भारत भी मधेश एक अलग देश के पक्ष में : केदारनाथ यादव

भारत भी मधेश एक अलग देश के पक्ष में, नेपाली उपनिवेश अन्त हो मधेश देश स्वतन्त्र हो

मनोज बनैता, १७ मई ।

10362517_1394101880900781_6844446217987531828_nस्वतंत्र मधेश गठबन्धन के प्रभावशाली एवं बहुप्रतिभाशाली नेता केदारनाथ यादव मधेश के अधिकार के लिए लड़ते लड़ते अपनी पूरी जवानी विता दिए मगर उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी । कहते है “बात” उन्हीं की होती है, जिनमे कोई “बात” होती है । जी हाँ नेता यादव में वो सारी बातें हैं कि उनके बारे में बात की जाए । यादव अपने बुढापे में है मगर उनके मधेश प्रति का जुनून अभी भी सर चढ़ के बोल रहा है । मधेश हित की अगर बात की जाए तो वो २५ वर्ष के युवक की भाँति अपने पुराने फर्म में आ जाते है ं। सच मायने में नेता यादव एक ऐसे युवा नेता हैं जिसके मार्गदर्शन से लाखों मधेशी युवा अभिप्रेरित है । स्वराजी श्री केदार यादव स्वतंत्र मधेश गठबन्धन के प्रखर नेता हैं । स्वतंत्र मधेश के लिए सिरहा मे जनमतसंग्रह करवाने के अभियोग मे नेपाल सरकार ने उनके उपर राज्य विप्लव का मुद्दा दायर किया है । सारा जीवन ऐसे ही मुद्दा झेलते रहे लेकिन मधेश मुक्ति की राह को नेता यादव ने अभी भी नहीं छोड़ा है ।

केदार बाबु के नाम से प्रचलित युवा नेता यादव २०६३÷६४ साल में सिरहा से शुरु हुआ मधेश आन्दोलन का एक हिसाब से महामहिम भी है । केदार बाबु सद्भावना परिषद् का संस्थापक मध्य के एक ऐसे नेता हैं जो गजेन्द्रबाबु के दाहिना हाथ के रूप में रह चुके हैं । गजेन्द्रबाबु राजनैतिक लबिइङ के लिए दिल्ली जाने पर हमेशा केदार बाबु को साथ में लेकर जाते थे । उसी क्रम में गजेन्द्रबाबु को तत्कालीन् भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सँग दिल्ली में सम्भवतः दूसरी या तीसरी बार भेट होने पर इन्दिरा गाँधी ने खुद ही कहा था कि मधेश को आजाद करो । गजेन्द्रबाबु ने नेपाल में मधेशी के उपर हो रहे विभेद की बात उठायी थी ।

सीमा क्षेत्र में जगह जगह पर विश्वविद्यालय और तालिम केन्द्र स्थापना करने की बात कही थी । जिसमे मधेशी को प्रशिक्षित किया जाता और तैयार होने के बाद स्वतंत्रता के लिए आगे बढ़ता । गान्धी जी की इतनी बात सुनने के वाद गजेन्द्रबाबु और केदार बाबु बहुत सन्तुष्ट हुए । गान्धी जी ने कुछ ठोस कार्यक्रम सबका अवधारणा भी दिया । बंगलादेशको उसी समय आजादी मिली थी ।

download (2)

लेकिन गजेन्द्रबाबु और केदार बाबु का सपना सपना ही रह गया क्युंकि बस कुछ दिन के बाद ही इन्दिरा गाँधी जी की हत्या कर दी गयी । उनकी असामयिक हत्या से गजेन्द्र बाबु और केदार बाबु बहुत मर्माहत हुए । इंदिराजी की हत्या के बाद भारत की राजनीति ने कुछ अलग मोड़ ले ली और दोनो मधेशवादी योद्धा का हौसला जम गया । समय बीतता गया गजेन्द्र बाबु का भी स्वर्गारोहण हो गया । अकेले पड़ गए केदार बाबु पर उनमें वो जुनुन अभी भी बाँकी है । (केदार बाबु से हुई बात चीत का अंश)

Loading...
%d bloggers like this: