Wed. Sep 19th, 2018

भारत के एनएसजी के सदस्य बनने में सबसे बडा बाधक चीन : अमेरिका

वाशिंगटन, प्रेट्र।

अमेरिका ने कहा कि भारत सिर्फ चीन के विरोध के चलते अभी तक परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य नहीं बन पाया है। भारत इस समूह की सदस्यता पाने के सभी पैमानों पर खरा उतरता है। ट्रंप प्रशासन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका इस विशिष्ट समूह की सदस्यता के लिए भारत के दावे का समर्थन करना जारी रखेगा।

दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों की उप विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘एनएसजी एक आम सहमति वाला संगठन है। चीन के विरोध के चलते भारत अब तक इसकी सदस्यता हासिल नहीं कर पाया है। हमारा मानना है कि चीन के वीटो के आधार हम भारत के साथ अपने सहयोग को सीमित करने नहीं जा रहे हैं। हमें पक्के तौर पर यकीन है कि भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के लिए सभी योग्यताओं को पूरा करता है। हम भारत की सदस्यता के लिए सक्रियता के साथ पैरवी करते रहेंगे।’

उन्होंने कहा कि रणनीतिक कारोबार अधिकार (एसटीए) का दर्जा देकर अमेरिका ने भारत को अपने करीबी सहयोगी देशों में शुमार किया है। अमेरिका के शीर्ष थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआइएस) के कार्यक्रम में एक सवाल पर वेल्स ने कहा, ‘यह रणनीतिक साझेदारी की आत्मीयता को दर्शाता है।’

एनपीटी के आधार पर चीन करता है विरोध
एनएसजी में भारत के प्रवेश को पिछले कई वर्षो से चीन रोक रहा है। भारत के परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने को आधार बना कर चीन अड़ंगा लगा रहा है। चीन के सहयोगी पाकिस्तान ने भी 2016 में एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन किया था।

ज्यादातर देश भारत के पक्ष में
एनएसजी के ज्यादातर सदस्य देश भारत के प्रयास का समर्थन करते हैं। इसकी सदस्यता के लिए अमेरिका और कई पश्चिमी देश भारत के साथ खड़े हैं।

48 देशों वाला विशिष्ट समूह
48 देशों वाला एनएसजी परमाणु कारोबार को नियंत्रित करता है। इसके सदस्य देश आपस में आसानी से परमाणु कारोबार कर सकते हैं। इसका सदस्य बनने से भारत की परमाणु जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।

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