भारत में घुसने की काेशिश कर रहे हैं राेहिंग्याई मुसलमान सुरक्षा व्यवस्था चाैकस नेपाल काे भी रहना हाेगा चाैकन्ना

६ सितम्बर

एक तरफ से भारत की तमाम सुरक्षा एजेंसियों पहले से बसे रोहिंग्याई शरणार्थियों को वापस म्यांमार रणनीति बनाने में जुटे हैं दूसरी तरफ म्यंमार से हजारों की संख्या में नए शरणार्थी भारत में घुसने की तैयारी में है। इस बात की सूचना पिछले दो दिनों के भीतर भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिली है। यह भी एक वजह है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर फिलहाल नरमी बरतने के मूड में नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अपनी म्यांमार यात्रा के दौरान रखिन राज्य में जारी जातीय हिंसा के मुद्दों पर वहां की सरकार की चिंताओं को जायज ठहरा कर भारत की मंशा साफ कर दी है।

भारत सरकार के उच्चपदस्थ अधिकारियों ने बताया कि देश में रहने वाले लाखों रोहिंग्याई की समस्या और बढ़ जाएगी अगर भारतीय सीमा में और शरणार्थियों को घुसने से नहीं रोका जाए। सरकारी एजेंसियों पूरे हालात पर नजर बनाये हुए है। सीमा पर स्थिति राज्यों के साथ संपर्क भी रखा गया है। उक्त अधिकारियों के मुताबिक जो लोग म्यांमार से भाग रहे हैं अगर उन्हें एक बार यह सूचना मिल गई कि भारत के किसी हिस्से से उनके प्रवेश की छूट दी गई है या कोई कमजोर हिस्सा है जहां से वे घुस सकते हैं तो फिर बड़ी संख्या में शरणार्थी उसी तरफ मुड़ जाएंगे। ऐसे में कई स्तरों पर नजर रखी जा रही है। वैसे भी भारत यह साफ कर चुका है कि पहले से जो रोहिंग्या शरणार्थी भारत में रह रहे हैं उन्हें यहां पर हमेशा के लिए रहने की अनुमति देने की कोई मंशा नहीं है। भारत इन्हें वापस करने की प्रक्रिया शुरु कर चुका है। इससे जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है।

भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों का मामला वैसे अब राजनीतिक रंग ले रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र इसे धार्मिक आधार पर देख रहा है। जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह पूरी तरह से आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरु करना चाहता है। केंद्र की तरफ से पिछले महीने सभी राज्यों को एडवायजरी दी गई है कि वे रोहिंग्या शरणार्थियों की सही तस्वीर और संख्या बताये। हर जिले के जिलाधीश को यह सुनिश्चित करना है कि रोहिंग्या शरणार्थी को लेकर कानून सम्मत तरीके से कदम उठाये जाए।

भारत की चिंता कई बातों को लेकर है। सबसे पहले तो भारत की चिंता आतंरिक सुरक्षा को लेकर है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की सूचना मिली है कि कट्टरपंथी ताकतें इन शरणार्थियों के बीच पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा भारत यह नहीं चाहता है कि जिस तरह से पूर्व में बांग्लादेश से आये शरणार्थियों की वजह से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार के कई जिलों का जनसंख्या अनुपात बिगड़ गया वैसी स्थिति रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से पैदा हो।

भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से भी यह स्पष्टीकरण आ चुका है कि वह रोहिंग्या मामले पर पहले से शरणार्थियो को लेकर जो नियम है उसका पालन किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारत शरणार्थियों के खिलाफ नहीं है लेकिन कानून के तहत ही उन्हें रहने दिया जाएगा। कमोबेश यही बात गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने भी कही है। भारत की समस्या यह है कि जो शरणार्थी जो आ रहे हैं वे छोटी संख्या में नहीं है। नरमी दिखाने पर इनकी संख्या काफी बढ़ सकती है। जिस भी इलाके में उन्हें रखा जाएगा वहां के स्थानीय संसाधनों पर इसका दबाव बढ़ेगा। साथ ही स्थानीय लोगों के साथ तनाव की स्थिति भी पैदा होगी।

नेपाल काे भी इस अाेर अपना ध्यान देना हाेगा अाैर सीमाअाें पर अपनी चाैकसी बढानी हाेगी । नेपाल अाैर भारत की कई सीमाएँ अाबद्ध हैं अाैर एेसे में यह सम्भावना बढ सकती है कि वाे नेपाल में अाकर रहने की काेशिश करे ।

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