बेन जिया बाओ का नेपाल दौरा
श्रीमन नारायण

चीन के प्रधानमन्त्री बने जियाबाओ के नेपाल भ्रमण को कतिपय कोणों से अर्थपर्ूण्ा माना जाएगा। उनका अगामन भी कम रोमान्चक नहीं था। उनके भ्रमण के दौरान एक दर्जन सम्झौतों पर दस्तखत हुए। नेपाल की डा. बाबुराम भट्टर्राई की नेतृत्ववाली माओवादी-मधेशी मोर्चा सम्मिलित साझी सरकार भले ही इसे सफल मान रही हो परन्तु नेपाल के दृष्टिकोण से इसे अधिक उपलब्धिमूलक नहीं माना जाना चाहिए।
सनसनी खेज दौराः
चीन के प्रधानमन्त्री को दिसम्बर के तीसरे सप्ताह में नेपाल आना था, परन्तु उनके भ्रमण को गोप्य नहीं रखा गया । इसलिए वे नहीं आ सके। नेपाल के वामोपन्थी, पत्रकार नेता एवं तमाम विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता मान रहे थे। डा. भट्टर्राई सरकार की अदूरदर्शी नीतियाँ या भारतपरस्ती के कारण वे नहीं आ सके ऐसा आरोप उस समय आम हो गया था। ये अलग बात है कि चीन के विदेश मन्त्रालय और काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के अधिकारियों ने इसे चीन के आन्तरिक मामला को वजह बताया था। दिसम्बर में उन्हें म्यानमार होते नेपाल आना था परन्तु उस समय म्यानमार के साथ चीनका सम्बन्ध कुछ तनावपर्ूण्ा हो गया था, लिहाजा के नहीं आ सके। दूसरा वजह यह भी हो सकता है कि चूंकि उनके नेपाल भ्रमण के सम्बन्ध में नेपाली अखबारों मे काफी कुछ छप चुका था। लिहाजा चीन को इस बात का अन्दाजा था कि कही प्रधानमन्त्री के भ्रमण के दौरान तिब्बती शरणार्थी विरोध पर््रदर्शन या आत्मदाह जैसी कोई घटना न कर दें – चीन नेपाल सरकार से पूरी तरह आश्वस्त होना चाहता था कि कहीं से असुरक्षावाली नौवत न हो। भ्रमण को इतना गोप्य रखा गया कि सुबह मन्त्रिमण्डलीय बैठक से पहले देश के मन्त्रियों तक को इसकी भनक नहीं लगी थी। सुरक्षा का पुख्ता इन्ताजाम हो जिससे कोई परिन्दा भी पर नहीं मार सके। उनका चुपके-चुपके और चोरी-चोरी आना किसी को भी अच्छा नहीं लगा।
क्यों आए जियाबाओः
अमेरिकी संसद सदस्य और उसके बजट आवंटन कमिटी की सदस्य प|mान्स आलेम ने तिब्बत के मसलों को लेकर नेपाल को धम्की देने के पन्ध्र दिन बाद ही चीन के प्रधानमन्त्री का नेपाल दौरा भी तय हुआ। म्यानमार के साथ हुए विवाद के कारण उनका यह दौरा उस समय टल गया था, जो अभी हुआ है। अमेरिकी संसद में प्रभावशाली माने जानेवाले जनाद ओल्फ भर्जिनिया स्टेट से रिपब्लिकन सांसद हंै। उनका कहना था नेपाल की सरकार अगर तिब्बत से आए तिब्बतियों को भारत या तीसरा देश जाने देने के बजाय उन्हें पुनः तिब्बत की ओर ही भेजने का काम अगर नहीं रोका तो नेपाल को तिब्बत के सम्बन्ध में हमारी मान्यता और अवधारणा को कबुल नहीं करता तो नेपाल को अमेरिकी सहायता देने का कोई अर्थ नहीं होता। अगर नेपाल सरकार तिब्बत के सम्बन्ध में हमारी मान्यता और अवधारणा को कबुल नहीं करती तो वह हमारे डलर सहयोग स्वीकार के काविल भी नहीं है। नेपाल सरकार तिब्बतियों के मानव अधिकार का सम्मान नहीं करती तो उसे दी जा रही सहयता समाप्त कर दी जाएगी।
दूसरी ओर एक अमेरिकी गैर सरकारी संस्था हिमालयन एड के अन्तर्रर्ाा्रीय निर्देशक जेम्स रिनाल्डी ओल्फ से सहमत नहीं है उनका मानना है कि नेपाल पर अधिक दबाव डालने पर चीन का शिकंजा और बढÞता जाएगा। अमेरिका और चीन का दबाव सहना नेपाल के लिए कठीन है। चीन जे तिब्बत मसले को अपने लिए र्सवाधिक खतरा का विषय मान लिया है तभी तो बाहरी खतरा से सुरक्षा की फेहरिस्त तिब्बत को पी.एफ. -पहली प्राथमिकता) में दिया है। चीन मामलों के जानकारों का कहना है कि सन् नब्बे के दशक में अमेरिका ने इराक के खिलाफ कुवेत बचाओ लडाइँ अभियान, अपरेशन डर्ेजर्ट र्स्र्टभ, सन् २००६ में इराक पर हमला, सन् २००३ में अफगानिस्तान में उपस्थिति एवं कार्रवाई करते अमेरिका अब दक्षिण एशिया में अपनी शक्ति का पर््रदर्शन करना चाहता है। चीन इससे चौकन्ना है। चीन के प्रधानमन्त्री का दौरा तिब्बत केन्द्रित ही होना था और वही हुआ भी।
सन् १९५९ में पञ्चशील के आधार पर चीन के साथ द्विपक्षीय मैत्री सम्बन्ध कायम हुआ था। परन्तु सन् २००८ के मार्च में चीन ने सन्धी का वह मस्यौदा जो खुद उसने तैयार किया था, नेपाल के परराष्ट्र मन्त्रालय को दिया था। शान्ति एवं मैत्री सन्धी के मस्यौदे को सन्धी के रुप में मान्यता देने का प्रस्ताव चीन का है। प्रचण्ड के प्रधानमन्त्रित्व काल में चीन ने बिजिंग में यह मस्यौदा तैयार करवाया था। मस्यौदे को लेकर चीनी अधिकारियों की एक टिम नेपाल आयी थी परन्तु परराष्ट्र मन्त्रालय के एक अधिकारी के द्वारा ये बाते मीडिÞया तक आ जाने के बाद चीन काफी आक्रोशित था। प्रचण्ड की सरकार ही चली गई नहीं तो शायद वह मस्यौदा सन्धी का रुप ले लेता। चीन नेपाल के साथ सुपर्ुदगी सन्धी भी चाहता है ताकि चीन विरोधी में संलग्न लोगों की सुपर्ुदगी नेपाल से हो सके। चीन नेपाल-चीन सीमा पर दश हजार सुरक्षाकर्मी परिचालन करने की माँग भी कर रहा था ताकि तिब्बती क्षेत्र में हो रहे गतिविधि पर नजर रखा जा सके।
लुम्बिनी में दलाई लामा के आगमन और पडÞाव को लेकर चीन र्सतर्क है तभी तो वह लुम्बिनी में इतनी बडÞी रकम निवेश करने को तैयार है। दलाई लामा से महज मिलने के कारण ही एक मधेशवादी सांसद को मन्त्रिमण्डल से निकाले जाने की मांग चीन ने नेपाल सरकार से की थी। चीन का मानना है कि नेपाल अमेरिका एवं पश्चिमी देश भारत की नीति का ही र्समर्थन करता है लिहाजा चीन भारत से भी उतना ही र्सतर्क है। परन्तु भारत को नाराज करके चीन नेपाल को खुश करना नहीं चाहता था। बेन जियाबाओ का यह कहना था कि भारत के साथ हमारी अच्छी दोस्ती हो लिहाजा नेपाल भी भारत के साथ अच्छा सम्बन्ध बना कर रहे। चीन नहीं चाहता कि भारत को नाराज करके अमेरिका को इस क्षेत्र में दादागिरी करने का कोई भी अवसर दिया जा सके।
क्या है सम्झौते मेंः
आठ सूत्रीय सम्झौते में सन् १९५५ के द्विपक्षीय कूटनीतिक सम्बन्ध, आपसी सहयोग और मित्रता को सहअस्तित्व के रुप में विकसित करना है। यह एक बिस्तृत विषय है। इसका प्रभाव समय-समय पर दिखता जाएगा। दोनों देशों के बीच गठित कूटनीतिक, आर्थिक एवं व्यापारिक समितियों के माध्यम से भेटघाट को प्रभावकारी बनाया जाएगा। विदेशमन्त्री के स्तर पर परामर्श संजाल तय किए जाएंगे। ताईवान और तिब्बत चीन का अटूट हिस्सा है। ऐसा नेपाल मानता आया है तथा नेपाल की धरती से चीन विरोधी गतविधि करने पर नेपाल द्वारा लगाई गई रोक पर चीन नेपाल की सराहना करता है। नेपाल में जारी शान्ति प्रक्रिया की चीन प्रशंसा करता है और जल्द ही नेपाल में नयाँ संविधान आयेगा, ऐसा चीन को विश्वास है।
दोनों पक्ष द्विपक्षीय सामाजिक, आर्थिक विकास, व्यापार एवं पर्यटन पर््रवर्द्धन पनबिजली, यातायात संरचना निर्माण के क्षेत्र में सहयोग करें। जाहिर है यह एक तरफा होगा। काठमांडू चक्रपथ और तातोपानी सुख्खा बन्दरगाह के स्तरोन्नति में चीन सहयोग करेगा। आर्थिक, प्रादेशिक सहयोग के तहत उपरी त्रिशुली तीसरा, पोखरा एयरपोर्ट के निर्माण में चीन सहयोग करेगा। साझा योजना के कार्यक्रम जल्द बढÞाए जाएंगे और सस्ता कर्जा देने की प्रक्रिया आसान होगी। निवेदश भी बढेÞगा। सीमा व्यवस्थापन में दोनों देशों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। सन् २०१२ नेपाल-चीन मैत्री आदान-प्रदान वर्षहोगा तो काठमांडू में हो रहे चीन महोत्सव को तिरन्तरता दी जाएगी। प्रमुख अन्तर्रर्ाा्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाई जाएगी। नेपाल के प्रधानमन्त्री से उपयुक्त समय पर चीन आने के लिए निमन्त्रण भी प्राप्त हुआ है।
±±±

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz