बेलुनसरकार ! पिएम का वश चलता तो भूकंप पीडितो को भी बेलुन के साथ ही उड़ा देते !

बिम्मीशर्मा, काठमांडू, १४ अप्रैल |
पिछले सालआजही के दिन देश में त्रास मचा था । जब भूकंप नें सभी के होशो हवास गूम कर दिए थे । आज जिनके होश थोडे खुले हुए है वहअपने सुख चूके आँसूओं की पपडी को सहला रहे है । पर अभीतक बेहोश नेपाल सरकार किसी बच्चे की बेलुन उडा कर अपना नटखट पन दिखा रहा है । एक छोटा बच्चा ही किसी के गम या मरने पर भी चकलेट या मीठाई की मांग कर सकता है क्यों कि उस में परिस्थिति का आकलन करने और उसी के अनुसार संवेदना व्यक्त करने कि बुद्धि नहीं होती । शायद हमारे देश की सरकार कि भी बुद्धि नहीं है या संवेदना हीन हो गई है ईसी लिए बेलुन उडा कर अपना धर्म निभा रहा है । क्या किसी देश की सरकार ऐसा गैर जिम्मेदाराना हरकत कर सकती है ?

क्या पिछले साल की तवाही का मातम मनाने के लिए बेलुन उडाना जरुरी है । बेलुन तो खुशी में, बच्चो की किलकारी में उडाया जाता है । क्या भूकंप की पहली बरसी में सरकार अपने चेतना के स्तर से निचे नहीं गिर गयी ? क्या बेलुन कि तरह उन भूकंप पीडितों का दुख भी उड जाएगा ? जिन पीडितों ने भूकंप के कई महिने बाद तक टेंट मे रात गुजारी । जिनके आशियाने उजड गये । जिनके घर और अन्न के दाने मलबे में तब्दिल हो गए । क्या तबाही का वह मंजर वह कभी भूल पाएगें । और ऐसे समय में हमारे देश की सरकार उन पीडितों के कुछ करने कि बजाय बेलुन उडा रही है ।
क्या सरकार के मुखिया केपी शर्मा ओली मदं बुद्धि हैं ? पीतिों के घाव में मलहम लगाने की बजाय वह उन से आंख नही मिलापा रहे हैं शायद ईसी लिए आकाश की ओर देख कर बेलुन उडाते हुएअपने कर्तव्य कि ईतीश्री कर रहे हैं । भूकंप पीडितों के लिए अरबों रुपएं का सहयोग विदेशों से आया । वह कहां गया? पीडितो के लिए वास स्थान बनाने के लिए पुननिर्माण प्राधिकरण बन कर अभीतकउसने काम क्यों नहीं किए ? अभी तक तो पीडितों के लिए घर बनजाने चाहिए थे वह क्यों नहीं बने ? पीडितों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं । बिना घर के ही उन्होने  बर्खा और सर्दी बिताई । पर हमारे देश की निर्लज्जऔर मतिहीन सरकार आज बेलुन उडा रही है ।Nepal-Earthquake-l-reuters
पिएम ओली हवा से बिजली निकालने की बात करते थे । कहीं उसी हवा को ही तो उन्होने बेलुन में भर कर तो नहीं उडा दिया । आखिर में हवा मूफ्त कि वस्तु है, कहीं तो काम आनी चाहिए । जिस देश के पिएम के दिमाग में ही हवा भरी हो वह ऐसे ही हवादारी बातें कर के जनता को हवा में उडाता है । हमारे पिएम का वश चलता तो उन सारे भूकंप पीडितो को भी बेलुन के साथ ही उडा कर सात समुद्र पार ले जा कर पटक देते । ताकि न रहे बांस न बजे बांसुरी । उन भूकंप मे मारे गए लोगों की चिहान पर खडे हो बेलुन उडाने वाला ईंसान ईस देश का प्रधानमंत्री बनने कि पात्रता नहीं रख सकता । एसी संवेदनाहीन सरकार और ऐसा मूकर्टटा जैसा प्रधानमंत्री किसी दुश्मन को भी नसिब न हो । काश केपी ओली उसी बेलुन के साथ ही उड जाते और कभी वापस न आते ?
जिस देश का पिएम बिना किसी तयारी के ही मंच मे जा कर हवा से बिजली निकालने, घर, घर में गैस की पाईप लाईन जोडने और राजधानी काठमाडूं में मेट्रो रेल लाने कि हवाई बाते करता है । उस से आज के दिन बेलुन उडाने से ज्यादा की उम्मिद रखने वाली जनता ही महामूर्ख है । पिएम ओली तो जमिन में गहिराई से खोदे बिना ही हवाई किले बनाने की बडी, बडी बातें करते है । अब किसी दिन पिएम ओली पारा ग्लाईडिगं करते हुए चांद पर पहुंचने का हवाई रास्ता बनाने की बातें करे तो किसीको आश्चर्य नहीं होगा । भगवान नें मूहं और जिभ दिए है खाने ओर बोलने के लिए । पर हमारे पिएम महाशय उसका ईस्तेमाल आग उगलने के लिए करते हैं ।
नहीं तो राजधानी काठमाडूं मे टैन चलाना कोई मजाक नहीं है । ईस के लिए वर्षों तक योजना बनाने और खरबों रुपएं कि लगानी करनी पडती है । जहां आए दिन किसी न किसी बहाने से किसी न किसी राजनीतिक दल के चलते बंद होता ही रहता है । वहां पर मेट्रो रेल बनाने की योजना इकनी वाले महारथी ही कर सकते है । जो स्टेरोईड का ईंजेक्शन लगा कर और दवा खा कर अनाप शनाप बोल कर अपने व्यक्तित्व को ही हावादारी बनाने का काम करते हैं ।
जिस पिएम के पास न बुद्धि है न विवेक है । न पीडितों के लिए कोही संवेदना है बस कुसी पर टिके रहने कि जालसाजी प्रपंच आते हों । उस पिएम किबात से न दिल में कोई उम्मिद जगती है । बस बेलुन कि तरह सुदंर और तुरुतं आकाश मे विलीन हो जाने वाला ही जिस किऔकात है । बेलुन धूप का तेज मार सह नहीं पाताऔर फूट जाता है । उसी तरह हमारें पिएम कि उभरे हुए गाल भी एक दिन पिचकेगें ही तब उन्हे पता चलेगा आज के दिन बेलुन उडाना कितना अर्थहीनऔर संवेदनाहीन कार्य है । पिएम ओली ने खुदही अपना वजूद बेलुनकी तरह बना लिया है । जो खुद ही बेलुन कि तरह हल्काऔर अस्तित्वहीन हो वह बेलुन ही उडाएगा ।
हवा में उडता जाए हमारे,
पिएम ओलीका बेलुन रगं रगं का ।
सिहं दरवार में अबना समाए,
ईन का वजुद बेशर्मी का ।

व्यग्ंय

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