भूकम्प: सामान्य, राजधानी के नागरिकों ने राहत की सांस ली

tent-1रामाशीष, काठमांडू, 29 अप्रैल। पिछले चार दिनों से भूकंपग्रस्त नेपाल की जनता, खासकर राजधानी के नागरिकों ने आज दो पहर बाद राहत की सांस ली और हजारो राजधानीवासी, सड़कों के किनारे, छोटे-बड़े मैदानों एवं खाली स्थानों पर खड़ा किए गए हजारो प्लास्टिक-त्रिपालों से बाहर आ गए।
लगभग साढ़े 4 बजे राजधानी का हृदय रानीपोखरी, रत्नपार्क, टूंडीखेल, शहीद गेट, न्यू रोड गेट, बसन्तपुर, खींचापोखरी, सुनधारा, धरहारा (नेपाल का मीनार) तथा महांकाल (वीर अस्पताल) क्षेत्र का दौरा करने के बाद पाया गया कि भारी संख्या में गाडि़यां सड़कों पर आ चुकी थी। भारी संख्या में लोग भूकंप से हुई क्षति का जायजा लेने तथा भूकम्प से ध्वस्त धरहरा, ऐतिहासिक नारायणहिटी राजदरबार, टूंडीखेल मैदान गेट को देखने के लिए बाहर आ चुके थे।
फिर भी, ऐतिहासिक दरबार हाई स्कूल के भग्नावशेष के सामने रानी पोखरी किनारे की रेलिंग से जोड़े गए त्रिपालों में शरण लिए हुए लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं दिखायी दी। टूंडीखेल के शाही सैनिक मैदान में खड़ा किए गए तम्बू प्रायः खाली दिख रहे थे क्योंकि उनमें बसें लोगों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए तम्बुओं से बाहर आ चुके थे। उनका आरोप था कि पिछले चार दिनों में सरकार ने उनकी सुधि नहीं ली, न तो पानी का एक बोतल दिया और नही बिस्कुट का कोई पैकेट।
भारत सरकार के प्रेस एवं सूचना प्रथम सचिव तथा भारतीय राजदूतावास के प्रवक्ता अभय कुमार ने बताया कि अभी लगभग 15 हजार भारतीयों को निःशुल्क और सुरक्षित रूप में भारत पहुंचाया जा चुका है। इनमें 8000 लोगों को बसों द्वारा भेजा गया जबकि 5000 भारतीय विमान द्वारा नई दिल्ली भेजे गए। अब ‘नाॅरमल्सी‘ आ चुकी है जिसका प्रमाण है, रिंग रोड पर गाडि़यों की भारी जाम होना। tent-2
उन्होंने बताया कि भूकंपग्रस्त क्षेत्रों में राहत तथा बचाव कार्य के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पौन्स फोर्स (एन.डी.आर.एफ.) के लगभग एक हजार विशेषज्ञ पिछले चार दिनों से युद्धस्तर पर कार्यरत हैं। इनमें डाॅक्टर, इंजीनियर, आपदा निवारण विशेषज्ञ तथा भूकम्पग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने में मदद करनेवाल अनुभवी लोग शामिल हैं।
दूतावास प्रवक्ता अभय कुमार के अनुसार भारतीय टीम पाटन, स्वयंभू तथा भक्तपुर के विभिन्न स्थानों पर मलवे की ढेर में दबे 71 लाशों तथा 11 जीवित व्यक्तियों को बाहर निकाला है। इसी प्रकार भारत के दो फील्ड हाॅस्पिटल कार्यरत हैं – एक सिनामंगल तथा दूसरा लगनखेल में। राहत के सिलसिले में अभी तक 1000 टन राहत सामग्री पहुंचायी जा चुकी है जिसमें दबा, भोजन पैकेट, पानी, सफाई सामग्री किट आदि शामिल है। अभय कुमार के अनुसार राहत सामग्री तथा बचाव टीमों को 15 एम आई 17 हेलीकाॅप्टरों सहित 25 विमानों का योगदान लिया गया है। s
इसी बीच नेपाल के तराई क्षेत्र से जुड़ी बिहार की सीमा से मिली खबरों में बताया गया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार खुद सीतामढ़ी में कैम्प कर रहे हैं और वहां से रोज 5000 हजार पैकेट भोजन सामग्री नेपाल के अधिकारियों के द्वारा भूकंपग्रस्त क्षेत्रों में भेजवा रहे हैं।
समाचार लिखते-लिखते भी झटका महसूस हुआ है, इसलिए आज भी रोज की तरह सड़कों के किनारे शरण लेनेवालों की संख्या में कमी नहीं होने की संभावना है।

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