भारत की जनता जान गई है कि नेपाल भारत के खिलाफ और चाइना के करीब है : अनिल केडिया

मेरी नजर में सबसे बड़ी गलती यह रही कि उन्होंने (ओलीजी ने) अपने ही देश के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं को नहीं समझा । अपनी ही धरती पर मधेशियों की उपस्थिति को नकारने की कोशिश की । उनकी भावनाओं को उन्होंने नहीं समझा और जब सत्ता ही ये विभेद की स्थिति पैदा करेगी तो जनता का असंतुष्ट होना तो लाजिमी है ।


आज तक पहाड़ पर बैठे लोग या काठमान्डू में बैठे लोग ये समझते रहे कि नेपाल सिर्फ पहाड़ है, तो इस सोच और इस स्थिति को तो बदलना ही होगा ।


अब लगता है कि प्रचण्ड जी अपनी परिपक्वता का परिचय देंगे और इस रिश्ते को सुधारेंगे । वो कम्यूनिष्ट है इसलिए वो दोनों पड़ोसी राष्ट्र भारत और चीन को साथ लेकर चलेंगे । क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है ।

मधेशी नेता को यह सोचना है कि आपस में नहीं लड़कर संसद में कैसे अपनी मजबूती बनाए रखे । उन्हें पावर लेना है तभी मधेश का विकास होगा । जब शक्ति का संतुलन बराबर होगा तभी पहाड़ और मधेश के बीच की दूरी भी खतम होगी ।

सभी समस्याओं का समाधान बातचीत से सम्भव है पर हमारी सरकार ये नहीं करती बल्कि माहौल ऐसा पैदा करती है कि जनता भारत विरोधी खेमा तैयार कर लेती है । देश का विकास अगर हम चाहते हैं तो इन सभी बातों से हटकर सरकार को मजबूत नीति बनानी चाहिए, उसका ईमानदारी से कार्यान्वयन करना चाहिए, न कि अपनी कमजोरी और नाकामी छुपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाना चाहिए ।

Anil kediya

डी.ए.वी स्कूल एवं कॉलेज के संचालक श्री अनिल केडिया

 

नेपाल के प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल केडिया जी से देश की वर्तमान स्थिति पर हिमालिनी की विशेष बातचीत का सम्पादित अंश

१. आपकी नजर में ओली सरकार की गलती क्या रही ?

अगर ओली सरकार की कमी या गलती की बात करें तो मेरी नजर में सबसे बड़ी गलती यह रही कि उन्होंने अपने ही देश के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं को नहीं समझा । अपनी ही धरती पर मधेशियों की उपस्थिति को नकारने की कोशिश की । उनकी भावनाओं को उन्होंने नहीं समझा और जब सत्ता ही ये विभेद की स्थिति पैदा करेगी तो जनता का असंतुष्ट होना तो लाजिमी है । आज तक पहाड़ पर बैठे लोग या काठमान्डू में बैठे लोग ये समझते रहे कि नेपाल सिर्फ पहाड़ है, तो इस सोच और इस स्थिति को तो बदलना ही होगा । ओली जी सरकार में रहकर और सरकार में आने से पहले भी इसी सोच और मानसिकता के साथ शासन करना चाह रहे थे कि उन्हें सिर्फ एक समुदाय विशेष को लेकर चलना है, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीयता के नारे का सहारा लिया । जिस तरह उन्होंने मधेश को नकारा और उस पर भारत की जो प्रतिक्रिया रही इन्हीं मुद्दों की वजह से ही मित्र राष्ट्र भारत के साथ हमारे सम्बन्ध बिगड़े क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि सभी को साथ लेकर चलिए और संविधान में सभी को बराबर का अधिकार दीजिए । यही बात उन्हें पसन्द नहीं आई और जिसे एक दूसरा रुप देकर उन्होंने यहाँ की जनता और सत्ता दोनों को भारत के खिलाफ कर दिया । भारत के साथ हमारा प्राकृतिक, साँस्कृतिक, पारिवारिक सभी तरह का रिश्ता है और इसे यहाँ नकारने की कोशिश की जा रही है जबकि यह किसी भी तरह सम्भव नहीं है । आज यह स्थिति है कि भारत की जनता जो कल तक यहाँ की जनता को अपना समझती थी वो आज यह जान गई है कि नेपाली जनता भारत के विरुद्ध है, क्योंकि संचार माध्यम के द्वारा वो सब जान रही है । वो जान रही है कि नेपाली जनता भारत के खिलाफ और चाइना के करीब है  भारत की जनता ऐसे में रिश्तों के बीच दरार तो आ ही गई है ।

२. आप एक शैक्षिक संस्थान डी.ए.वी चलाते हैं आपकी नजर में शिक्षा में क्या सुधार होना चाहिए ?

शिक्षा के क्षेत्र में तो बहुत ही सुधार की आवश्यकता है, खास कर निजी शिक्षा क्षेत्र में । राज्य और निजी शिक्षा क्षेत्र में जो द्वन्द्ध है उसे दूर करने की आवश्यकता है । फीस की चर्चा होती रहती है । सच पूछिए तो यहाँ फीस नहीं कहा जाता बल्कि उसके लिए शब्द है ‘ढांड सेकने गरि फीस’ इस एक वाक्य से आप समझ सकते हैं कि क्या नजरिया है निजी शिक्षा क्षेत्र वालों के लिए । राज्य तो सीधे निजी क्षेत्र को लुटेरा समझती है । जबकि विश्व में ही शायद सबसे अधिक टैक्स लेने वाला देश नेपाल है । शिक्षा के लिए ऐसी नीति है जो इस क्षेत्र को बाधा पहुँचाती है । नेपाल के बच्चे बाहर जाते हैं क्योंकि वो यहाँ से संतुष्ट नहीं है और यही संदेश बाहर जाता है जिसके कारण यहाँ इतनी कंसलटेन्शी और शिक्षा मेला लगा करता है । जितने इच्छुक यहाँ के बच्चे या अभिभावक होते हैं बाहर जाने या भेजने के लिए उतने किसी और देश में मुझे नहीं लगता कि होते होंगे । यहाँ की शिक्षा और शिक्षा नीति दोनों ही इस असंतुष्टता के कारण हैं और इसमें सुधार की बहुत आवश्यकता है । ताकि यहाँ के बच्चे यहीं गुणस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके्र और यहाँ का पैसा यहीं रह सके ।

३. भारत के सहयोग से यहाँ कई विद्यायलयों का निर्माण हुआ है, वहाँ से सैकड़ों बच्चे हर वर्ष शिक्षित होकर निकलते है. बावजूद इसके उनके अन्दर भारत विरोधी भावना ही पाई जाती है, आखिर इसकी क्या वजह है ?

आप यहाँ पढ़ने वाले बच्चों की बात कर रहे हैं जबकि जो बच्चे भारत से डाक्टर, इंजीनियर बनकर आते हैं, यहाँ तक कि भारतीय सरकार द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति से पढ़कर आते हैं वो भी भारत विरोधी बात ही करते हैं । तो इसकी सबसे मूल वजह यह है कि जब तक उपर के जो मुखिया हैं उनकी नीति नहीं बदलेगी तब तक यह चलता रहेगा । राजा महेन्द्र ने जो नीति लागू किया आज भी वही चल रहा है । मधेश की बात होती है तो उसके लिए भी भारत का ही विरोध किया जाता है । जब भी मधेशी अधिकार की बात सामने आती है तो यह आरोप भी भारत पर ही लगाया जाता है भारत ऐसा चाह रहा है । जबकि भारत और नेपाल दोनों एक दूसरे के पूरक हैं भारत को मधेश से जोड़कर या मधेश को भारत से जोड़कर देखने की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक यह सब चलता रहेगा ।

४. सत्ता परिवत्र्तन हो रहा है, क्या आपको ऐसा लग रहा है कि नेपाल भारत सम्बन्ध सुधरेगा ?

यहाँ का इतिहास रहा है कि जब भी कोई नया प्रधानमंत्री बनता है तो वह किसी ना किसी वजह से भारत से रिश्ता बिगाड़ लेता है । प्रचण्ड जी ने भी पहली मरतबा यही किया था जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा । परन्तु अब लगता है कि प्रचण्ड जी अपनी परिपक्वता का परिचय देंगे और इस रिश्ते को सुधारेंगे । वो कम्यूनिष्ट है इसलिए वो दोनों पड़ोसी राष्ट्र भारत और चीन को साथ लेकर चलेंगे । क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है । प्रचण्ड जी अपने दोनों अहम पड़ोसी को साथ लेकर चलना चाहेंगे जो इस देश की माँग है और इसी में नेपाल का हित और विकास दोनों छुपा हुआ है ।

५. इन सबके बीच मधेश की क्या उपलब्धि होगी ?

देखिए ये सब समय बताएगा । किन्तु यह तो जाहिर सी बात है कि संविधान को ऐसा बनाया जाए जो सबके हित का हो, जो अभी नहीं है तो अगर संविधान का संशोधन होता है तो जरुर मधेश को फायदा होगा । संघीयता का होना और उसके साथ ही संसद में मधेशी साँसद की भी जब बराबरी होगी तभी मधेश का हित और विकास सम्भव है । अब मधेशी नेता को यह सोचना है कि आपस में नहीं लड़कर संसद में कैसे अपनी मजबूती बनाए रखे । उन्हें पावर लेना है तभी मधेश का विकास होगा । जब शक्ति का संतुलन बराबर होगा तभी पहाड़ और मधेश के बीच की दूरी भी खतम होगी । इसलिए बराबर यानि समानता का अधिकार जब होगा तभी एकता की भी भावना होगी भाईचारा बना रहेगा ।

६. औद्योगिक क्षेत्र में कैसी सुधार की आवश्यकता है ?

देश की सारी परिस्थितियाँ एक दूसरे की पूरक होती हैं । जब स्थायित्व होगा तभी उद्योग का भी विकास होगा । वर्तमान संविधान में निजी क्षेत्र की पूरी अवहेलना की गई है । राज्य की सोच अगर निजी क्षेत्र के लिए सही हो जाय तो देश का भी विकास सम्भव है । समाजवाद यानि कम्यूनिष्ट पर आधारित संविधान बना है जिसमें निजी क्षेत्र की पूरी तरह अवहेलना की गई है । चीन समाजवाद की तरफदारी करता है परन्तु वहाँ निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाता है । वहाँ की तरक्की देखिए । किन्तु हमारे यहाँ इसी चीज की कमी है । यहाँ व्यापार, उद्योग निजी व्यवसाय पर कोई तवज्जोह सरकार नहीं देती तो ऐसे में देश के विकास की बात कहाँ से सम्भव हो सकती है ?

७. अभी एक ताजा घटना जो चर्चा में है तिलाठी की घटना, उसके विषय में कुछ कहना चाहेंगे ?

हमारी आदत है कि हम अपनी कमजोरी दूसरों पर लादते हैं । हर देश अपना काम करना चाहता है । उसको हम नहीं रोक सकते । चीन हो या भारत अपनी सुरक्षा हर कोई चाहता है । चीन भी अपनी सीमा पर काम करता है पर वहाँ आवाज नहीं उठती । कमजोरी हममें है । अगर हम अपनी सुरक्षा पहले कर लेते तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती । नेपाल अगर बाढ से बचने का उपाय कर लेता तो यह तनाव क्यों पैदा होती । फास्ट ट्रैक की बात हो, हुलाकी सड़क की बात हो हर जगह हमारी सरकार, उनकी योजना पीछे है किन्तु दोष हम दूसरों को देते हैं । भारत छोटी छोटी बातों पर नेपाल से तनाव पैदा नहीं करना चाहेगा । समस्या हमारी है तो पहल भी हमें ही करनी होगी । सभी समस्याओं का समाधान बातचीत से सम्भव है पर हमारी सरकार ये नहीं करती बल्कि माहोल ऐसा पैदा करती है कि जनता भारत विरोधी खेमा तैयार कर लेती है । देश का विकास अगर हम चाहते हैं तो इन सभी बातों से हटकर सरकार को मजबूत नीति बनानी चाहिए, उसका ईमानदारी से कार्यान्वयन करना चाहिए, न कि अपनी कमजोरी और नाकामी छुपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाना चाहिए ।

प्रस्तुति : श्वेता दीप्ति

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