भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक भाई दुज : कैसे मनाएं बहनें भैया दूज ?

पंच पर्व महोत्सव दीवाली का पांचवां पर्व भैया दूज है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है तथा देश भर में बड़े सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर केसर का तिलक लगाती हैं तथा उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं। यह पर्व दीवाली से दो दिन बाद यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है जो इस बार 21 नवम्बर को है।


इस दिन यमुना में स्नान करना, माथे पर बहन के हाथों से तिलक लगवाने तथा बहन के हाथ से बना भोजन खाने की मान्यता है।  बहनें अपने भाई की लम्बी आयु के लिए यम की पूजा करती हैं और व्रत भी रखती हैं। राखी की तरह इस दिन भी भाई अपनी बहन को अनेक उपहार देते हैं। मान्यता है कि अपने भाई को राखी बांधने के लिए बहनें उनके घर जाती हैं परंतु  भैया दूज पर भाई अपनी बहन के घर जाता है। जो भाई अपनी बहन से स्नेह और प्रसन्नता से मिलता है, उसके घर भोजन करता है उसे यम पीड़ा से छुटकारा मिल जाता है।  कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त का भी पूजन किया जाता है।
कैसे मनाएं बहनें भैया दूज: वैसे तो कार्तिक मास महात्म्य का महीना है तथा इस दिन  किए गए स्नान , दान एवं पुण्य कर्मों का फल कई गुणा अधिक है परंतु भैया दूज को  यमुना नदी में  स्नान करने का बड़ा महत्व है। बहने पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात मार्कण्डेय, बली, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम जी आदि आठ चिरंजीवियों का विधिपूर्वक पूजन करें, बाद में भार्इ के माथे पर तिलक लगाते हुए सूर्य , चन्द्रमा, पृथ्वी तथा सभी देवताओं से अपने  भार्इ के परिवार की सुख समृद्धी के लिए प्रार्थना करें। भार्इ का मुंह मीठा करवाएं। भार्इ अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें।

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