भारत समर्थक मधेशी को नयां पार्टी में कोई स्थान नहीं

काठमांडू, १८ मई । पूर्व एमाले तथा माओवादी केन्द्र से सम्बद्ध नेताओं का एक पहचान है– राष्ट्रवाद । अभी दोनों पार्टी एक हो गया है । नवगठित नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के नेताओं ने पड़ोसी देश भारत को विरोध करके ही ‘राष्ट्रवादी’ पहचान बनाया था । विशेषतः नाकाबन्दी के समय में भारत को विरोध करनेवालों को ही यहां ‘राष्ट्रवादी’ नेता के रुप में देखा जा रहा है । एमाले–माओवादी एकीकरण प्रक्रिया में भी उक्त ‘राष्ट्रवादी’ छवी को कायम रखने का प्रयास किया गया है । जिसके चलते मधेश आन्दोलन के वक्त आन्दोलनकारियों को समर्थन करनेवाला एमाले–माओवादी मधेशी नेताओं को नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी ने कोई भी स्थान नहीं दिया गया है ।


नव गठित पार्टी की ९ सदस्यीय हाइकमाण्ड में तो एक भी मधेशी नहीं है । लेकिन ४५ सदस्यीय केन्द्रीय कमिटि में भी मधेशी समुदाय के नेता नगन्य दिखाई दिया है । वहां सिर्फ सत्यनारायण मण्डल और मातृका यादव हैं, जो क्रमशः एमाले और माओवादी केन्द्र से प्रतिनिधित्व करते हैं । नयां स्थायी समिति में सिर्फ मण्डल और यादव को ही स्थान देने का मतलव है, नवगठित नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी अपनी ‘राष्ट्रवादी’ छवी में कोई भी सम्झौता नहीं करेगी । कुछ मधेशी विश्लेषकों का मानना है कि भारत की प्रशंसा करनेवाले बहुत नेता पूर्व एमाले और माओवादी में थे, लेकिन नव गठित पार्टी ने उन लोगों को अपनी हैसियत दिखा दी है । स्मरणीय है, मधेशी मोर्चा के नेतृत्व में की गई तीसरे मधेश आन्दोलन के दौरान एमाले के कई नेताओं ने भी साथ दिया था और वे लोग नाकाबन्दी के पक्ष में थे ।
विश्लेषकों का मानना है कि उस वक्त नाकाबन्दी के पक्ष में रहनेवाले और राष्ट्रीयता के पक्ष में अपनी मूंह बन्द करनेवाले नेताओं को अभी आकर बदला लिया गया है । जिसके चलते पूर्व एमाले और माओवादी के नेता नव गठित पार्टी के नेतृत्व के प्रति असन्तुष्ट दिखाई दिए हैं, यद्यपि उन लोगों ने भी पार्टी एकता को स्वागत किया है ।

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