भारतीय महावाणिज्य दूतावास, वीरगंज के दस वर्ष

कुमार सच्चिदानन्द

कुमार सच्चिदानन्द

कुमार सच्चिदानन्द:भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने पिछले दिनों अपनी स्थापना के दस वर्षपूरे किए । इस अवसर पर विगत १७ जनवरी को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । शहर के भिस्वा होटल के सभागार में भारत तथा नेपाल के व्यापारियों को एक मंच पर लाकर दोनों देशों के बीच बदलते व्यापारिक परिदृश्य विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इसकी अध्यक्षता वर्तमान महावाणिज्यदूत श्रीमती अंजू रंजन ने की जबकि प्रमुख अतिथि के आसन को इसके प्रथम महावाणिज्यदूत श्री गुरुराज राव ने सुशोभित किया । इस संगोष्ठी में बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएसन के पदाधिकारियों के साथ नेपाल के अलग-अलग जिलों के चेंबर आँफ कार्ँमर्स के पदाधिकारियों की सहभागिता थी । वीरगंज नेपाल की औद्योगिक नगरी है और प्रमुख प्रवेशद्वार भी । यहाँ के अनेक उद्योगपतियों और व्यापारियों ने इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता जताई । इस तरह उद्योग व्यवसाय से जुडÞे विभिन्न पक्षों के लोग एक साथ यहाँ एक मंच पर उपस्थित थे ।

वीरगंजवासी की नजर में वाणिज्य दूतावास

इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्रीमती रंजन ने कहा कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को बढÞाने के कई क्षेत्र हैं । द्विपक्षीय व्यापार के साथ-साथ कृषि, पर्यटन, रेल, विद्युत आदि क्षेत्रों में निवेश किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि नेपाल का भारत के साथ लगभग ७८ प्रतिशत का व्यापार है । इन दोनों देशों के बीच वर्तमान समय में ४.७२ बिलियन यूएस डाँलर का कारोबार है । अगले आर्थिक वर्षतक इसके ५ बिलियन डाँलर होने की संभावना है । उन्होंने यह भी कहा कि हम अच्छे पडÞोसी ही नहीं बल्कि अच्छे रिश्तेदार भी हैं ।
कार्यक्रम के दौरान रक्सौल स्थित भारतीय कस्टम के सहायक आयुक्त कमलेश कुमार द्वारा व्यापार में कस्टम की भूमिका और सुविधा के सम्बन्ध में जानकारी दी गई । उन्होंने बताया कि नेपाल में बने उत्पाद को भारत में निर्यात के लिए आधारभूत कस्टम ड्यूटी नहीं लगती । ऐसे में नेपाली कंपनियाँ भारत को अपने घरेलू बाजार के रूप में प्रयोग कर सकती हैं । इसी तरह दूतावास से स्वीकृति लेने के बाद नेपाली वाहनों से भारत सरकार द्वारा किसी प्रकार का कर नहीं लिया जाता । फिर नेपाल की सुविधा के लिए सप्ताह भर का कार्यदिवस भी कर दिया गया है । २५,००० रुपए तक का सामान बिना किसी लाइसेंस के भारत ले जाया जा सकता है । उन्होंने दोनों देश के मध्य व्यापार की विशेषता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह व्यापार भारतीय मुद्रा में होता है, इससे दोनों देशों के डाँलर संचित रहते हैं ।
वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष प्रदीप केडिया ने विचार दिया कि दूतावास की स्थापना से दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी सहजता हर्ुइ है । हालाँकि रक्सौल और इसके आसपास के क्षेत्र में विकास की गति तीव्र नहीं होने से समस्याएँ हैं । फिर रक्सौल से मोतिहारी तक सडÞकों की दुरावस्था है, जिसे बेहतर करने का प्रयास होना चाहिए । इसी तरह निम्बस समूह के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने नेपाल भारत के बीच व्यापारिक सम्बन्ध वस्तुपरक होने की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने भारत के साथ नेपाल के व्यापार घाटे को कम करने के लिए नेपाली उत्पादों का भारत में निर्यात को पर्याप्त नहीं माना । लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक महान देश है । उसकी आकांक्षाएँ बहुत बडÞी है । इसलिए जरूरत है कदम से कदम मिलाकर चलने की ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएसन के उपाध्यक्ष निशीत जायसवाल ने कहा कि बिहार सरकार की नयी उद्योग नीति के कारण बिहार में उद्योग लगाने के लिए सही माहौल कायम हुआ है । अच्छी उद्योग नीति के कारण उद्योग लगाने पर अच्छा अनुदान मिल रहा है । लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुँच का सबसे बडÞा बाधक अभी भी सडÞकें हैं । उन्होंने यह भी विचार दिया कि दोनों देशों के व्यापारिक संबन्धों को बढÞाने के लिए मूलभूत सुविधाओं में विस्तार की आवश्यकता है । कार्यक्रम के अन्त में मुख्य अतिथि के आसन से बोलते हुए भारतीय महावाणिज्य दूतावास के प्रथम महावाणिज्यदूत श्री गुरुराज राव ने कहा कि अपनी समस्याओं के बीच भी वीरगंज वाणिज्यदूतावास का काफी विकास हुआ है । उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल की जरूरत है भारत के साथ जुडÞने की । इसके बाद नेपाल के विकास की गति भी बढÞ जाएगी । व्यापार में जितना सरकार का हस्तक्षेप कम होगा, विकास उतना ही अधिक होगा । श्री राव ने यह भी बताया कि महावाणिज्य दूतावास की स्थापना के बाद इस क्षेत्र में विकास की गति तीव्र हर्ुइ है और जिन सुविधाओं के लिए लोगों को काठमाण्डू जाना पडÞता था, वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाते हैं ।र्
वर्तमान महावाणिज्यदूत श्रीमती रंजन ने यह जानकारी दी कि विगत दस वर्षों का कार्यकाल काफी उत्साहजनक रहा । दूतावास की स्थापना के कारण इस क्षेत्र के मूलभूत ढाँचे के विकास से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है । इन्होंने ३० लघु विकास परियोजनाओं के साथ-साथ छह बडÞी परियोजनाओं पर कार्य चल रहे होने की जानकारी दी । उन्होंने बताया कि इन सबके बीच एक अच्छी बात यह है कि जो भी काम भारत सरकार द्वारा कराए जाते हैं उस पर सीधी निगरानी होती है । उन्होंने कहा कि इसकी स्थापना से भारत और नेपाल दोनों ही देशों के नागरिकों को लाभ हुआ है । गौरतलब है कि महावाणिज्य दूतावास के क्षेत्र में नेपाल के आठ जिले आते हैं, जिसमें इसके माध्यम से विद्यालय, सभागार, अस्पताल, विद्युतीकरण, पुल आदि का निर्माण कार्य कराया जा रहा है । इसके साथ ही पिछले वर्षतक ५३.२६ करोडÞ नेपाली रुपए की लागत से तैयार ३३ परियोजनाओं का हस्तान्तरण कर दिया गया है । १७३२ करोडÞ रुपए की छह बडÞी परियोजनाओं पर काम चल रहा है । उन्होंने आर्थिक वर्ष २०१३-१४ में ४.६८ करोडÞ और २०१४-१५ में ८.२७ करोडÞ रुपए लघु परियोजनाओं के लिए निर्गत किए जाने की जानकारी दी । अपनी स्थापना के दस वर्षों में इसने ९४ ऐंबुलेंस एवं विद्यालयों-महाविद्यालयों के लिए १७ स्कूलबस प्रदान किए हैं ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी दूतावास की इस शाखा की स्थापना से तर्राई क्षेत्र की छात्र-छात्राओं को लाभ मिला है । यह सच है कि अध्ययन और अनुसंधान के लिए भारत सरकार द्वारा नेपाल के अध्येताओं को जो सुविधा या छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, उसके लिए इस दूतावास का कोई निश्चित कोटा नहीं होता । लेकिन इस कार्यालय की स्थापना से सूचना, आवेदन और परीक्षा तथा अन्तवार्ता के लिए उन्हें काठमांडू जाने की जरूरत नहीं होती, स्थानीय स्तर पर ही अधिकांश सुविधाएँ उपलब्ध हो जाती हैं । इसलिए भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले अवसरों तक इस क्षेत्र के लोगों की सहज पहुँच होने लगी है । फिर समय-समय पर निबंध आदि प्रतियोगिताओं को आयोजित कर तथा इसमें उत्कृष्ट होने वाले छात्रों को पुरस्कृत कर शैक्षिक गतिविधि के प्रोत्साहन में भी वीरगंज वाणिज्य महादूतावास ने अपना योगदान दिया है । birganj dutawas 1 birganj dutawas 2 birganj dutawas 4
नेपाल-भारत के सम्बन्धों के सिर्फव्यापारिक और व्यवसायिक आयाम नहीं हैं । सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर भी दोनों देश परस्पर आत्मीयता के साथ जुडÞे हैं । इसी सांस्कृतिक विरासत के आदान-प्रदान के लिए भारतीय महावाणिज्य दूतावास के सौजन्य से शोभना जगदीश और सोनलमान सिंह जैसी अन्तर्रर्ाा्रीय ख्यात्रि्राप्त नृत्यांगनाओं का साक्षात्कार वीरगंजवासियों ने किया । इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रीय संगीत, वाद्य-संगीत, कव्वाली आदि से गूँजती शामों का भी आयोजन महावाणिज्य दूतावास द्वारा होता रहा है । ऐसे आयोजन सांस्कृतिक ऐक्य की दिशा में इनके बढÞते हुए कदम हैं ।
साहित्यिक आदान-प्रदान की दिशा में भी यह दूतावास सक्रिय रहा है । यही कारण है कि अखिल भारतीय स्तर पर ख्यात्रि्राप्त हास्य कवियों, यथा-अशोक चक्रधर, सुरेन्द्र शर्मा आदि के कार्यक्रमों का आनन्द उठाने का अवसर नगरवासियों को मिला । इसके साथ ही अनेक अवसरों पर भारत-नेपाल के कवियों को एक मंच पर लाकर साहित्य के क्षेत्र में भी सम्बन्धों को बेहतर बनाने की दिशा में इसने काम किया ।
भारत-नेपाल सम्बन्धों की सबसे बडÞी विशेषता है कि यह सिर्फकूटनैतिक नहीं बल्कि जनस्तर पर स्थापित है । कूटनैतिक स्तर पर इसमें उतार-चढÞाव आते रहते हैं, मगर जनस्तर पर यह सदा प्रगाढÞ रहा है और इन उतार-चढÞावों से अप्रभावित भी रहा है । इस सम्बन्ध को और अधिक गतिशीलता प्रदान करने के लिए समय-समय पर दोनों देशों के जन प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर विचार गोष्ठियाँ की गई हैं और इन गोष्ठियों से प्राप्त निष्कर्षइनके मार्ग निर्देशक तत्व रहे हैं ।
यह सच है कि रिश्तों की इस गरमाहट पर कभी-कभी राजनीति की काली छाया पडÞी है, कभी  खुली सीमा और इस पर होने वाली विभिन्न गतिविधियाँ विवाद का कारण बनती हैं । लेकिन विभिन्न स्तरों पर प्रगाढÞ यह सम्बन्ध इन नकारात्मक चीजों से सदा अक्षुण्ण है । सम्बन्धों की इस विशेषता को समझते हुए जनसंवेदना को वहन करना इनका दायित्व है और इस दिशा में इन्हें क्रमशः अग्रसर माना जा सकता है ।
शाम-ए कव्वाली
भारत का महावाणिज्य दूतावास ने अपनी स्थापना का एक दशक पूरा होने के अवसर पर वीरगंज के भिस्वा होटल के सभागार में नई दिल्ली से पधारे नियाजी एण्ड नमाजी बर््रदर्स द्वारा कव्वाली की शाम का आयोजन किया । आईसीसीआर द्वारा प्रायोजित इस श्ााम को इन कव्वाल-बन्धुओं ने सूफी संगीत एवं समकालीन कव्वालियों से सहभागियों को सराबोर कर दिया । सन् २००५ में स्थापित भारतीय महावाणिज्य दूतावास, वीरगंज के प्रथम महावाणिज्यदूत श्री सी. गुरुराज राव तथा वर्तमान महावाणिज्यदूत श्रीमती अंजू रंजन ने संयुक्त रूप में दीप प्रज्ज्वलित कर इस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । इस कार्यक्रम में वर्तमान तथा निवर्तमान सभासद, प्रशासनिक पदाधिकारी, उद्योगपति, व्यवसायी, शिक्षाविद् तथा शहर के गण्यमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति थी । गौरतलब है कि इन कव्वालों की परम्परा ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया, महूबब इलाही, हजरत अमीर खुसरो के दरबार से जुडÞी रही है । इन्हें भारत के कव्वाली सम्राट के रूप में जाना जाता है और ७५० वर्षों की कव्वाली परम्परा की उत्कृष्ट कडÞी के रूप में इनकी गणना की जाती है । भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा इन्हें पुरस्कृत भी किया गया था । अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, स्काँटलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मक्का-मदीना आदि में भी इन्होंंने अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं । इनके संगीत का सुनना वीरगंजवासियों के लिए एक अद्भुत अनुभव से गुजरना था ।

भारत का महावाण्ज्िय दूतावास, वीरगंज के क्षेत्राधिकार में निर्माणाधीन छः बडÞी परियोजनाएँ
*    ३२० किलोमीटर लम्बाई की ११ सडÞकें ः अनुमानित व्यय ६५० करोडÞ ।
*   ६८ किलोमीटर रेलपथ, जयनगर-जनकपुर-बर्दीवास ः अनुमानित व्यय ७६८ करोडÞ ।
*     लालबकया, बागमती तथा कमला नदियों पर तटबन्ध ः अनुमानित व्यय १४८ करोडÞ ।
*    इण्टीग्रेटेड चेकपोस्ट, वीरगंज ः अनुमानित व्यय ८६ करोडÞ ।
* हेटौडा में वोकेसनल ट्रेनिंग सेण्टर ः अनुमानित व्यय ४० करोडÞ ।
*  वीरगंज, चितवन और जनकपुर में प्रस्तावित तीन अन्य वोकेसनल ट्रेनिंग सेण्टर ।

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