Mon. Sep 24th, 2018

भारत की पाकिस्तान को हर तरफ से घेरने की कोशिश, 56 साल पुराना सिंधु जल समझौता खत्म कर सकता है भारत

नई दिल्ली.sindhu_1474563970
उड़ी आतंकी हमले में 18 जवानों के शहीद होने के बाद भारत पाकिस्तान को हर तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है। फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप ने गुरुवार शाम सिंधु जल समझौते पर कहा- किसी भी समझौते के लिए आपसी भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। जब उनसे इसके मायने पूछे गए तो विकास ने कहा- डिप्लोमैसी में हर चीज को विस्तार से नहीं बताया जाता। बता दें कि 1960 के सिंधु जल समझौते के मुताबिक, पाकिस्तान को भारत से बहने वाली छह नदियों का पानी मिलता है। इसी पानी से पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं और सिंचाई की जा रही है।  मीडिया ने विकास स्वरूप से सिंधु जल समझौते को रद्द किए जाने संबंधी खबरों पर सरकार का पक्ष जानना चाहा। इस पर स्वरूप ने कहा- किसी एक तरफ से सहयोग इस तरह के समझौतों में काम नहीं करता।
– स्वरूप ने सरकार के इरादों की तरफ इशारा करते हुए कहा- इस समझौते की प्रस्तावना (preamble) में ही साफ लिखा है कि ये गुडविल पर काम करेगा।
– स्पोक्सपर्सन से जब ये पूछा गया कि क्या भारत इस समझौते को रद्द कर सकता है? विकास ने कहा- इस बारे में विस्तार से नहीं बताया जा सकता। डिप्लोमैसी में हर चीज को समझाया नहीं जाता।
क्या है सिंधु जल समझौता?
– सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में हुआ। इस पर जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे।
– समझौते के तहत छह नदियों- बीस, रावी, सतलज, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी भारत और पाकिस्तान को मिलता है। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारत उसे समझौते की शर्तों से कम पानी देता है। वो दो बार इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में शिकायत भी कर चुका है।
– समझौते के मुताबिक, सतलज, व्यास और रावी का अधिकतर पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
– इस समझौते को भारत अगर रद्द कर देता है तो वहां का एक बड़ा हिस्सा प्यासा रह जाएगा। सिंधु और बाकी पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं। पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने पिछले दिनों कहा था कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा।
– सिंधु, झेलम और चेनाब में वाटर बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। बिजली की पाकिस्तान में वैसे ही भारी परेशानी है। अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में बिजली को लेकर हाहाकार मच सकता है। इसके अलावा इन तीनों नदियों से सिंचाई भी की जाती है।
– समझौता रद्द होने पर बिजली तो कम होगी ही पाकिस्तान के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इससे निपटना करीब-करीब नामुमकिन हो सकता है। पहले ही कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान को फाइनेंशियल लेवल पर ये झटका सहन करना बेहद कठिन होगा।
साभार, दैनिक भास्कर
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