भारत पर शिकंजा कसने की चीन और पाकिस्तान की साजिश

 

भारत में भाजपा की सरकार बनते ही, प्रधानमन्त्री मोदी जहाँ विश्व का भ्रमण कर भारत की स्थिति को मजबूती प्रदान करने में सफल हुए वहीं वो अपने मित्र देशों के साथ भी सम्बन्ध सुधारने और उनकी समृद्धि एवं विकास के लिए कोई कसर और चूक करने के मूड में नहीं हैं ।
मोदी ने सबसे पहले अपनी विदेश यात्रा सार्क देशों से शुरु की, जिसमें वे सबसे पहले भुटान के लिए प्रस्थान किए और उसके कुछ ही दिनों बाद नेपाल दौरा में आए । भारतीय प्रधानमन्त्री के तौर पर मोदी पहले प्रधानमन्त्री हुए जिन्होंने नेपाल का दो बार लगातार भ्रमण किया । बंगलादेश के साथ भारत के बिगड़ते सम्बन्ध को मोदी एक नई दिशा देने में जहाँ सफल रहे वहीं बंगलादेशी घुसपैठ को पूर्ण रूप से रोकने पर अपना मोहर लगा दिया ।

खबर के मुताबिक इन बच्चों को अरूणांचल प्रदेश से नेपाल ले जाया जाता है और वहीं इन्हें काठमांडू के स्वयंभू स्थित फुंछोक चोलिंग बौद्ध मठ में भर्ती किया जाता था । हैरानी की बात यह है कि नेपाल सरकार के पास २०१० तक मठ पंजीकृत में ८२ मठ की सूची शामिल थी पर उनकी इस सूची में इस मठ का नाम दर्ज नही था । परन्तु उससे भी हैरानी की बात तब सामने आई जब यह देखा गया कि ये मठ चीन का समर्थन करते है और मठ में शुगदेन सम्प्रदाय की शिक्षा प्रदान की जाती है ।

मोदी सरकार ने श्रीलंका को चीन के आर्थिक नीति के प्रभाव से बाहर निकालने का जी तोड़ प्रयास किया और भारत–श्रीलंका के सम्बन्ध को नई परिभाषा देने में भी मोदी सरकार आगे रही । भारत अफगानिस्तान और बंगलादेश के साथ खडेÞ होकर संयुक्त रूप से आतंकवाद विरूद्ध की लड़ाई में एक साथ लड़ने का नारा देने में सफल रहा तो दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के मामले को लेकर भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी ने अपना रूख कड़ा किया और पाकिस्तान के सामने सख्ती के साथ प्रस्तुत हुए ।
जाहिर सी बात है कि भारत विश्व में शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में पहचान बनाने में सफल हो रहा है और यही बात चीन को नहीं पच रही है । दूसरी ओर पाकिस्तान अपने को सार्क देश के अन्दर अलग थलग महसूस कर रहा है । चीन एक शातिर खिलाड़ी की तरह इस बात का फायदा उठाना चाहता है किन्तु पाकिस्तान हाथ में आने के बाद भी निकल जाता है । पिछले कुछ दशक से चीन और पाकिस्तान एक ही विचार तले नेपाल की भूमि मार्ग का प्रयोग करके भारत को घेरने में लगे हुए हैं । इसके लिए ये दोनो एक दूसरे को आपस में सहयोग भी करते आए हैं ।
चीन को इस्लाम से कोई खतरा नहीं है । उन्हें खतरा है तो सिर्फ पश्चिम शक्ति केन्द्रों से जो धार्मिक दृष्टि से क्रिस्टियानीटि पर विश्वास करते हैं, क्योंकि आज चीन सबसे ज्यादा किसी बात से परेशान है तो वह है कि चीन में तेजी से बढते धर्मान्तरण जहाँ बौद्ध बहुत तेजी से इस धर्म को अनुसरण करते दिख रहे हैं । चीन इस मामले में अपने अस्तित्व को लेकर खतरा महसूस कर रहा है । यही वजह है कि चीन भारत में अपना नेटवर्क मजबूत करना चाहता है और इसके लिए पाकिस्तान की मदद से भारत को चौतर्फी रूप से घेरने का प्रयास कर रहा है ।
इसी नीति के तहत चीन, नेपाल की भूमि मार्ग का प्रयोग कर के भारत पर दवाब बनाना चाहता है और पाकिस्तान नेपाल के हवाई मार्ग का प्रयोग कर भारत में आतंक की जड़ें मजबूत करना चाह रहा है । जिससे भारतीय आम जनता सदैव खौफनाक जीवन जीते रहें । इन्हीं मुद्दों के

Pakistan China

तहत प्रस्तुत है हिमालनी की एक विशेष रिपोर्ट —

चीनी नेपाली भूमि से अरुणाचल प्रदेश में बवाल करते हैं
१९६२ के आक्रमण के बाद ४ हजार किलोमीटर से भी अधिक लम्बी भारत–तिब्बत सीमा इंच दर इंच सिकुडती नजर आ रही है । ज्ञात हो कि इस कार्य में चीन ने नेपाल की भूमि का प्रयोग किया था । पूर्वोत्तर में अरूणांचल के वौमडीला, तवांग क्षेत्र व सिक्किम के उतर पूर्व छांगरी तथा पश्चिमोत्तर में लद्दाख के दूमचैक, चुशुल एवं पैगगौंक झील स्थानों की अवस्था अभी भी बहुत भयावह है । download
१९६२की शर्मनाक पराजय के वाद भी सुरक्षा और सड़क व संचार आदि के क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ है । वहीं चीन ने तिब्बत में ल्हासा, काम्डो, निंगाची,त्याजी और किगाजी हवाई अड्डों की सीमा पर अत्याधुनिक तैयारी के साथ निर्माण में लगा है और साथ ही सीमा पर चीनी सैनिको की संख्या भारत से पाँच गुणा तक अधिक है ।
सिक्मिम, भारत–चीन सीमा के दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण राज्य है । यद्यपि सिक्किम में १९६२ में चीन ने बहुत बडा आक्रमण नहीं किया पर नाथू ला पास, सुरक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है । सिक्किम भारत के पूर्ण नक्से में एक चिकेन नेक की तरह है जिस पर चीनी की गिद्ध नजर शुरु से ही है । चीन घुसपैठ की अपनी सारी गतिविधियाँ नेपाल की भूमि से अरूणाचंल के अन्दर करता नजर आ रहा है ।
 
नेपाल में चीन से जुड़ी संस्थाएँ
हमारा देश नेपाल छोटा सा ही है पर यहाँ गतिविधियाँ बडेÞ पैमाने पर चलायी जाती हैं । नेपाल के अन्दर केवल दूर समुन्द्र पार देश की गतिविधियाँ ही नहीं बल्कि नेपाल–चीन सम्बन्ध पर आधारित संस्थाएं भी नेपाल में अपना प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष कार्यक्रम एवं गतिविधियाँ चलाते हैं । जानकारी यह है कि इन सारी संस्थाओं की images (6)सम्पूर्ण गतिविधियाँ राजधानी केन्द्रित पहाड़ी इलाको में और खासकर उन पहाड़ी इलाकों में जहाँ का जिला चीन की सीमा से सटा हुआ है वहाँ हो रहा है ताकि समस्त पहाड़ी इलाको में बसे समुदायों पर चीन की पकड़ और मजबूत हो सके । ये संस्थाएँ हैं — नेपाल चीन महिला मैत्री समाज, नेपाल चीन भगिनी नगर मैत्री समाज, चीन अध्ययन केन्द्र, नेपाल चीन पर्यटन प्रवद्र्धन समाज, नेपाल चीन क्रियाशील युवा मैत्री समाज, नेपाल चीन भगिनी नगर मैत्री संघ, नेपाल चीन जन मैत्री समाज, नेपाल चाइना टेङड एण्ड इन्भेष्टमेन्ट प्रमोशन सेन्टर, नेपाल चीन जन सम्बन्ध केन्द्र, नेपाल चीन अन्तर्राष्ट्रीय बुद्धिष्ट सांस्कृतिक कोष
शुगदेन सम्प्रदाय की गतिविधियाँ
 
चीन सरकार तिब्बत में, विशेषकर पूर्व में शुगदेन सम्प्रदाय के मठों को सहायता और बढावा दे रहा है । लेकिन वहाँ इन मठों के लिए चीनियों को भिक्षु और पदाधिकारी नहीं मिल रहें हैं । चीन नेपाल के रास्ते भिक्षुओं के खेप तैयार करती नजर आ रही है, ताकि तिब्बत के भीतर भारत विरोधी अभियान छेड़ा जा सके । अरूणांचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से भारी संख्या में किशोर उम्र के बच्चे लापता हो रहे हैं परन्तु यह लापता की शैली अपहरण जैसी नहीं है । बल्कि वास्तविकता यह है कि गरीब परिवारों के बच्चो को नेपाल के मठ में निशुल्क भिक्षु शिक्षा प्रदान करने के बहाने काठमांडू लाया जाता है और कुछ अर्से के बाद इन बच्चों को उनके परिवारों के साथ पूर्ण रूप से सम्पर्क तोड़ दिया जाता है । फिर उन बच्चों को चीनियाँ पद्धति में सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है । फिर उन में से कुछ को नेपाल में ही और शेष को तिब्बत व चीन एवं अरूणांचल प्रदेश में भेज दिया जाता है । इतना ही नहीं दलाई लामा के नेतृत्व में चल रहे स्वतन्त्रता आन्दोलन के विरूद्ध ये भिक्षु खुलकर काम करते हैं । images (5)
सन् २०१० में एक भारतीय समाचार संवाद समिति ने खुलासा किया था कि ये बच्चे ज्यादातर अरूणांचल प्रदेश के मानेपा, दिरांगस, भुत, लिश और कालाकटंग जनजातियों से हैं जिन्हें भिक्षु बनाने के लिए अरूणांचल प्रदेश से नेपाल में लाया जाता है । खबर के मुताबिक इन बच्चों को अरूणांचल प्रदेश से नेपाल ले जाया जाता है और वहीं इन्हें काठमांडू के स्वयंभू स्थित फुंछोक चोलिंग बौद्ध मठ में भर्ती किया जाता था । हैरानी की बात यह है कि नेपाल सरकार के पास २०१० तक मठ पंजीकृत में ८२ मठ की सूची शामिल थी पर उनकी इस सूची में इस मठ का नाम दर्ज नही था । परन्तु उससे भी हैरानी की बात तब सामने आई जब यह देखा गया कि ये मठ चीन का समर्थन करते है और मठ में शुगदेन सम्प्रदाय की शिक्षा प्रदान की जाती है । स्मरण करने योग्य बातें यह है ंकि शुगदेन सम्प्रदाय के उपासक तिब्बत में दलाई लामा का विरोध करते हैं और चीन का समर्थन करते हैं ।
आजकल नेपाल चीन सरकार की गतिविधियों का अड्डा बन चुका है और नेपाल सरकार चीन प्रति के एक नीति को लेकर चीन सरकार को नाराज नहीं करना चाहती है । यह मठ भी चीन सरकार की सहायता से चलाया जाता है और नेपाल की एक चीन नीति अब भारत के लिए खतरा बनती दिख रही है ।
नेपाल में शुगदेन सम्प्रदाय की गतिविधियों में चीन अब अप्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभा रहा है । आज से १४ साल पूर्व में इस सम्प्रदाय ने एक द्विमासिक पत्रिका टाइम्स आफ डेमोके्रसी प्रारम्भ की थी , जिस के कार्यालय का और नेपाली सुगदेन सोसाइटी का सारा खर्चा नेपाल स्थित चीन के दूतावास ने ही किया था। सन् १९९७ में शुगदेन सम्प्रदाय के लोग ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आकर दलाई लामा के तीन निकटस्थ साथियों भिक्षु लोबजंग गयाछो,भिक्षु नवांग लोडे और भिक्षु लो बजंग नवांग की क्रर हत्या कर दी थी ।
इन सारी घटनाओं पर नजर डालने के पश्चात यह साफ हो गया है कि चीन नेपाल के रास्ते कैसे भारत को घेरने की साजिश रच रहा है और उनके सीमा से जुड़े उन तमाम इलाको में कैसै अपना पैर पसारे हुए है ।
मधेस में चीन और पाकिस्तान संयुक्त रूप से पैठ बनाए हुए है
माओवादी सशस्त्र द्वन्द्व के समय से ही चीन ने अपना अगला निशाना नेपाल के अन्दर पहाड़ छोडकर कहीं देखा तो वो मधेस है । चीन माओवादी सशस्त्र द्वन्द्व के मध्य समय में ही मधेस के अन्दर प्रवेश कर चुका था । china-pak_647_060315125921माओवादी मूल धार की राजनीति में आने के बाद ही लोगों को पता चला कि चीन की नजर मधेस का हर्ट लाइन लुम्बिनी पर गड़ी है और चीनी इस धार्मिक सम्बन्ध के आधार पर पूरे मधेस में प्रवेश करने की सोच बना चुका है । उसके बाद वे अपना व्यापार मधेश में खड़ा करने की सोच तैयार कर चुका है । इधर पाकिस्तान, बंगलादेश मधेश में स्कूल मदरसे के बहाने विभिन्न गतिविधियाँ कर रहे हैं । आज से दस वर्ष पूर्व जितने मदरसे मधेश में बन्द पड़े थे आज वे सबके सब फिर से शुरू हो चुके हंै और बड़े पैमाने पर चल रहे हैं । मधेश में अधिकतर स्कूल मदरसे फर्जी पाए गए हैं और जिसको नेपाली संचार माध्यमों ने हाल ही कुछ साल पहले अखबार के माध्यम से पर्दाफास किया था । आश्चर्य तो ये है कि इसमें पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे नेपाली मुस्लिम ना होकर पाकिस्तानी और बंगला देशी होते हैं ।
जानकाराें का मानना है कि वे सारे लोग भारत के बिहार होकर ही नेपाल की सीमा में प्रवेश करते हैं । वहाँ पढाने वाले शिक्षक भी नेपाली 6a00d8341df99053ef012876bb3c84970c-800wiमुस्लिम नहीं होकर बिहार होकर आए हुए मोलवी होते हैं । नेपाल में स्कूली मदरसे का यही हाल रहा तो नेपाली मुस्लिम कम मधेस में अल्पमत में पड़ने की सम्भावनाएं अधिक है जो एक चुनौती से कम नहीं है । आज मधेश में मुस्लिम समुदायों की जनसंख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है और उसमें से अधिकतर गैर नेपाली मुस्लिम की संख्या अत्यधिक है । यह कहना मुश्किल होगा कल के दिन में कि कौन नेपाली मुस्लिम है और कौन गैर नेपाली मुस्लिम ।
आइ एस आइ नेपाल में चीन के लिए जासूसी का काम करता है ः
चीन नेपाल में आइएसआइ को बढावा देता आया है । दुनिया जानती है कि चीनी पाकिस्तानी आइएसआइ जैसे एजेन्सी पर किस तरह फिदा है । getimage images (1)पाकिस्तानी जासूसी संस्था आइएसआइ चीन के लिए नेपाल में और नेपाल से बाहर काम करता है । इसलिए चीन नेपाल में उसको अप्रत्यक्ष रूप में मदद करता है । खासकर स्वतन्त्र तिब्बत से लेकर, अमेरीका और भारत तक के सम्पूर्ण गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चीन ने अपने सबसे भरोसेमन्द दोस्त पाकिस्तान को ही चुना है और समय–समय पर उनसे नेपाल–भारत बीच की राजनीतिक जासूसी करवाते हंै ।
पाकिस्तान के साथ नया हवाई समझौता देश के लिए खतरा
हाल ही में टर्की के ऐनटालिया स्थित नेपाल ने पाकिस्तान लगायत आठ देशों के साथ नए हवाई समझौता सम्पन्न किया है । जिसमें दो नए देशाें के साथ हवाई सम्झौता शुरु करने की बात है तो वहीं शेष में पुनरावलोकन के साथ कुछ नई बातों पर जोर दिया गया है ।Pakistan-International-Airways_1 नेपाल नागरिक उड्ययन मन्त्रालय द्वारा सचीव दिनश कुमार थपलिया के नेतृत्व में एक डेलिगेशन टर्की स्थित ऐनटालिया इन्टरनेशनल एयर सर्भीस नेगोसिएसन कार्यक्रम में २०१५ अक्टूबर १९ में भाग लेने हेतु पहुँचा था और जहाँ नया हवाई समझौता पाकिस्तान सहित अन्य देशों के साथ सम्पन्न हुआ था ।
इस में गौरतलव एवं आश्चर्य की बात यह है कि नेपाल पाकिस्तान के बीच इस से पूर्व भी हवाई उड़ान थी पर तब हपm्ते में ४ ही बार । अब इस नए समझौते के तहत हफ्ते में १९ उड़ान पाकिस्तान से नेपाल के लिए होगी ।
इतना ही नहीं अब से पहले नेपाल के अन्दर जितने अन्तर्राष्ट्रीय विमान बनकर खड़े होंगे या कहें उड़ान के लिए तैयार होंगे चाहे वो मधेस से जुड़ा हवाई अड्डा हो या पहाडी क्षेत्र वा हिमाल ही क्यों नहीं, इन सभी विमान अड्डा के अन्दर पाकिस्तान अपना हवाई जहाज सीधे कहीं भी उतार सकता है ।
बात साफ है कि अन्तरराष्ट्रीय त्रिभुवन विमानस्थल लगायत नेपाल में नव निर्माण के क्रम में रहे पोखरा अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल, भैरहवा अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल या चाहे बीरगंज के निजगढ विमानस्थल हो इन सभी को सुचारू एवं उदघाटन होने से पूर्व ही नेपाल सरकार ने जैसे पाकिस्तान को नेपाल के लिए रूट परमीट उपहार स्वरूप देने का मन बनाया लिया है ।
उल्लेखनीय यह है कि नेपाल का अन्तराष्ट्रीय विमान अड्डा पहले से ही सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील है । सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल का अन्तर्राष्ट्रीय त्रिभुवन विमान स्थल ने अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा मापदन्ड को सही से नहीं अपनाया है और न फिट कहा जा सकता है । आए दिन Þित्रभुवन विमान अड्डा पर पाकिस्तान नागरिक भारतीय जाली नोट सहित पकडेÞ जाने की खबर विभिन्न संचार माध्यमों में आती रहती है ।
इतना ही नहीं पाकिस्तानी और बंगलादेशी आतंकवादियों का प्रवेश भारत में जाने से पूर्व उनका प्रथम प्रवेश हवाई मार्ग होकर नेपाल के लिए होता है और फिर वहां से समतल भूभाग तराई मधेश होकर खुली भारतीय सीमा प्रयोग कर भारत में प्रवेश कर जाते हैं । फिर वे आतंकवादी भारत में विस्फोट से लेकर हाथ हथियार एवं अपने विभिन्न नापाक इरादों को अंजाम देते हैं । यह नेपाल के लिए भी उतना ही संवेदनशील है जितना कि भारत के लिए सुरक्षा दृष्टि से । हाल ही में इन्डियन मुजाहदिन के प्रमुख आतकंवादी यासिन भटकल सहित उनके साथियों को आइबी ने नेपाल के पोखरा में पकडा था और उसको भारत के जेल में रखा गया है ।
इसीतरह २०१३ में नेपाल ने अधिकारिक तौर पर आतंकवाद के खिलाफ पहली वार यह फैसला लिया था कि २२४ आंतकवादियों से जुड़े सभी और साथ में अलकायदा से जुड़े उन तमाम ६४ संगठनों की सम्पतियों पर नेपाल सरकार पूर्ण रोक लगाने की घोषणा की थी । इसीतरह नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के कानून का पालन करते हुए संदिग्ध आतंकवादियों व दाऊद इब्राहीम की चल व अचल संपत्तियों व बैंक खातों को फ्रिज (रोक) कर दिया था ।
इस तरह नेपाल में जहाँ पर चीन अपनी गतिविधियों को दूर–दूर तक फैलाए हुए है वहीं पाकिस्तान भी अपना नेटवर्क दिन प्रति दिन मजबूत करता दिख रहा है । चीन जहाँ इसके लिए नेपाल की भूमि प्रयोग करता दिख रहा है और आइ.एस.आइ को साथ में लेकर चल रहा है वहीं पाकिस्तान चीन के लिए नेपाल में जासूसी करने में जुटा है । आतंकवादी गतिविधियों को अजांम देने के लिए नेपाल का हवाई मार्ग प्रयोग करता है । उल्लेखनीय है कि यह थे्रट नेपाल–भारत के लिए सुरक्षा दृष्टि से बेहद खतरनाक हो सकता है । अतः इस पर समय से ही सचेत रहने की आवश्यकता है ।

 

 

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