भारत शरणम गच्छामिः

व्यग्ंय ः बिम्मीशर्मा
om1 pm५ महीने तक जिस पड़ोसी भारत को नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली पानी पी–पी कर कोस रहे थे । अंत में उसी भारत के शरण में ही जाना पड़ा । ५ महीने तक बड़ी अकड़ दिखाई न झुकने और टूटने की पर अचानक वह सारी अकड़ कहां रफू चक्कर हो गई ? देश के नागरिकों को इन ५ महीनाें में राष्ट्रवाद के नाम पर पहाड़ी और नेपाली मे बांट कर अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाले पिएम ओली किस विना पर भारत शरणम गच्छामिः हो गए ?
नाकाबंदी का बहाना बना कर कालाबजारियों को देश में समानान्तर सरकार चलाने की खूली छूट दे दी । अपने पहलू में टहलने वाले चापलूसों और पार्टी के कार्यकताओं को इसी बहाने पैसे कमाने का विकल्प दे कर पिएम ओली ने देश की जनता को महंगाई की आग में झोंक दिया । भारत से कन्नी काट कर चीन के नजदिक हुए । चीन से अनुदान में तेल आयात कर महंगे दामों मे सरकार ने बेचा । ईन्डक्सन चूल्हे भी चीन से ले आए गए । इसे भी भारतीय इन्डक्सन चूल्हे से दोहरे दामों पर बेचने वाली ओली और उनकी सरकार आखिर में भारत के शरण में चली ही गई ।
पिएम बनने के बाद ओली इसी उहापोह में डूबे रहे कि चीन की राजकीय भ्रमण करें या भारत की । चीनी कम्यूनिष्टो के विचारों से नजदीक और अपनी हर बिमारी और दुख में भारत की ओर ताकने पाले ओली नें आखिर में मन मसोस कर भारत भ्रमण करने का फैसला किया । सफेद झूठ बोलने मे माहिर ओली ने भारत भ्रमण मे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नेपाल और भारत के वीच विद्यमान सभी असमझदारी हटने की एलान की । पर नेपाल की जनता तो अभी भी तेल और गैस के लिए घंटो लाईन में बैठ रहे है । पर यह तेल और गैस गधे के सिर से सींग की तरह गायब हैं ।
पिएम ओली अपने हर भाषण में देश से लोडसेडिगं हटने और घटने का नाम लेते थे । वह हवा और सौर्य उर्जा से बिजली उत्पादन करके देश का अंधकार मिटाने की बात करते थे । पर हवाईकिले बनाने में और सचमुच का किला बनानें में बहुत अंतर है । ओली के मन के भीतर की बात भला कोई जान सकता है भला ? भारत जा कर अपनी सौर्य उर्जा और हवा से निकलने वाली बिजली को हाईड्रो पावर मे कन्भर्ट कर दिया और समझौता कर लिया ६ सौ मेगा वाट बिजली भारत से आयात करने की । कहीं दिमाग से सठियाए ओली दिल्ली से डाईरेक्टर नेपाली जनता के किचन के लिए गैस की पाईप लाईन बिछाने का समझौता ही न कर बैठें ?
पहले उसी आदमी या देश को लतियाना और खदेड़ना और बाद में उसी के पैरों मे पड़ कर गिड़ गिड़ाना, यह निर्लज्जता की पराकाष्ठा है जो हम पिएम ओली के नाम पर देख और सुन रहे हैं । नेपाली मीडिया ओली का इतना जय गान कर रही है की भारत में आजतक किसी नेपाली पिएम को इतना मान सम्मान नहीं मिला जितना पिएम ओली को । पेट में ओली और नेकपा एमाले का दिया हुआ हड्डी जो कुलबुला रहा है, तो वही हड्डी न सब करवाएगा पत्रकारों से ।
पिएम ओली बड़ा ही राष्ट्रवाद और देशप्रेम का भजन गाते रहते थे । उनका देशप्रेम उस समय कहां चला गया जो उन्होने फागुन ७ गते प्रजातंत्रदिवस के ही दिन भारत भ्रमण करने की ठानी । एकदिन देर कर के भी तो जा सकते थे क्या कभी भारतीय पिएम नरेन्द्र मोदी १५ अगस्त या २६ जनवरी के दिन दूसरे देशों के भ्रमण पर जाते ? कभीनहीं, देशप्रेम इन्ही सब बातो से आंका जाता है मिस्टर ओली । है आप में देशभक्ति का वह जज्बा ? आप तो भारत भ्रमण के बीच में ही पड़ने वाला आपका जन्मदिन को बड़े ही धूमधाम से दिल्ली मे मना कर हमेशा के लिए यादगार बनाना चाहते हैं । क्या पता अगले साल राजनीति का यह मौसम और यह ठाठबाट रहे या न रहे ? या अगले साल तक पूर्व प्रधानमंत्री सुशिल कोईराला आपको भी शतरंज खेलने के लिए उपर ही बुला ले ?
पिएम ओली को मालूम है कि राजनीति के मैदान में कभी भी कुछ भी हो सकता है ? इसीलिए वह राजनीति की बिसात पर कोई भी गलत चाल नहीं चलना चाहते । इसीलिए सोच समझ कर ही उन्होंने भारत की राजकीय भ्रमण करने की सोची । भारत से रोटी बेटी का ही नहीं तेल, गैस और नमक और कपडे का भी पुराना रिश्ता है । वह किस–किस रिश्ते को कहां–कहां तोडेÞगें और नए रिश्तो को कहां ले जा कर जोड़ेंगे ?ओली को मालूम है देश की जनता उन के शासन और व्यवहार से तगं आ चुकी है । अब भी ढीठ की तरह अकड़े रहे और थोडा सा भी न झुके तो पाशा पलट सकता है । सियासत की बाजी अगर उनके विरोधियों के खेमें मे चली गई तो उनका ही तख्ता पलट सकता है ।
इसीलिए और जोखिम न लेते हुए आज्ञाकारी छोटे भाई बन कर बडेÞ भाई भारत का चरण स्पर्श करने ओली महोदय को जाना ही पड़ा । क्योंकि ऊंट को अपनी उँचाईं का बड़ा ही अकड़ होता है । उंmट को लगता है कि दुनिया में उस से लंबा और उंचा कोई भी नहीं है । पर जब ऊंट पहाड़ से टकराता है तो उसे अपनी लघुता का आभास होता है । हमारे पिएम ओली महाशय भी वही ऊंट है जिस को लगता है कि उस के जैसा मुहावरा बोलने और भाषण देने वाला बड़बोला राष्ट्रवादी नेता कोई नहीं है । पर उनकी मिमियाते राष्ट्रवाद ने सर पर गिर रही अभावों के आसमान को अपने थक चूके पैरो से न थामने की जिद पकड़ ली है । अब बेचारा मरता क्या न करता ? ओली ने भी हतियार डाल दिए और हो गए भारत शरणम गच्छामिः ।
साढे २५ सौ साल पहले राजकुमार सिद्धार्थ ज्ञान की खोज में भारत शरणम गच्छामिः हुए थे । और अभी अपने द्धारा उत्पन्न सभी समस्याओं के “समाधान” और खुद के तथाकथित “मान” के लिए पिएम ओली भी भारत शरणम गच्छामिः हुए हैं ।

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