भारत की जायज चिंता

भारत की जायज चिंता
भारतीय विदेश मंत्री के नेपाल भ्रमण के दौरान उन्होंने नेपाल सरकार के समक्ष सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता प्रकट की है, वह बिलकुल जायज हे । नेपाल में एक दल विशेष द्वारा अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए किए जा रहे भारत विरोधी अभियान से नेपाल में रहे भारतीय उद्योगी पर ही खतरा नहीं मँडरा रहा है बल्कि अब तो माओवादी भारतीय कूटनैयिकों पर भी लगातार हमला बोल रहे हैं । पिछले दिनो अपर कर्ण्ााली में अवस्थित भारतीय कंपनी जीएमआर के दफ्तर पर हमला का मामला हो या फिर दैलेख में भारतीय राजदूत राकेश सुद का किया गया विरोध हो, इन घटनाओं से यह साबित होता है कि भारत की चिंता कितनी जायज है । ऐसे में कोई दो मत नहीं कि भारत सरकार अपने उद्योगों, अपने राजनयिकों की सुरक्षा की खुद ही व्यवस्था करे । क्योंकि वैसे भी नेपाल सकरार वह यहाँ की जनता तो बाबा पशुपतनिाथ के ही कृपा से चल रही है ।       -अशोक कुमार अलबेला,जोगबनी, बिहार
हिन्दू राष्ट्र पर जरुरी है जनआंदोलन

विश्व के एकमात्र हिन्दू राष्ट्रक के रुप में पहचान रहे नेपाल को कुछ नेताओं के स्वार्थ व विदेशी डाँलर के इशारे पर इस देश को रातों रात धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया गया । गणतंत्र मिलने के उत्साह में आम नेपाली जनता ने उस समय तो इसकी कोई भी प्रतिक्रिया नहींं दी लेकिन अब धीरे-धीरे इस ओर लोगों में भावना जागृत हो रही है । देश की अधिकांश जनता एक बार फिर नेपाल को हिन्दू राष्ट्र के रुप में देखना चाहती है और इसके लिए वो लामबन्द भी हो रहे है । देर सबेर यह फैसला नेताओं को लेना ही हेागा । इसके लिए एक बार फिर जनाआन्दोलन करने की जरुरत है । लेकिन लागों को यह भी सोचना होगा कि उन्हें राजा बिना का हिन्दू राष्ट्र चाहिए राजा को लेकर – यह सवाल अपने आप में महत्वपर्ूण्ा है ।
– रमेश निरौला, सिन्धुपाल्चोक
फैशन के साथ कैरियर भी

हिमालिनी का अंक दिन प्रतिदिन निखरता ही जा रहा है । इसमें समाविष्ट होने वाली लेख रचानाओं का स्तर भी बढÞता जा रहा है । महिलाएँ खासकर युवतियों के लिए फैशन, मेकअप, खाना-खजाना जैसे स्तम्भ तो अच्छा लगता है । पढÞकर लेकिन इसके साथ कैरियर से जुडÞी कुछ बातों का पत्रिका में उल्लेख हो तो और भी अच्छा हम जैसे पीढी के लिए उपयोगी हो सकता है । खासकर भारत के इन्स्टीचयूट के बारे में जानकारी मिल सके तो बेहतर है क्योंकि नेपाल से ६० प्रतिशत से अधिक छात्र उच्च शिक्षा के लिए भारत को ही प्राथमिता देते हे । इसलिए कैरियर से जुडी बातों को भी स्थाई स्तम्भ के तौर पर शामिल किया ज्ााए तो अच्छा रहेगा ।          – ऋचा शर्मा, हेटौडÞा
कठघरे में सरकार
हारे हुए नेताओं को मंत्री ना बनाने का प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल का ऐलान सिर्फहवा हवाई साबित हुआ है । ऐसा ही कुछ बयान माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने भी दिया था । लेकिन सत्तारुढ गठबंधन के दो शर्ीष्ा नेता अपनी बातों पर अधिक देर टिक नहीं पाए । गठबंधन की मजबुरी में इन्होंने अपनी तथाकथित नैतिकता को ही ताक पर रख दिया । एमाले व माओवादी ने कई ऐस नेताओं को मंत्री बनाया है, जिसे जनता ने चुनाव में साफ नकार दिया था । इसी कारण एमाले व माओवादी के कुछ मंत्रियों ने तो आज तक शपथ नहीं लिया । यहाँ तक तो ठीक था लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस तरह से डा. ल्हारक्याल लामा जैसे संदिग्ध व्यक्ति को वित राज्यमंत्री जैसे महत्वपर्ूण्ा पद पर बिठाया, उससे खुद प्रधानमंत्री भी संदेह के घेरे में आ गए है । फर्जी रुप से तीन देशों की नागरिकता व पासपोर्ट लेने वाले डा. लामा के मंत्री बनाए जाने के असली रहस्य से अभी भी पर्दा उठना बाँकी है । यह सच्चाई सामने आते ही इस सरकार की, प्रधानमंत्री की और एमाले में कई नेताओं का असली चेहरा सामने आ सकता है ।
– सर्ूया तामांग, काठमांडू
कला-संस्कृति भी आवश्यक
हिमालिनी को संपर्ूण्ा मासिक पत्रिका कहने का दावा किया जाना उचित है लेकिन कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि इस पत्रिका को पर्ूण्ा से संपर्ूण्ा बनाने में कही कोई कसर बाकी रह गया है । नेपाल से प्रकाशित यह एक मात्र हिन्दी पत्रिका भारत के अनेक स्थानों में भी लोकप्रिय हो रही है । इसमें समावेश की गई सामग्री में भी लोकप्रिय हो रही है । इसमें समावेश की गई सामग्री पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है । लेकिन एक नियमित पाठक होने के नाते इतना कहने की साहस अवश्य जुटा सकता हूँ कि पत्रिका में कला संस्कृति के लिए कोई स्तम्भ की शुरुआत की जाए और नियमित रूप से इसमें नेपाल की उन कला, संस्कृति, परम्परा, धार्मिक, आध्यात्मिक वस्तुओं की जानकारी मिल सके, जिससे नेपाल के साथ बाहर के देशों के भी पाठक उससे अवगत हो सके । विश्वास है कि संपादक मंडल मेरे इस आग्रह पर गंभीरता से विचार करेंगे ।
– सुशान्त झा बेता चौक, लहेरियासराय, दरभंगा

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