भारत की सभ्यता बहुत पुरानी है: राजदूत मंजीव सिंह पुरी

काठमांडू, २५ सितंबर ।
भारतीय दूतावास एवं बीपी कोइराला फाउन्डेशन ने युग पुरुष मानव एकात्मवाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन कर उन्हें याद किया । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डा. जयराज आचार्य थे, जिन्होंने पंडित दीनदयाल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला ।


कार्यक्रम कों संबोधन करते हुए भारतीय राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा – ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे । विलक्षण बुद्धि एवं सरल नेतृत्व के अनेक गुणों के स्वामी भारतीय राजनीतिक शिक्षित के प्रकाशमान सूर्य ने भारत वर्ष में समतामुलक राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करते हुए बहुत कम उम्र में अपने प्राण राष्ट्र को समर्पित कर दिय । वे उच्च कोटि के दार्शनिक थे और किसी प्रकार का भौतिक माया–मोह उन्हें छू तक नहीं सका ।’


उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता बुहत पुरानी है । बसुधैव कुटुम्बकम हमारी सभ्यता से प्रचलित है । इसी के अनुसार भारत में सभी धर्माें को समान अधिकार प्राप्त हैं । भारतीय सभ्यता को संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु भारत सरकार की ओर से बहुत से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ।
मौके पर कुटनीतिज्ञ डॉ. जयराज आचार्य ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अन्त्योदय विचारधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो सर्वहारा है, सर्वरुपेण शोषित है तथा विकास की अंतिम पंक्ति में बैठा है, उसे सरकार द्वारा नियोजित नीति के माध्यम से अग्रिम पंक्ति में समातामुलक भाव से लाना ही उपाध्याय जीका अन्त्योदयवाद है ।


पंडित दीनदयाल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे । किसी ने सच ही कहा है कि कुछ लोग सिर्फ समाज बदलने के लिए जन्म लेते हैं और समाज का भला करते हुए ही खुशी से मौत को गले लगा लेते हैं। उन्हीं में से एक हैं दीनदयाल उपाध्याय, जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी समाज के लोगों को ही समर्पित कर दी । इस महान व्यक्तित्व में कुशल अर्थ्चिन्तक, संगठनशास्त्री, शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ, वक्ता, लेखक व पत्रकार आदि जैसी प्रतिभाएं छुपी थीं । पं. दीनदयाल उपाध्याय महान चिंतक और संगठक थे । आरएसएस के एक अहम नेता और भारतीय समाज के एक बड़े समाजसेवक होने के साथ वह साहित्यकार भी थे ।

गोष्ठी के अंत में महामहिम राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने प्रो. जयराज आचार्य को एक पुस्तक स्मृति चिन्ह के रुप में भेंट की । अवसर पर पंण्डित दीनदयाल उपाध्ययाय की जन्म शताब्दी के बारे में ३० मिनेट की वृत्तचित्र की प्रस्तुति भी की गयी थी । भारतीय दूतावास के चांसरी प्रमुख अभिषेक दुबे ने गोष्ठी का संचालन किया तथा नेपाल–भारत पुस्तकालध्यक्ष महेश चन्द्र शर्मा ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापन किया ।

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