भारतीय युवा सांसदों का नेपाल भ्रमण

रामाशीष

काठमांडू । भारत में सत्तारुढ  सहित विभिन्न दलों के पाँच युवा सांसदो के एक दल ने नेपाल भ्रमण के अन्त में आशा प्रकट की है कि नेपाल बिना किसी तीसरे देश के प्रभाव में पडे, निकट भविष्य में ही शान्ति प्रक्रिया को पूरा करने और देश का नयाँ संविधान बनाने में सफल होगा ।
बीजू जनता दल के सांसद कलिकेश नारायण सिंह देव के नेतृत्व में आए सांसदों में शामिल अन्य सदस्य हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदीप माँझी, भारतीय जनता पार्टर् डा. संजय जायसवाल और कमलेश पासवान, समाजवादी पार्टर्ीीे नीरज शेखर तथा सिक्किम डेमोक्रेटिक प|mन्ट के ओ.टी. लेप्चा । यह दल चार दिनों के नेपाल भ्रमण पर यहाँ पहुँचा था और राजधानी प्रवास के दौरान राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव, प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल और संविधान सभा अध्यक्ष सुवास नेवांग के अलावा संसद में सबसे बडी पार्टर्ीीकीकृत नेपाल कम्युनिष्ट पार्टर्ीीमाओवादी) के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल सहित नेपाली कांग्रेस एवं मधेशवादी पार्टियों के नेताओं से मिल कर नेपाल की ताजा राजनीतिक स्थिति तथा भारत-नेपाल संबंधों का जायजा लिया ।
सिंहदेव ने बताया लगभग १४ वर्षों के बाद आयोजित इस संसदीय दल के भ्रमण से एक दूसरे को भली-भांति जानने-समझने में सहायता मिली है तथा दोनों देशों के बीच राजकीय संबंधों को बल मिला है । उन्होंने कहा किक दोनों देशों के बीच अति प्राचीन सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं जो अभी भी कायम हैं । सिंहदेव ने इसी दौरान यह भी स्पष्ट किया कि खुद उनकी शादी काठमांडू में हो चुकी है । स्मरणीय है कि सिंहदेव का विवाह काठमांडू गौरव शमशेर जबरा की पुत्री से हुआ है । -नेपाली सेना में लेफ्टिनेंट जेनरल पद पर कार्यरत)
एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल एक स्वतंत्र देश है तथा वह कभी भी किसी बाहरी ताकतों के दबाव में नहीं आएगा । उन्होंने आशा व्यक्त की कि नेपाल की राजनीतिक पार्टियाँ और उनके नेता, शान्ति प्रक्रिया तथा संविधान निर्माण के महत्वपर्ूण्ा कार्य को पूरा करेंगे । उनसे जब नेपाल-भारत खुली सीमा के संबंध में पूछा गया तो सिंहदेव तथा नेपाली सीमा पार रक्सौल -बेतिया) क्षेत्र के भाजपा सांसद डा. संजय जायसवाल ने कहा खुली सीमा नेपाल और भारत दोनों ही देशों के हित में हैं । क्योंकि यह न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों के संचालन और व्यापार में भारी योगदान देता है अपितु इससे सीमा पार के लोगों के बीच विद्यमान बेटी-रोटी के आत्मीय रिश्तों को भी बल मिलता है । उन्होंने कहा भारत और नेपाल के संबंधो को १९५० की संधि मजबूती प्रदान करता है तथा इसके तहत ही नेपाली जनता, उद्योगपति और व्यापारियों को अनेक प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हैं ।
नेपाल में वर्षों से रह रहे भुटानी शरणार्थियों की समस्या के समाधान के बारे में जब उनका विचार पूछा गया तो सिंहदेव का कहना था यह तो दो र्सार्वभौमसत्ता सम्पन्न देश भूटान और नेपाल के बीच का मामला है, उसका समाधान तो इन दोनों ही देशों को ही मिलकर करना चाहिए, इसके बारे में भला भारत क्या कह सकता है –
भारतीय युवा संसदों ने काठमांडू प्रवास में भेंटो के दौरान यह स्पष्ट किया कि भारत एक शान्तिपर्ूण्ा समृद्ध लोकतांत्रिक नेपाल को देखना चाहता है । सांसदों ने दोनों देशों के बीच उत्पन्न छोटी-मोटी विवादों को वार्ताओं द्वारा आत्मीयता के साथ निबटे जाने पर बल दिया । सांसदों ने स्पष्ट किया कि नेपाल के आन्तरिक मामले में हस्तक्षेप करने का भारत का कोई इरादा नहीं है और न ही वह भविष्य में ऐसा कोई काम करेगा ।

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