इस सर्न्दर्भ में राष्ट्रीय र्सतर्कता केन्द्र संवैधानिक अंग के निर्देशनों तथा अख्तियार दुरूपयोग अनुसंधान आयोग के सुझावों का अक्षरशः पालन हो और सेवाग्राहियों को उचित सेवा प्रदान हो तो सही र्सार्थकता साबित होगी ।
समय-समय पर प्रतिष्ठान के कर्मचारियों की सुविधा बढÞाने के उद्देश्य से नाजायज आर्थिक लाभ हेतु सेवाग्राहियों पर अतिरिक्त कमरतोडÞ आर्थिक बोझ बढÞाने का काम अनुचित ही नहीं अमानवीय कार्य है । इससे गरीब, असाहृय, दीन-दुःखी, लाचारजन सेवा लेने से वञ्चित हुआ है, जो घोर अमानवीय अपराध है । इस स्वार्थपर्ूण्ा शुल्क वृद्धि को हटाने के लिए भी रीट निवेदन अदालत में दिया गया है ।
चि.वि.रा.प्र. वीर अस्पताल में कार्यरत समिति की ओर से नियुक्त कर्मचारी तथा नेपाल सरकार स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय अर्न्तर्गत कार्यरत कर्मचारी, दोनों को न्यायोचित तरीके से न्याय प्राप्त कराने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय में दायर रीट के आधार पर और सेवा प्रवेश के समय निर्धारित की गई योग्यता के आधार पर बिना विभेद सेवा निवृत होने तक सेवा में रहने देने की व्यवस्था, इस प्रतिष्ठान के ऐन २०६३ को आधार मान कर बना था । किन्तु आज कर्मचारी सेवा शर्त नियमावली २०६५।१०।१० में संशोधन करके इस संस्था में विद्यमान समस्या का अविलम्ब समाधान करने की जरुरत है ।
चि.वि.का.प्र. वीर अस्पताल सरकारी मान्यता प्राप्त स्वायत्तता में राजनीतिक हस्तक्षेपकारी कार्य अन्त करते हुए व्याप्त समस्याओं का समाधान किया जाए । जिससे कार्यरत कर्मचारियों के बीच व्याप्त आपसी मनमुटाव का अन्त हो और भविष्य में पदाधिकारियों, कर्मचारियों की नियुक्ति तथा अध्ययन-अध्यापन कार्य में आने वाले विद्यार्थी और प्राध्यापक की सहभागिता कार्य में समावेशी प्रक्रिया को आधार बनाया जाए । इसी से प्रतिष्ठान और अस्पताल में पारदर्शिता स्थापित होगी ।
अन्त में इस अस्पताल में उचित उपकरण न होने से रोगी प्रभावित होते हंै, अध्ययनरत चिकित्सक  भी उचित ज्ञानवर्धक शिक्षा पाने से वञ्चित रहते हैं । उच्च विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले चिकित्सक लोग उपकरण के अभाव में विषयगत दक्षता प्राप्त नहीं कर पाते । ऐसा इसलिए किया जाता है कि ताकि निजी अस्पतालों पर प्रतिकूल प्रभाव न पडÞे, ऐसा आरोप अध्ययनरत चिकित्सकों का है । सस्ती सेवा सुविधा प्राप्त करने के उद्देश्य से आने वाले र्सवसाधारण जनता अल्ट्रासाउण्ड, एक्सरे आदि निजी चिकित्सालयों में कराने को बाध्य रहती है । इन सभी समस्याओं को देखते हुए वीर अस्पताल व्यवस्थापन समिति को इस ओर गम्भीरतापर्ूवक सुधारोन्मुख उपायों को अपनाने की जरूरत है ।
बुरी तरह बीमार वीर अस्पताल
मुक्ता झा
१२५ वर्षका इतिहास है- वीर अस्पताल । अस्पताल की आवश्यकता हरेक मानव के जीवन में होती ही है । क्योंकि मानव शरीर दुःखालय है । शरीर को दुःख से मुक्ति दिलाने वाला स्थान है अस्पताल । अतः मानव जीवन और अस्पताल का तादातम्य सम्बन्ध है । मानव और अस्पताल के बीच सम्वेदनशीलता का सम्बन्ध है । इसी मानवीय संवेदनशीलता के आधार पर १२४ वर्षपहले वीर शमशेर ने मेची से महाकाली तथा मधेश से लेकर हिमाली क्षेत्र की असहाय, लाचार, गरीब जनता की सेवा-सुविधा प्रदान करने हेतु चल-अचल सम्पत्ति देकर वीर अस्पताल स्थापित किया । इस अस्पताल की शुरुआत एक छोटी सी डिस्पेन्सरी के रूप में हर्ुइ थी । वही छोटी सी डिस्पेन्सरी समय के विभिन्न अन्तरालों को झेलते हुए, आज की विद्यमान अवस्था में वीर अस्पताल नामक संस्था चौबीसों घंटे मरीजों को सेवा-सुविधा प्रदान कर रही है । यह संस्था विभिन्न राजनीतिक -राणाकाल, पञ्चायतकाल, प्रजातान्त्रिककाल से लेकर वर्तमान गणतान्त्रिक शासन काल के) उतार चढÞाव को पार किया है । साथ ही अभी तक येन-केन-प्रकारेण एक सबल एवं सक्षम संस्था के रूप में सेवा ग्राहियों के बीच अपनी विश्वसनीयता दिखा चुकी है । लेकिन गणतन्त्र आने के बाद विभिन्न पार्टियों के हस्तक्षेप के कारण पदाधिकारियों की नियुक्तियों में भागबण्डा, विभिन्न भ्रातृ संगठनों के अनीतिपर्ूण्ा दबाव या हस्तक्षेप के कारण यह अति पुरानी संस्था भ्रष्टाचार का केन्द्रविन्दु बन चुकी है । इस संस्था के भ्रष्टाचार के बारे में दैनिक, साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाएं समय-समय पर नेपाल सरकार तथा सम्बन्धित निकायों का ध्यानाकार्षा कराती आ रही है । वीर अस्पताल प्रतिष्ठान में हो रहे भ्रष्टाचार तथा अन्य अनेक व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यानाकर्षा कराने का काम चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान वीर अस्पताल में कार्यरत नेपाल सरकार के ६३३ कर्मचारी की र्सवसम्मति से गठित आधिकारिक ट्रेड युनियन, नेपाल सरकार कर्मचारी हकहित संरक्षण संर्घष्ा समिति के द्वारा अति आवश्यक ३८ सूत्रीय मांगपत्र, नेपाल सरकार जनसंख्या मन्त्रालय द्वारा गठित सुझाव समिति के संयोजक डा. सेनेन्द्रराज उप्रेती के समक्ष प्रतिष्ठान में व्याप्त समस्या समाधानार्थ २०६८/९/८/६ के दिन पेश किया, किन्तु इस सर्न्दर्भ में आज तक कोई कारवाही नहीं हर्ुइ, जो चिन्ता का विषय है ।
समस्या समाधनार्थ संर्घष्ा समिति के आगे दो विकल्प बचे हुए है । एक- बन्द-हड्ताल, दूसरी- न्यायिक प्रक्रिया । लेकिन संगठन ने मानवीय संवेदनशीलता को ध्यान में रख कर और विवेक का प्रयोग करते हुए रोगियों के हित में अत्यावश्यकीय सेवाओं को बिना अवरुद्ध किए, नेपाल सरकार के स्वास्थ्य सम्बन्धी नीति तथा कार्यक्रम को सुचारु रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया को अपनाया और सर्वोच्च अदालत में नेपाल सरकार कर्मचारी हकहित संरक्षण संर्घष्ा समिति के द्वारा तथा कार्यरत पदाधिकारियों के द्वारा नौ-नौ बार रीट दायर किया जा चुका है । जो न्यायिक प्रक्रिया अदालत में लम्बित है ।
२०६३ साल में केन्द्रीय अस्पताल को नेपाल सरकार ने ऐन द्वारा स्वायत्त संस्था के रूप में मान्यता प्रदान की । ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ देश में स्वास्थ्य सम्बन्धी दक्ष जनशक्ति तैयार करना है । फलस्वरूप वर्तमान अवस्था में देश में ही दक्ष जनशक्ति तैयार किया गया । उदाहरण के लिए पोष्ट ग्रेजुएट, डी.एम, एम.डी, एम.एस, नर्सिंग, पैथोलाँजी, रेडियोलाँजी आदि विषयों में अध्ययन-अध्यापन कार्य करा कर विद्यार्थियों को सफल-सक्षम बना कर सेवाग्राहियों को अच्छी सेवा-सुविधा पदान करना है । इस लक्ष्य को पाने में प्रतिष्ठान सफल भी हुआ । परन्तु इस क्रम में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्राचीनतम संवेदनशील संस्था अनियमितता भ्रष्टाचार, कर्मचारी वृत्ति विकास में विभेद, कर्मचारी की सुविधा वृद्धि हेतु सेवा ग्राहियों पर शुल्क वृद्धि का कमरतोडÞ बोझ, विभिन्न उपकरण तथा अन्य आवश्यक सामग्री खरीद-विक्री से ऐन-नियम प्रतिकूल हो रहे कार्य के कारण विशुद्ध मानवीय संवेदनशील संस्था दिन प्रतिदिन अनियमितता का शिकार हो रही है, जो दाता के उद्देश्य प्रतिकूल तथा सेवा ग्राहियों को निराश करने तथा उनके मनोबल को गिराने का कार्य इस संस्था के द्वारा की जा रही है, जो चिन्ता का विषय है ।
स्वास्थ्य सेवा आम नागरिकों का आधारभूत एवं मौलिक अधिकार है । अन्तरिम संविधान में आम नागरिकों के लिए यह अधिकार सुनिश्चित किया गया है, किन्तु संस्था द्वारा किया जाने वाले व्यवहार में र्सवसाधारण जनता स्वास्थ्य सेवा के मौलिक अधिकार को उपभोग करने से वञ्चित हो रही है । अस्पताल व्यवस्थापन की नालायकी और चिकित्सकों के द्वारा गैर जिम्मेदार व्यवहारों के कारण र्सवसाधारण सेवाग्राही दुष्परिणाम भोगने के लिए बाध्य है ।
सर्न्दर्भ वीर अस्पताल का है । वैसे तो गैर जिम्मेवार व्यवहार सभी अस्पतालों एवं नसिर्ंग होम में किया जा रहा है । इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्ूण्ा रूप में माफियों का राज है । वीर अस्पताल प्राचीनतम वरिष्ठ और आम जनता के हित सुरक्षित करने वाले अस्पताल के रूप में पहचाना जाता है । चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान -नाम्स) अर्न्तर्गत २०६३ साल मंसीर महीने से सञ्चालित हुआ । यह अस्पताल दिन प्रतिदिन अनियमितता एवं विभिन्न प्रकार के भ्रष्टाचारों के कारण अस्तव्यस्त होता जा रहा है । इस संस्था में व्याप्त घोर अनियमितता, भयंकर भ्रष्टाचार तथा विभेदकारी नीति के घनचक्कर के बीच में दातृ देश कैसे सहयोग देता रहेगा, यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है । इस संस्था में खास कर प्रजातान्त्रिक पडÞोसी देश भारत का सहयोग सराहनीय है । भारतीय सहयोग से ही इस संस्था का अनेक निर्मित भवन हैं तथा ट्रमा सेन्टर तैयार है और नेपाल सरकार को यह भवन प्रर्त्यर्पण होने की प्रतीक्षा में है । अतः इस ट्रामा सेन्टर का सही सदुपयोग हो तथा दातृ संस्था, दातृ राष्ट्र का उच्च मनोबल की रक्षा हो, इसकी अपरिहार्य जरुरत है । इस सर्न्दर्भ में राष्ट्रीय र्सतर्कता केन्द्र संवैधानिक अंग के निर्देशनों तथा अख्तियार दुरूपयोग अनुसंधान आयोग के सुझावों का अक्षरशः पालन हो और सेवाग्राहियों को उचित सेवा प्रदान हो तो सही र्सार्थकता साबित होगी ।
समय-समय पर प्रतिष्ठान के कर्मचारियों की सुविधा बढÞाने के उद्देश्य से नाजायज आर्थिक लाभ हेतु सेवाग्राहियों पर अतिरिक्त कमरतोडÞ आर्थिक बोझ बढÞाने का काम अनुचित ही नहीं अमानवीय कार्य है । इससे गरीब, असाहृय, दीन-दुःखी, लाचारजन सेवा लेने से वञ्चित हुआ है, जो घोर अमानवीय अपराध है । इस स्वार्थपर्ूण्ा शुल्क वृद्धि को हटाने के लिए भी रीट निवेदन अदालत में दिया गया है ।
चि.वि.रा.प्र. वीर अस्पताल में कार्यरत समिति की ओर से नियुक्त कर्मचारी तथा नेपाल सरकार स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय अर्न्तर्गत कार्यरत कर्मचारी, दोनों को न्यायोचित तरीके से न्याय प्राप्त कराने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय में दायर रीट के आधार पर और सेवा प्रवेश के समय निर्धारित की गई योग्यता के आधार पर बिना विभेद सेवा निवृत होने तक सेवा में रहने देने की व्यवस्था, इस प्रतिष्ठान के ऐन २०६३ को आधार मान कर बना था । किन्तु आज कर्मचारी सेवा शर्त नियमावली २०६५।१०।१० में संशोधन करके इस संस्था में विद्यमान समस्या का अविलम्ब समाधान करने की जरुरत है ।
चि.वि.का.प्र. वीर अस्पताल सरकारी मान्यता प्राप्त स्वायत्तता में राजनीतिक हस्तक्षेपकारी कार्य अन्त करते हुए व्याप्त समस्याओं का समाधान किया जाए । जिससे कार्यरत कर्मचारियों के बीच व्याप्त आपसी मनमुटाव का अन्त हो और भविष्य में पदाधिकारियों, कर्मचारियों की नियुक्ति तथा अध्ययन-अध्यापन कार्य में आने वाले विद्यार्थी और प्राध्यापक की सहभागिता कार्य में समावेशी प्रक्रिया को आधार बनाया जाए । इसी से प्रतिष्ठान और अस्पताल में पारदर्शिता स्थापित होगी ।
अन्त में इस अस्पताल में उचित उपकरण न होने से रोगी प्रभावित होते हंै, अध्ययनरत चिकित्सक  भी उचित ज्ञानवर्धक शिक्षा पाने से वञ्चित रहते हैं । उच्च विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले चिकित्सक लोग उपकरण के अभाव में विषयगत दक्षता प्राप्त नहीं कर पाते । ऐसा इसलिए किया जाता है कि ताकि निजी अस्पतालों पर प्रतिकूल प्रभाव न पडÞे, ऐसा आरोप अध्ययनरत चिकित्सकों का है । सस्ती सेवा सुविधा प्राप्त करने के उद्देश्य से आने वाले र्सवसाधारण जनता अल्ट्रासाउण्ड, एक्सरे आदि निजी चिकित्सालयों में कराने को बाध्य रहती है । इन सभी समस्याओं को देखते हुए वीर अस्पताल व्यवस्थापन समिति को इस ओर गम्भीरतापर्ूवक सुधारोन्मुख उपायों को अपनाने की जरूरत है ।

Tagged with
loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz