भारत कभी नेपाल के लिए गलत सोच ही नहीं सकता : राजदूत रणजीत राय

नेपाल भारत मैत्री समाज के द्वारा भारत के ६७वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुभकामना कार्यक्रम आयोजित ।
काठमान्डौ २७ जनवरी, नेपाल भारत मैत्री समाज ने भारत के ६७वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोल्टी क्राउन प्लाजा में शुभकामना कार्यक्रम आयोजित किया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल के निवर्तमान उप राष्ट्रपति माननीय परमानन्द झा जी थे । कार्यक्रम में भारतीय राजदूत महामहिम रण्जीत राय, उपप्रधानमंत्री सी.पी मैनाली, पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भटराई, भारत के लिए नेपाल के पूर्व राजदूत लोकमान बराल, मधेशी मोर्चा के महेन्द्र राय यादव आदि कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति थी । कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष प्रेम लश्करी ने किया और मंच संचालन एम.डी अग्रवाल के द्वारा हुआ । अध्यक्ष प्रेम लश्करी ने समाज के द्वारा भूकम्प के पश्चात् किए गए कार्यों की चर्चा की और नेपाल भारत के बीच के रिश्ते को और भी प्रगाढ होने की शुभकामना व्यक्त की । nb-2
सभी वक्ताओं ने अपने मंतव्य में नेपाल भारत मैत्री की प्रगाढता की शुभकामना व्यक्त की । पूर्व राजदूत लोकराज बराल ने कहा कि नेपाल को भारत जैसे राष्ट्र से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है । विभिन्न कठिनाइयों के बावजूद भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जिस मुकाम को हासिल किया है और विश्व में अपनी जो पहचान बनाई है उससे नेपाल को सीख लेनी चाहिए । मोर्चा के नेता महेन्द्र यादव ने कहा कि हम जन्म नेपाल की मिट्टी में लेते हैं किन्तु मोक्ष की प्राप्ति भारत की मिट्टी में होती है यह बताता है कि हमारा रिश्ता किस मजबूती से बँधा हुआ है । साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर निशाना साधते हुए कहा कि नाका भारत ने नहीं मधेश की जनता ने अवरोध किया है । इसलिए किसी को दोष देने से बेहतर है कि हमें अपना मामला खुद सुलझाना चाहिए । मधेशी जनता की राष्ट्रीयता पर शक कर के मामला को उलझाने की बजाय इसे सुलझाना चाहिए । मधेश एक राष्ट्र चाहता है विखण्डित राष्ट्र नहीं । nb-1
पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्राई ने कहा कि भारत नेपाल सम्बन्ध को अब नए नजरिए से देखने की आवश्यकता है और दो देशों के रिश्ते की प्रगाढता के लिए युवाओं को जोड़ने की जरुरत है । वहीं उपप्रधानमंत्री सीपी मैनाली ने मधेश पर आक्षेप लगाते हुए और इतिहास को अपने तरीके से व्याख्यायित करते हुए कहा कि पहचान की लड़ाई कोई मायने नहीं रखती । भारत और नेपाल के सम्बन्ध में आपकी धारणा थी कि जब साथ दौड़ते हैं तो पैर टकराने की भी अवस्था होती पर हम माफी माँगते हुए पुनः दौड़ लगाते हैं ।
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भारतीय राजदूत महामहिम रणजीत राय ने काफी स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत कभी नेपाल के लिए गलत सोच ही नहीं सकता क्योंकि भारत नेपाल में विकास और शाँति चाहता है । उन्होंने कहा कि हमेशा भारत पर यह आरोप लगाया जाता है कि भारत नेपाल से फायदा चाहता है पर सच तो यह है कि यह फायदा दोनों देशों को मिल सकता है अगर हम साथ चलें । नेपाल में जल स्रोत है, हाइड्रो पावर में हम साथ करना चाहते हैं क्योंकि हमारी भौगोलिक संरचना ऐसी है कि हम बेहतर तरीके से किसी अन्य देशों की अपेक्षा बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं किन्तु आज तक ऐसा नहीं हो पाया । इसकी क्षति नेपाल को ही नहीं भारत को भी है । विकास को अगर राजनीति से अलग कर देखा जाय तो यहाँ विकास की पूरी सम्भावना है । nb-4
कार्यक्रम के अन्त में मुख्य अतिथि पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा जी ने अत्यन्त भावुकता के साथ कहा कि कभी हमने यह नहीं सोचा कि हम भारत को क्या दे रहे हैं सिर्फ लेने की मानसिकता हमारी रही है । हम साथ चलने की बात कहते हैं किन्तु यह तभी सम्भव है जब हमारी स्थिति एक सी हो, हम सिर्फ लेने की नहीं देने की बात भी सोचें । मधेश के सन्दर्भ को उठाते हुए उन्होंने कहा कि भले ही यह कहा जाय कि नेपाल भारत के लिए सुरक्षा कवच है किन्तु भौगोलिक दृष्टिकोण से हमें यह कहते हुए गर्व है कि भारत की सुरक्षा मधेश की जनता करती है । भारत की सीमा मधेश से जुड़ी हुई है और मधेश की धरती कभी अपने पड़ोसी राष्ट्र के विरुद्ध काम नहीं कर सकती है । nb-3
धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही कार्यक्रम की समाप्ति हुई ।nb-5
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