बैंकों का गोरखधंधा

जल्द से जल्द अमीर बनने की होड में लगे संदिग्ध व्यापारियों को बैंक खोलने की इजाजत देने के कारण देश में गम्भीर वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया है । इस समय पूरे देश में रहे अधा से अधिक बैक तथा वितीय संस्थाएँ बन्द होने के कगार पर पहुँच गया है । इस तथ्य का खुलासा नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा किए जाने के बाद से ही निवेशकर्ताओं द्वारा बैक से अपना रकम वापस लेने के लिए लम्बी कतारे. लगने लगी है । इसी वजह से देश में तरलता का अभाव साफ देखने को मिल रहा है ।
तरलता के संकट को अस्थाई रुप से समाधान करने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक ने बडेÞ निवेशकर्ताओं को तत्काल रकम वापस ना लेने का निर्देश दिया है । उधर संकट में घिरे बैंक तथा संस्थाओं को सस्ती ब्याज दर पर ऋण प्रदान करने की नीति भी शुरु की गई है । हाल ही में राष्ट्र बैंक ने विभोर बैंक को वाषिर्क ७ प्रतिशत ब्याज दर पर ५० करोडÞ रुपये उपलब्ध कर्राई है । आर्थिक संकट की बात कहते हुए विभोर बैंक ने ऋण देने या फिर बैंक का व्यवस्थापन अपने अधीन में लेने की गुहार लगाई थी । लेकिन संकटग्रस्त अन्य बैंकों ने विभोर बैक के जितना भी इमान्दारिता नहीं दिखाई है ।
आर्थिक संकट के कारण ही पिछले तीन महीने में पाँच बैक तथा वितीय संस्था बन्द हो चुकी है । यूनाईटेड विकास बैंक, गोरखा विकास बैंक, सम्झना फाइनान्स, नेपाल शेयर मार्केट और पिपुल्स फाइनान्स तरलता के अभाव में बन्द हो चुकी है । इन बैंको ने रकम जमा नहीं होने और पुराने निवेशकों द्वारा पैसा निकालने के कारण तरलता का अभाव दिखाते हुए अपना कारोबार बन्द कर दिया था ।
आर्थिक संकट के कारण ही निकट भविष्य में आधा दर्जन अन्य बैंक बन्द होने की स्थिति में पहुँच गयी है । प्राइम कमर्शियल बैंक, मनकामना विकास बैंक, किस्ट बैंक, डीसीबीएल बैंक, लुम्बिनी बैंक, सिर्द्धार्थ विकास बैंक व ग्लोबल बैक के जल्द ही बन्द होने की चिंता राष्ट्र बैंक के अधिकारियों में छायी है । राष्ट्र बैंक के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि इन बैकों के पास जमा पूँजी को ऋण के रुप में प्रवाह किए जाने और बैंक में अन्य निक्षेप ना होने से बन्द करने के अलावा इन बैंकों के पास और कोई विकल्प नहीं है ।
राष्ट्र बैंक द्वारा उपलब्ध कर्राई गई आंकडÞा के मुताबिक देश में इस समय ३१ वाणिज्य बैंक, ८८ वितीय संस्था, ८९ वित्त कम्पनी तथा १५ हजार से अधिक सहकारी संस्था है, जिनमें कुल ६००० करोडÞ रुपये की पूँजी निवेश की गई है । इनमें से २००० करोडÞ रुपये का निवेश बडेÞ निवेशकर्ताओं द्वारा की गई है । कर्मचारी संचय कोष, बिमा कंपनी, नेपाल टेलिकाँम, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी बल तथा नेपाली सेना ने देशभर के करीब ५० बैंकों में अपना रकम जमा किया है । प्रत्येक संस्था द्वारा करीब २०० करोडÞ रुपये निक्षेप संकलित किया है । यदि इन संस्थाओं ने अपना रकम वापस लेना चाहा तो अधिकतर बैकों के पास इन्हें रकम देने की स्थिति भी नहीं रह गई है । देश को वित्तीय संकट में धकेले जाने के पीछे राष्ट्र बैंक की ही कमजोरी होने की बात अर्थविदों ने बताई है । काला बजारी व आपराधिक पृष्ठभूमि में संलग्न लोगों को बेंक खोलने की अनुमति देकर नियमित अनुगमन नहीं कर पाना ही राष्ट्र बैंक की कमजोरी है ।
कुल निक्षेप का ८० प्रतिशत ही कर्ज के रुप निवेश किए जाने के नियम की अनदेखी करते हुए कई बैंको द्वारा ९९ प्रतिशत तक कर्जा का प्रवाह कर दिया है । एक ही सेक्टर में २० प्रतिशत से अधिक निवेश ना कर पाने का नियम होते हुए भी कई बैंको ने घर-जमीन के नाम पर ६० प्रतिशत तक निवेश किया हे । डिपोजिट रखे गए सामान, जमीन, घर के कुल मूल्य का ६० प्रतिशत रकम से अधिक कर्ज ना देने के नियम के विपरीत कई बैंको ने डिपोजिट के कुल मूल्यांकन का दुगुना कर्ज भी दे दिया है । किसी भी बैक के निवेशकर्ता या उनके करीबी रिश्तेदारों को कर्ज ना देने के नियमों का उल्लंघन करते हुए खुद ही बिना डिपाँजिट रखे कर्ज लिया है । यह भी नियम है कि बैंक का अध्यक्ष और कार्यकारी प्रमुख एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता है लेकिन इस नियम की अनदेखी करते हुए लाखों रुपये मासिक तलब के नाम पर उठाया जा रहा है । कितने बैंक तो ऐसे हैं, जो फर्जी नाम व डक्यूमेण्ट के आधार पर भी कर्जा प्रवाह कर रहे हैं ।
इन सब परिस्थिति के बावजूद नेपाल राष्ट्र बैंक धृतराष्ट्र बनकर देखता रहा और नियम के विपरीत कार्य करने वाले बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ कोई भी कार्रवाही नहीं की । राष्ट्र बैंक के गर्वनर विजयनाथ भट्टर्राई के खिलाफ अख्तियार द्वारा मुकदमा दायर किए जाने के बाद कुछ समय के लिए कार्यकारी गर्वनर बने कृष्ण बहादुर मानन्धर के द्वारा स्वीकृति प्रदान किए गए लगभग सभी बैंक या तो डूब चुके है या डूबने के कगार पर पहुँच गए हैं ।
बैंकिंग ऐन के अनुसार इस तरह ठगी करने वाले लोगों के खिलाफ दोगुना जर्ुमाना और ५ साल की सजा का प्रावधान है । लेकिन २०० करोडÞ रुपये भ्रष्टाचार करने वाले नेपाल शेयर मार्केटस एण्ड फाइनान्स के जोगेन्द्र प्रसाद । श्रेष्ठ को फरार कर दिया गया है । २५ करोडÞ रुपये ठगी करने के आरोप में सम्झना फाइनान्स के श्याम बहादुर श्रेष्ठ को कुछ दिन पहले ही गिरफ्तार किए जाने के बावजूद गोरखा विकास बैंक के राकेश अडदिया को राष्ट्र बैक कर्मचारी के सहयोग से सकुशल हंगकंग फरार करा दिया गया है । यूनाइटेड विकास बैंक के कार्यकारी प्रमुख चन्द्र बहादुर सिंह तथा प्रबन्धक राधाकृष्ण अमात्य को काफी दबाव के बाद गिरफ्तार किया जा सका था ।

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