भाठा बाबा का मेला जरूर लगेगा, ये आस्था का सवाल है : उपाध्यक्ष ममता महतो

ममता महतो

रेयाज आलम बीरगंज, सावन ३गते, बृहस्पतिवार । पर्सा जिला का पटेर्रवा सुगौली गांवपालिका, वहाँ के पुरातन दूधेश्वर नाथ भाठा बाबा के मंदिर के लिए प्रचलित है, वहाँ प्रशासन द्वारा मेला पर रोक लगाने पर पटेर्रवा सुगौली खासा आंदोलित रहा, इस संबंध में पटेर्रवा सुगौली के उपाध्यक्ष ममता महतो से ‘हिमालिनी’ संवाददाता रेयाज आलम से बातचीत के कुछ ख़ास अंश।
*  दूधेश्वर नाथ भाठा बाबा के मन्दिर में मेला पर रोक की बात आ रही है, इस बात पर सांसद हरिनारायण रौनियार ने संसद में आवाज उठाई, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी रोक का विरोध किया। अब मेला लगने के संबंध में क्या निर्णय हुआ ?
ये सत्य है कि सुरक्षा का बहाना लगाकर, प्रशासन ने मेला लगाने पर रोक लगाया था, लेकिन स्थानीय बिरोध के बाद प्रशासन को अपने कदम पीछे लेने पड़े, अब मेला लगेगा, यह मेला सदियों से लगते आ रहा है जिसमे नेपाल के अलावा भारत से लाखों भक्तजन और कावड़िया पूजा करने आते है, जिसे सुरक्षा या कोई अन्य बहाना देकर रोका नही जा सकता, ये लाखों लोगों के आस्था से जुड़ा बिषय है।
* भाठा में मंदिर बनाने में करोड़ो का खर्च आया होगा, इतनी बड़ी राशि का स्रोत क्या है ?
मंदिर बनाने में स्थानीय लोगो, भक्तजन और श्रद्धालुओं द्वारा चंदा सहयोग किया गया। शहर के लोगो द्वारा छड़, सीमेंट का सहयोग मिला। पहले जिला विकास समिति द्वारा हर साल सहयोग मिलता रहा है। सबसे बड़ा सहयोग पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी से मिला, उन्होंने अपने संसदीय कोष से उल्लेखनीय सहयोग किया। पूर्व सांसद होने पर भी इस वर्ष उन्होंने सहयोग किया। उनका सहयोग और संरक्षण हमेशा मिलता रहा है।
*  मेला में सुरक्षा, धर्मशाला, पानी और भक्तजन को व्यवस्थित कर पूजा करने का क्या इंतजाम है ?
सुरक्षा के लिए प्रशासन के अलावा स्थानीय स्वयंसेवक का परिचालन किया जाएगा। धर्मशाला भवन में सुधार किया गया है। पीने के पानी के लिए टैंकर और मिनरल वाटर का इंतजाम हुआ है। भक्तजन को सुरक्षित और व्यवस्थित पूजा करने के लिए महिला और पुरूष को अलग-अलग लाइन से मंदिर पहुचने का व्यवस्था किया गया है।
* आपके अनुसार मेला की पूरी तैयारी हो गई है ?
हमलोगों को इतने कम समय में जो भी स्रोत- साधन उपलब्ध थे, उसके अनुसार बेहतर सुबिधा देने की कोशिश की गई, लेकिन कई जगह हमारे हाथ बंधे होने के कारण कुछ काम नही हो सका, जैसे बाढ़ के कारण सड़के ठीक नही है, उन्हें बनाने का इजाजत नहीं मिला, अगर इजाजत मिल जाता तो सड़के ठीक हो जाती। वैसे भी हमलोग एक ही सड़क को पूर्णतः ठीक करके सुचारू करना चाहते है, जिससे उस सड़क पर जंगली जानवरों द्वारा होने वाले ख़तरे को रोक लगाया जा सके।
* स्थानीय स्रोत के आलावा प्रदेश और केंद्र से क्या सहयोग मिला है ?
प्रदेश सरकार से अभी तक कोई सहयोग या आश्वासन नही मिला है, केन्द्रीय सरकार द्वारा अपहेलित ही किया गया है। पूर्व में केंद्रीय सरकार से नाम मात्र का सहयोग मिलता था, जो घटते क्रम में बंद होने वाला ही है। ऐसे अवस्था मे  दूधेश्वर नाथ बाबा के भाठा मंदिर को पर्यटकीय क्षेत्र बना कर पटेर्रवा-सुगौली गांवपालिका का विकास करने के योजना पर हमलोग काम कर रहे है। हमारे गांवपालिका के सम्पूर्ण सदस्य टीम बनाकर इस काम को पूरा करने मे लगे है। हमारी योजना है कि भाठा बाबा का मेला साल में ३बार ना करके, साल के ३६५ दिन ही पूजा के लिए खुला रखा जाए।
* पर्सा-बारा के लोग पर्यटकीय भ्रमण के लिए प्रदेश न.३ में जाते है। क्या आपको लगता है कि वे लोग पर्यटकीय भ्रमण के लिए इस दुर्गम क्षेत्र में आना पसंद करेंगे ?
क्यों नही आएंगे ? जहाँ प्रदेश न. ३ में कोई ब्यवस्था नही होने पर पर्यटक जा सकते है, तो पर्सा में ही ३०-४० की.मी. पर क्यो नही आएंगे, यहाँ तो धार्मिक स्थल के साथ पहाड़-जंगल-जानवर सब कुछ है, यहाँ तो भारत से लाखों की संख्या के लोग आते है। जिस प्रकार सरकार ने सौराहा को पर्यटकीय स्थल के रूप में विकसित किया, उससे ज्यादा संभावना यहाँ है, लेकिन सरकार द्वारा अपहेलित करने के कारण ये पिछड़ा हुआ है।
* पटेर्रवा सुगौली को पर्यटकीय क्षेत्र बनाने के लिए क्या योजना है ?
सबसे पहले तो हमलोगों ने सर्वसम्मति से पटेर्रवा सुगौली को नाम भाठा बाबा करने का निर्णय किया। इस क्षेत्र के बिकास के लिए मास्टर प्लान बना कर, पर्सा वनआरक्ष  से समन्वय करके काम करने का प्रयास किया, जिसमे पर्यटकों के सुबिधा, सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता में रखा गया है। साल भर पर्यटक आने पर स्थायी रूप रोजगार और ब्यापार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय लोगो की बेरोजगारी और गरीबी दूर होगी।

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