भारत को नेपाल की भूमि हडपने की जरुरत नहीं,गाँधी की धरती काफी है- सुषमा

shushma aseshभारत के लिए महात्मा की भूमि काफी है । जलस्रोत में भारत का एकाधिकार कभी नहीं रहेगा ।
श्वेता दीप्ति, काठमान्डौ १० गते । भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज अपनी तीन दिवसीय नेपाल यात्रा पूरी कर वापस अपने स्वदेश जा चुकी हैं । किन्तु नेपाल आने से पहले और वापस जाने के बाद भी चर्चा और अटकलों का बाजार गरम है । इन सब के बीच अगर कुछ अच्छा है तो यह कि, भारतीय विदेशमंत्री के आने से नेपाल की हवा में कुछ सकारात्मकता के पहलू भी दिख रहे हैं । नेपाल की सरकार और जनता दोनों की शंकाओं को दूर करने की पूरी कोशश भारतीय पक्ष की ओर से की जा रही है । विगत के सभी विवादित मुद्दे भारतीय पक्ष के सामने रखे जा रहे हैं, आखिर सही वक्त भी तो यही है । भारत और नेपाल दोनों, सभी संधियों और समझौतों के पुनरावलोकन के लिए तैयार हंै ।

shushma_abhaykrइसी सन्दर्भ में जब भारतीय विदेशमंत्री से पत्रकारों ने नेपाली भूमि को भारत द्वारा कब्जा करने की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि, भारत के पास महात्मा गाँधी की धरती काफी है वो पशुपतिनाथ और बुद्ध की जमीन हड़पने की कभी सोच नहीं सकता । नेपाल में अगर यह धारणा है कि जलस्रोत और उर्जा विकास के नाम पर भारत नेपाल की भूमि कब्जा करने की सोच रहा है तो यह बिल्कुल गलत सोच है । ऐसी अपवाहों को नहीं फैलाया जाय यह आग्रह उन्होंने किया । भारत नेपाल के विकास के लिए सदा तत्पर है किन्तु इसकी पहल तो नेपाली नेताओं को ही करनी होगी । भारत के साथ व्यापार में जो घाटा नेपाल को हो रहा है, उसके लिए उर्जा समझौता आवश्यक है । भारत सिर्फ उर्जा खरीदना चाहता है उस पर कब्जा नहीं करना चाहता । भारत ने सिर्फ एक प्रस्ताव दिया है जिसपर खुली बहस कर के ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है । पहले से ही भ्रम नहीं पालना चाहिए । मोदी के भ्रमण की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि अभी भारत में संसद चल रहा है, ऐसे में कोई भी प्रधानमंत्री सदन में अनुपस्थित नहीं रहते किन्तु प्रधानमंत्री नेपाल आ रहे हैं क्योंकि, वो श्रावण के सोमवार को पशुपति दर्शन भी करना चाहते हैं । १७ वर्षों के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल आ रहा है इसे सकारात्मक रूप में लेने का आग्रह उन्होंने किया । पुनः उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल में सुख, समृद्धि और विकास देखना चाहता है और इसमें सहयोग के लिए तत्पर है । उन्होंने माना कि उनका भ्रमण सोच से अधिक सफल रहा । ज्ञातव्य हो कि मोदी वो पहले प्रधानमंत्री होंगे जो नेपाल की संसद को सम्बोधित करने वाले हैं ।

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