ब्रिखेशचन्द्र लाल की आत्मा का आवाज हैं कि बिद्रोह के आग जलाये रखना हैं

हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, ११ जून ।

अब कुछ अपनों के लिए !
माफ करना, अगर पसन्द न आए तो । सकारात्मक परिणाम के लिए लिख रहा हूँ । कभी-कभी सामाजिक संजाल से लगता है, युवाओं में आक्रोश है, दिवानगी है, आत्मसम्मानके लिए कुछ करने की ललक है, मगर विचार में स्पष्टता की कमी दिखती है ।

आज कुछ तो कल्ह कुछ । विचार ऐसे नहीं बनती । गहराई से देखो, सूचना लो, मनन करो और फिर विचार बनाओ । यह सही है कि विचार बदलते रहते हैं पर क्षण में सब कुछ यूँ ही नहीं बदल जाता । किसी का मूल्यांकन किसी एक घटना से नहीं होती । अगर होती है तो उसके पीछे घटनाओं का श्रंखलायें होती हैं । सारे विश्लेषण के बाद ही एक ठीक दृष्टिकोण बनाया जा सकता है ।


लड़नेबालों का अपना ही रणनीति होता है । यात्रा में बहुत थक भी जाते हैं । जो थक गये, उन्हें विश्राम के लिए छोड़ देना ही ठीक है । न उलझना बेहतर ।
अगर आप समझते हो कि कोई ठीक है, तो उसे बल दो । उत्साह बढाओ । सिर्फ शंका करते रहने से या जो ठीक है उस पर भी वार ही करते रहने से बल क्षीण होता है । उसे क्या मालूम कि आप भी उसके साथ हो ? आपका विचार, शाबासी, भौतिक उपस्थिति आन्दोलनकारीयों में दूनी शक्ति भर देती है मगर एक अनावशयक वार चार गूणा कमजोर कर देती हैं ।


लड़नेबाले लड़ते हैं, शहीद बन जाते हैं, घायल हो अपांग बन जाते हैं – लाभ किसको होता है? आम लोगों को । नौकरी में, व्यापार में, रोजगार में, व्यवसाय में, सभी के सीने के सम्मान में परिणाम पहुँचता है । दिखाई भले ही कम पड़े मगर महशूस तो सब करते ही हैं ।


लड़नेबाले लड़ते हैं परिणाम के आशा में लेकिन परिणाम उनके हाथों में नहीं होता । होता तो सीधे लपक लेते । जब मिलती है, सभी को महशूस होता है । लेकिन कोई सूझ लेनेबाला शायद ही मिलता है !


राजपा की लड़ाई एजेन्डा बचाने का लड़ाई है । शहीदों के रक्त का पवित्रता और मर्यादा का लड़ाई है । प्रश्न स्वार्थ का नहीं है चुनाव का नहीं है । बराबरी की आवाज और बिद्रोह के आग को जलाये रखने का है ।


कौन चाहता है राजपा चुनाव में आये ? काँग्रेस इसलिए नहीं कि उसका मानना है राजपा चुनाव में नहीं आती है तो उसे लाभ है । इसलिए संख्या होते हुए भी संशोधन नहीं करना चाहता । माओवादी एमाले को दोष लगाकर संयुक्त मोर्चा बनाकर इसी बहाने कुछ सीट लेना चाहता है ।

संविधान संशोधन हुआ तो उसका रास्ता बन्द ही समझो । एमाले फंस गई है । अपनी ही जाल में । संशोधन के लिए तैयार होने पर इज्जत चली जाएगी । फोरम राजपा के नही आने पर मधेशीयों के सभी वोट का दावा कर रहा है । चुनाव से पहले अब संशोधन न हो इसके लिए लबिंग में है ।
राजपा को एजेन्डा बचाने के लिए लड़ने के आलावा कोई विकल्प है क्या ? 
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