बेहतर शिक्षा की क्या है राह

आषाढ़ महीना परीक्षाफल व नामांकन के मौसम के नाम से जाना जाता है । क्योंकि कुछ वर्षों से माध्यमिक शिक्षा परीक्षा का नतीजा प्रायः इसी महीने के आरंभ में आता है और ग्यारहवीं कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया भी इसी महीने से शुरु होती है । नेपाल में माध्यमिक शिक्षा परीक्षाओं के नतीजे खास महत्व रखते हैं क्योंकि ये एक ओर स्कूल शिक्षा की दशा का एहसास कराते हैं, तो दूसरी ओर इससे उच्च शिक्षा के भविष्य की पड़ताल की जा सकती है ।
इस वर्ष एसईई के परीक्षाफल को सुधारोन्मुख तो देखा गया है, परन्तु १ लाख से अधिक छात्र ११ वीं कक्षा में नामांकन करने से वंचित होने की स्थिति देखी जा रही है । क्योंकि विज्ञान, मानविकी, शिक्षा, कानून संकायों में किसी भी विषय के लिए अंग्रेजी, नेपाली व सामाजिक में ‘डी प्लस’ लाना पड़ता है । इस वर्ष के नतीजे मुताबिक सामाजिक विषय में ‘डी’ व ‘ई’ ग्रेड लाने वाले छात्रों की संख्या १ लाख ६ हजार ४ सौ ६४ हैं । इसी प्रकार अंग्रेजी में ‘डी’ व ‘ई’ ग्रेड लाने वालों की संख्या ६५ हजार ७० एवं नेपाली में ‘डी’ व ‘ई’ लाने वालों की संख्या ६५ हजार हैं । सामाजिक विषय को ही आधार माना जाए तो परीक्षा में शामिल हुए कुल ४ लाख ४५ हजार ५ सौ ६४ छात्रों में केवल ३ लाख ३९ हजार १ सौ छात्र ११ वीं कक्षा में नामांकन हेतु योग्य होंगे । जबकि १.६ प्रतिशत से कम जीपीए लाने वाले छात्रों (६९ हजार) की संख्या को इसमें नहीं जोड़ा गया है । पिछले वर्ष ४ लाख ३७ हजार छात्र एसईई की परीक्षा में शामिल हुए थे । इनमें से केवल १ लाख १२ हजार छात्रों ने सामाजिक विषय में ‘डी’ से भी कम जीपीए लाया था । इस प्रकार पिछले वर्ष शामिल हुए कुल छात्रों में से केवल ३ लाख ४८ हजार अर्थात् ८० प्रतिशत छात्र ११वीं कक्षा में नामांकित हो पाए । पिछले वर्ष की नामांकन संख्या को आधार मानते हैं तो इस वर्ष ३ लाख ५० हजार छात्र मात्र ११ वीं कक्षा में भर्ना हेतु योग्य हो सकते हैं ।
भर्ना मापदंड अनुसार विज्ञान समूह अध्ययन हेतु न्यूनतम २ जीपए (ग्रेड एवरेज प्वांइट) व्यवस्थापन, मानविकी व शिक्षा विषय अध्ययन हेतु न्यूनतम १.६ जीपीए लाना पड़ता है । उपर्युक्त विषयों में अध्ययन हेतु सामाजिक, अंग्रेजी व नेपाली में अनिवार्यतः ‘डी’ प्लस लाना होता है । इसी प्रकार व्यवस्थापन, मानविकी एवं शिक्षा संकायों में किसी भी विषय पढ़ने के लिए अंग्रेजी और सामाजिक में ‘डी प्लस’ लाना होता है । ११वीं कक्षा में अंग्रेजी और नेपाली अनिवार्य होता है । इसके अतिरिक्त तीन सौ पूर्णांक का ऐच्छिक विषय पढ़ना पड़ता है ।
एसईई में शामिल हुए कुल छात्रों (४ लाख ४५ हजार ५ सौ ६४ सौ) में से केवल १२ हजार २ सौ ८४ छात्रों ने ३.६ से ३.३५ तक जीपीए हासिल किए हैं । यह जीपीए गत वर्ष की तुलना में १.०१ प्रतिशत से कम है । जबकि पिछले वर्ष शामिल हुए छात्रों से इस वर्ष शामिल हुए छात्रों की संख्या ८ हजार २ सौ ३८ से अधिक है । परीक्षा नियंत्रण कार्यालय के अनुसार ३.२५ से ३.६० जीपए लाने वाले छात्रों की संख्या ४२ हजार ४ सौ २७ हैं । इसी प्रकार २.८५ से ३.२५ जीपीए लाने वाले छात्रों की संख्या ५० हजार ६ सौ ४६, २.४५ से २.८० लाने वाले छात्रों की संख्या ६१ हजार ९ सौ ५५, २.०५ से २.४० जीपीए लानेवाले छात्रों की संख्या ९१ हजार ३ सौ १४ और १.२५ से लेकर १.६० तक जीपीए लाने वाले छात्रों की संख्या १ लाख ८ हजार ४ सौ ६४ हैं ।
फिलहाल जीपीए प्रणाली के बारे में ८० प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थी अनभिज्ञ हैं । इस प्रणाली में फेल कोई नहीं होते हैं लेकिन जीपीए के आधार पर विषय चयन कर सकते हैं । हर कॉलेजों में विद्यार्थी नामांकन हेतु जाते हैं, फारम भरते हैं, इन्ट्रैन्स देने के बाद तब पता चलता कि विज्ञान पढ़े या अन्य विषय । जिस विद्यार्थी की इच्छा होती है कि हम विज्ञान ही पढ़ेंगे लेकिन गणित और विज्ञान में ‘सी प्लस’, नेपाली, अंग्रेजी व सामाजिक में ‘डी प्लस’ नहीं है, तो वैसे विद्यार्थी विज्ञान विषय अध्ययन करने से वंचित रह जाते हैं । इसी प्रकार अधिकांश कॉलेज भी इस प्रावधान से अनभिज्ञ हैं ।
पिछले वर्ष शिक्षा मंत्रालय द्वारा नामांकन प्रक्रिया सम्बन्धित नीति बनाई गई थी लेकिन इस बार इस नीति में दुविधा देखी गई है । यहां तक कि किस विषय अध्ययन करने के लिए कितना जीपीए और विषयगत ग्रेड कितना होना चाहिए, शिक्षा मन्त्रालय द्वारा अभी तक घोषणा नहीं की गयी है । विभिन्न कॉलेजों द्वारा बनाया गया आन्तरिक क्राइटेरिया के आधार पर ही प्रवेश परीक्षा व दाखिला करवाया जा रहा है ।
वैसे पिछले वर्ष उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा ११ वीं कक्षा अध्ययनार्थ मानदंड बनाया गया था । वे इस प्रकार हैं– विज्ञान समूह अध्ययन हेतु २.० जीपीए के साथ–साथ गणित व विज्ञान में ‘सी प्लस’, नेपाली, अंग्रेजी व सामाजिक में ‘डी प्लस’, मैनेजमेन्ट समूह अध्ययन हेतु १.६ जीपीए के साथ–साथ नेपाली, अंग्रेजी, गणित और सामाजिक में ‘डी प्लस’, मानविकी और शिक्षा समूह अध्ययनार्थ १.६ जीपीए के साथ–साथ नेपाली, अंग्रेजी और सामाजिक में ‘सी प्लस’, स्वास्थ्य विषय के लिए २.० जीपीए के साथ–साथ अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में ‘सी प्लस’, इन्जिनियरिंग अध्ययन हेतु गणित और विज्ञान में ‘सी’ और अंग्रजी में ‘डी प्लस’ तथा कृषि विषय अध्ययन हेतु अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषयों में से किसी एक विषय में ‘डी प्लस’ ।
क्या है जीपीए
विद्यार्थी द्वारा प्राप्त कुल अंकों को आधार मान कर दिया गया समग्र स्तरीकृत अंक ही जीपीए (ग्रेड एवरेज प्वाईन्ट) है । जीपीए प्रणाली में ९० से लेकर सौ प्रतिशत तक को ए प्लस, ८० से लेकर ८९ प्रतिशत तक को ‘ए’, ७० से लेकर ७९ प्रतिशत तक को ‘बी प्लस’ ६० से लेकर ६९ प्रतिशत तक को ‘बी’, ५० से लेकर ५९ प्रतिशत तक को ‘ग्रेड सी प्लस’, ४० से लेकर ४९ प्रतिशत तक को ‘ग्रेड सी’, ३० से लेकर ३९ प्रतिशत तक को ‘डी प्लस’, २० से लेकर ३० प्रतिशत तक को ‘ग्रेड डी’ और २० प्रतिशत से कम अंकों को ‘ग्रेड ई’ माना गया है । इसी प्रकार ‘ए प्लस’ के लिए ग्रेड प्वाईट ४, ग्रेड ए के लिए ३.६, ग्रेड बी के लिए ३.२, बी प्लस के लिए २.८, ग्रेड सी प्लस के लिए २.४, ग्रेड सी के लिए २, ग्रेड डी प्लस के लिए १.६, ग्रेड डी लिए १.२ और ग्रेड ई के लिए ०.८ जीपीए का प्रावधान रखा गया है ।
नेपाल में माध्यमिक शिक्षा परीक्षा के परिणामों में गिरावट के बाद एक बार फिर माध्यमिक शिक्षा में गुणवत्ता का प्रश्न विमर्श का विषय बन गया है । निजी विद्यालयों के नतीजे हर साल बताते हैं कि हमारी स्कूली शिक्षा का यह बोर्ड उस वर्ग के स्कूलों और विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपेक्षाकृत सम्पन्न, शिक्षित और सजग परिवार से आते हैं । इन स्कूलों की क्वालिटी अच्छी है और शिक्षक अपने विद्यार्थियों से जुड़ाव व लगाव रखते हंै । जबकि स्कूली शिक्षा की चुनौतियां भी विशाल हैं । जैसे योग्य शिक्षक का न होना, आम जनता के बड़े वर्गों को स्कूली शिक्षा के अवसर न मिलना, स्कूली शिक्षा में व्याप्त असमानता और अच्छी क्वालिटी की स्कूली शिक्षा सब को न मिलना आदि ।
वर्तमान में यह भी देखा गया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक आमतौर पर कम पढ़े लिखे और सीधे सादे होते हैं । उन्हें तो यह भी नहीं पता होता कि सरकार ने उनके और उनके बच्चों के लिए कौन–कौन सी योजनाएं बनाई हैं । ऐसे अभिभावक अपना हक हासिल करने के लिए आगे नहीं बढ़ पाते हैं ।
एसईई परीक्षा में शामिल हुए ४,४५,५६४ विद्यार्थियों में से केवल ३ लाख ३९ हजार १ सौ १ विद्यार्थी ही ११ वीं कक्षा पढ़ने के लिए योग्य और १ लाख ६ हजार ४ सौ ६३ विद्यार्थी अयोग्य देखा गया है । इस साल का रीजल्ट इतना खराब क्यों रहा

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