भारतीय दूतावास द्वारा विश्व हिन्दी दिवस आयोजित

काठमान्डौ, १० जनवरी अन्नपूर्णा होटल
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर हर वर्ष की भाँति भारतीय दूतावास ने भव्य समारोह का आयोजन किया । समारोह की अध्यक्षता दूतावास के डीसीएम माननीय विनय कुमार ने किया काय्रक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और साहित्यकार लोकेन्द्रबहादुर जी की गरिमामयी उपस्थिति थी और हिन्दी दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में मंच पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागीय प्रमुख और हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका की सम्पादक डा.श्वेता दीप्ति की महत्वपूर्ण उपस्थिति थी ।
अतिथियों का स्वागत पुष्प प्रदान कर के हुआ । इन कार्यों में हिमालिनी की महाप्रबन्धक कविता दास ने सहयोग किया । कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत दीपप्रज्जवलन के साथ हुआ । भारतीय दूतावास की प्रथम सचिव माननीया रुबी जसप्रीत जी ने इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री जी के संदेश को पढ़कर सुनाया ।
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हिन्दी की महत्ता  और उसकी उपयोगिता पर दूतावास के डा. बहुगुणा ने काफी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई । हिन्दी और प्रौद्योगिकी किस तरह एक दूसरे के पूरक बन रहे हैं और इसका प्रयोग कम्पयूटर और मोबाइल पर कितना आसान और सहज है इसकी विषय में उन्होंने बताया । वर्तमान अवस्था में नेपाल में हिन्दी की दशा और दिशा कैसी है इस विषय पर डा.श्वेता दीप्ति ने प्रकाश डाला आपने कहा कि हिन्दी आत्मा की भाषा है, प्यार और सौहार्द की भाषा है । नेपाल की जनता की प्रिय भाषा है बावजूद इसके कुछ राजनीतिक परिस्थितियाँ हिन्दी के लिए यहाँ प्रतिकूल वातावरण तैयार कर देती हैं । उन्होंने विश्वविद्यालय में हिन्दी की अवस्था पर भी प्रकाश डाला और अनुरोध किया कि जब भारत नेपाल के लिए विभिन्न प्रकार के अनुदान हर क्षेत्रों में उपलब्ध कराता है तो हिन्दी के नाम पर एक हिन्दी भवन बनाए जाने की आवश्यकता है ।hd4a
कार्यक्रम में हिन्दी परिषद् के डम्बर नारायण यादव, हिन्दी संस्थान जनकपुर के अध्यक्ष राजेश्वर नेपाली, हिमालिनी के प्रबन्ध निदेशक श्री सच्चिदानन्द मिश्रा, द पब्लिक की संपादक वीणा सिन्हा ने भी अपने मंतव्य रखे ।
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मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हिन्दी के विषय में बोलने  का यह तात्पर्य नहीं है कि नेपाली के विरोध में बातें हो रही हैं । हिन्दी तो यहाँ के कण कण में व्याप्त है इसे चाहे नेपाल के किसी भी क्षेत्र में चले जायँ बोली या समझी जाती है । उन्होंने कहा कि राजनीति भी कभी यह नहीं कहती कि आप हिन्दी में बात मत करो । नेपाली नेपाल की राष्ट्रभाषा है किन्तु इसका यह तात्पर्य नहीं है कि अन्य किसी भी भाषा से इसे बैर है । नेपाल एक बहुभाषिक राष्ट्र है और यहाँ किसी भी भाषा में बोलने की स्वतंत्रता है और उसे सम्मान प्राप्त है । उन्होंने कहा कि मैंने अपनी पहली रचना भी हिन्दी में ही की थी और आज भी हिन्दी में लिखने की इच्छा रही है । hd22
अध्यक्षीय मंतव्य में अध्यक्ष विनय कुमार जी ने विश्व पटल पर हिन्दी की महत्ता को बताया और कहा हिन्दी जुड़ने और जोड़ने की भाषा है । हिन्दी के विद्वान डा. रामदयाल राकेश जी के उपन्यास शांता सुने का विमोचन भी किया गया । कार्यक्रम के पहले सत्र की समाप्ति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुई । धन्यवाद ज्ञापन प्रथम सचिव रुबी जसप्रीत जी ने किया । प्रथम सत्र का मंच संचालन कंचना झा ने किया ।
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भोजन उपरांत कार्यक्रम का दूसरा सत्र शुरु हुआ जिसमें कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । मंच पर साहित्यकार श्री राम थापा, श्री गंगााप्रसाद अकेला और गजलकार सनतवस्ती जी की गरिमामयी उपस्थिति थी । धनश्याम जी, वफा जी, मोमिन खान, गोपाल अश्क, डा. श्वेता दीप्ति, डा. रामदयाल राकेश, लक्ष्मी जोशी, कंचना झा, नवीन कुमार नवल, कैलाश दास, डीजे मैथिल, मुकेश झा, संगीता झा आदि कई कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एक खुशनुमा शमा बाँधा । इस सत्र का मंच संचालन धीरेन्द्र प्रेमर्षि जी ने किया और अपनी गायन कला और सधी हुई प्रस्तुति के साथ श्रोताओं को अन्त तक बाँधे रखा । एक सुखद वातावरण में कार्यक्रम की समाप्ति हुई ।hd6a
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