भूखे रहिए बुद्धु बने रहिए-:

अनुवादकः प्रा. वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र

-एप्पुल कम्प्युटर के सह संस्थापक तथा पर्ूव कार्यकारी अधिकारी रहे स्टीब जौब्स का देहवसान ५ अक्टुबर २०११ को हुआ है। यह अनुवादित लेख उनके द्वारा ५ जुन २००५ को अमेरिका के स्टेन्डफोर्ड विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह के सुअवसर पर दिया गया दीक्षान्त भाषण है। इन दिनों स्टीब जौब्स के बारे में जितना लिखा गया है, उतना बहुत ही कम लोगों के बारे में लिखा गया है। यह लेख युवा वर्ग के लिये अत्यन्त ही उपयोगी है। अतः इसे अवश्य पढेÞ और मनन करें
-अनुवादकः प्रा. वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र)

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विश्व के सर्वोत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में एक इस विश्वविद्यालय में आप लोगों के बीच अपने को पाकर मैं गौरवान्बित हुआ हूँ। मैंने कभी भी किसी काँलेज से स्नातक नहीं बना। सत्य तो कहना ही पडेगा- काँलेज के दीक्षान्त समारोह के इतने निकट मैं कभी नहीं हुआ था। आज आप लोगों को मैं अपने जीवन से सम्बन्धित तीन कथाएँ सुनाना चाहता हूँ। पहली कहानी जीवन के विभिन्न विरामों वा विश्रामों -डाट्स) से सम्बन्धित है।
रीड काँलेज का मेरा पहला ६ महीनों का अध्ययन पूरा होने के पर्ूव ही मैंने पर्ढाई छोड दी। परन्तु पर्ूण्ा रुप में पर्ढाई छोडने के पर्व १८ महीनों तक काँलेज में मेरा आना-जाना जारी रहा। अब प्रश्न उठता है, मैने अपनी पर्ढाई क्यों छोडी – इसकी शुरुवात मेरे जन्म लेने से पहले हो गई थी। मेरी माँ एक अविवाहिता युवती के रुप में एक काँलेज के स्नातक कक्षा की छात्रा थी तथा मुझे गोद लेने वाले किसी दम्पत्ति की तलास में वे थी। उनकी प्रवल इच्छा थी कि मुझे कोई स्नातक दम्पत्ति गोद ले। मेरे जन्म होने के बाद एक वकील साहेब एवं उनकी पत्नी गोद लेने को तयार थे और करीब करीब सभी बातें मिल गई थी सिवाय उसके कि उन दोनों ने किसी लडकी को गोद लेने का निश्चय किया। अतः मुझे गोद लेने की प्रतीक्षा सूची में प्रतीक्षा कर रहे दूसरे दम्पत्ति ने टेलीफोन से यह सन्देश पाया कि एक लडका जन्म लिया है। क्या उसे आप लोग गोद लेने के लिए तैयार है – उन लोगों ने कहा- अवश्य। जब मुझे जन्म देने वाली माँ को यह ज्ञात हुआ कि मुझे गोद लेने वाली माँ ने न तो किसी काँलेज की शिक्षा प्राप्त की है और न मेरे होने वाले पिता ने ही किसी उच्च स्कूल की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने गोद लेने के लिए तैयार किए गए कागजों पर अपना हस्ताक्षर करने से अस्वीकार कर दिया। बाद में उन लोगों के इस प्रतिज्ञा पर कि वे लोग मुझे काँलेज की शिक्षा अवश्य दिलाएँगें,  मेरी जैविक माँ ने अपनी सहमति प्रदान की।
मैं वास्तव में १७ वर्षके बाद काँलेज पहुँचा। लेकिन मुझ में ऐसा कई विचार नहीं था कि मैं जीवन में क्या करना चाहता हूँ और इस में यह काँलेज किस तरह सहायक होगा। …… तो मैं अपने माता-पिता द्वारा उनके जीवन में आर्जन किया हुआ धन खर्च कर रहा था। अतः मैंने अपनी पढर्ाई छोडÞने का निर्ण्र्ाालिया और इस आत्मविश्वास के साथ निर्ण्र्ाालिया कि मुझे अपना रास्ता मुझे स्वयं बनाना है। उस समय यह निर्ण्र्ााएक भययुक्त निर्ण्र्ााथा। परन्तु, जब मैं पिछे मुडकर देखता हूँ तो लगता है कि वह निर्ण्र्ाामेरे जीवन के अच्छे निर्ण्र्ााें में एक था। अपनी पढर्ाई छोडने के साथ ही मुझे अपनी उन कक्षाओं में जाने से मुक्ति मिल गयी, जिस कक्षा में मेरा मन नहीं लगता था। और जिन कक्षाओं में मन लगता था, उन कक्षाओं में मैंने जना शुरु कर दिया। यहाँ तक कि अपनी जिज्ञासा एवं अन्तर अनुभूति के आधार में मुझे जो कुछ लगता था, वह मेरे लिए अमूल्य सिद्ध हुआ। इसका एक उदाहरण मैं आप के समक्ष प्रस्तुत करता हूँ। रीड काँलेज इस देश में शायद सुलेखन विषय में सबसे अच्छी पढर्ाई प्रस्तुत करता है। अध्ययन छोडने के बाद मुझे सामान्य कक्षाओं में जना नहीं पडÞता था, मैने सुलेखन की कक्षा में जाने का निर्ण्र्ाालिया। मैंने टाइप के अक्षरों के ऊपरी हिस्सो एवं निचले हिस्सों में प्रयोग में आनेवाली छोटी-छोटी रेखाओं के बारे में शिक्षा ली। साथ ही विभिन्न अक्षरों के समूह के बीच की दूरियों के बारे में भी मैं ने अध्ययन किया, जो सुलेखन को महत्वपर्ूण्ा बनाता है। यह सुन्दर था, ऐतिहासिक और कलात्मक रुप में सुक्ष्म इस अर्थ में था कि इसे विज्ञान प्राप्त कर नहीं सकता था। और यह मुझे काफी आकर्ष लगा। मेरे जीवन में इनका प्रयोग कभी हो सकता है किसी ने कभी आशा नहीं की होगी। लेकिन १० वर्षके बाद जब मैने मेसिन्टोस कम्प्युटर को एक आकार दे रहा था, ये सब मेरे लिए वापस आ गये और इन सबों को मैं ने मेसिन्टोस में प्रयोग किया। सुन्दर अक्षरों युक्त यह पहला कम्प्युटर बना। यदि मेंने उस एक पाठ्यक्रम को अध्ययन किया नहीं होता तो मेसिन्टोस कभी भी बहुआयामी टाइप के आकार और समानुपातिक रिक्त स्थान युक्त विशेष अक्षर युक्त -फोन्ट) बन नहीं सकता था। यह सत्य है कि असम्बन्धित विरामों के बीच के तारतम्य को देखना काँलेज के जीवन में असंभव था। लेकिन कुछ दिनों के बाद पिछले मुडÞकर देखने के बाद ये सब स्पष्ट हो जाते हैं। पुनः अनुवर्ती वा भविष्य इंगित करने वाली घटनाओं के बीच तारतम्य हम नहीं देख सकते हैं। इन घटनाओं को बाद में पिछे मुडÞकर देखने के बाद ही हम उन्हें सम्बन्धित कर सकते हैं। अतः आप को इसे विश्वास करना होगा इन विरामों में भविष्य में किसी न किसी प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है। आप को इन में से आपकी क्षमता, भाग्य, जीवन, कर्म या जो कहें किसी न किसी में विश्वास करना ही पडÞेगा। यह दृष्टिकोण ने मुझे कभी भी पीछे नहीं छोडÞा, नीचे नहीं गिराया और मेरे जीवन में सभी प्रकार का परिवर्तन लाया।
मित्रगण, मेरी दूसरी कहानी मेरे प्रेम और हानी के बारे में है। मैं भाग्यमान था- जीवन के प्ररम्भ में जिसे करने में मुझे प्रेम था, उसे मैंने किया। बुज और मैंने एप्पुल की शुरुवात अपने माता-पिता के गैरेज में की, जब मैं २० वर्षका था। हमने कडÞा परिश्रम किया और १० वर्षके दरम्यान हम दोनों ने जो एक गैरेज में शुरु किया, वह एप्पुल आज दो सौ करोडÞ डालर की कम्पनी में परिणत है, जहाँ चार हजार लोग कार्यरत हैं। अच्छा, एप्पुल के विकास होने के बाद हमने एक व्यक्ति को जिसे हमने बुद्धिमान समझा था, मेरे साथ मिलकर कम्पनी को ठीक से चलाएगा, नियुक्त किया। करीब-करीब एक वर्षतक उसने ठीक से काम किया लेकिन भविष्य के प्रति हमारे दृष्टिकोण में भिन्नता दिखाई पडÞने लगी और हमारे बीच बिबाद शुरु हो गया। हमारे बोर्ड के निर्देशकों ने उस का साथ दिया और ३० वर्षकी उम्र में मैं वहाँ से बाहर हो गया। पूरे र्सार्वजनिक रुप में मै बाहर हुआ। मेरे वयस्क जीवन का जो केन्द्र बिन्दु था, वह सब छूट गया। यह मेरे लिए र्सवनाश था।
कुछ महीनों तक अब मैं क्या करु, कुछ जान नहीं पाया । मैं पर्ूण्ा र्सार्वजनिक रुप में एक असफल व्यक्ति था। और इस उपत्यका से भागने का सोचा था। लेकिन धीरे-धीरे मेरे ऊपर बाहर से कुछ आने लगा। अभी भी उसे प्रेम करता था, जो मैंने किया था। मुझे बाहर कर दिया गया था। परन्तु जिस से अभी भी प्रेम था, उसे मैंने पुनः प्रारम्भ किया। एप्पुल का निष्कासन यह मैंने उस समय कभी नहीं सोचा था कि मेेरे लिए सबसे अच्छी बात के रुप में परिणत होगी, जो मेरे लिए कभी भी नहीं हो सकती थी। मेरी सफलता की गम्भीरता को मेरी नयी सिखने की हल्कापन ने विस्थापित करते हुए मुझे अपने सब कामों में पर्ूण्ा विश्वस्त नहीं होने लायक बना दिया। इस ने मुझे मेरे जीवन काल के सब से अधिक क्रियाशील अवस्था में पहुँचन के लिए स्वतंत्र बना दिया। दूसरे वर्षमें मैने नेकस्ट ९ल्भहृत्० नाम की कम्पनी शुरुवात की और दूसरे पीक्सर कम्पनी भी खोली। और उसी वर्षएक अत्यन्त आकर्ष स्त्री से प्रेम में बंध गया, जो बाद में मेरी अधर्ाीगंनी बनी। पीक्सर ने विश्व का कम्प्युटर द्वारा बनायी गयी ऐनिमेटेड फिचर फिल्मी की शुरुवात की, जो फिल्मों की कथा एवं विश्व का सबसे सफल एनिमेशन स्टुडियों के रुप में स्थापित हुआ। घटना में स्पष्ट परिवर्तन और एप्पुल कम्पनी ने ९ल्भहृत्० को खरीद लिया और मैं पुनः एप्पुल कम्पनी में वापस लौटा और ९ल्भहृत्० में जिस तकनिकी को हम लोगों ने विकास किया था, वह आज एप्पुल के पुनर्जागरण के हृदय में स्थापित है और लोएरेन्स और मैं एक अद्भूत परिवार के रुप में साथ-साथ है। मुझे पूरा विश्वास है कि यदि मैं एप्पुल से बाहर नहीं निकाला गया होता तो ये सब घटनाएँ निश्चित रुप में नही घटती। दवा खाना डरावना होता है लेकिन मैं कल्पना करता हूँ कि रोगी को उसकी आवश्यकता थी। कभी-कभी जीवन आप के सर पर इँटो से मारता है। विश्वास खत्म मत करिए। मैं उस में पर्ूण्ा विश्वस्त हूँ कि एक बात जिसने मेरे जीवन में गति प्रदान की वह है मेरे अपने द्वारा किए गए कर्मों प्रति मेरा प्रेम। आप को यह खोजना पडेÞगा कि आप को प्रेम किस में है। यह आप के लिए उतना ही सत्य है, जितना कि आप अपने प्रेमी के लिए सत्य हैं। आप का काम आप के जीवन का अधिकांश भाग को पूरा किया होगा और सत्य रुप से सन्तुष्ट होने का एक रास्ता है, यह है कि आप जिस काम  को बडा समझते है उसे कर डालिए। सबसे बडा काम का मार्ग स्वयं द्वारा किया गया काम प्रति प्रेम ही है। यदि अभी तक आप को उस की प्राप्ति नहीं हर्ुइ है तो उस की खोज में लगे रहिए। स्थिर मत रहिए। हृदय की बातों की तरह जब आप को उसकी प्राप्ति हो जाएगी आप को उसकी जानकारी मिल जाएगी और किसी बडेÞ सम्बन्ध की तरह जैसे-जैसे वर्षों व्यतीत होंगे ये अच्छे और अच्छे होते चल जायेंगे। अतः जब तक उसे आप प्राप्त नहीं करते है, उस की तलास में लगे रहिए। स्थिर मत रहिए।
मेरी तीसरी कहानी मेरी मृत्यु के सम्बन्ध में हैं। जब मैं १७ वर्षका था, मुझे एक उद्धरण पढÞने को मिला, वह जो करीब-करीब इस प्रकार का था- यदि आप इस रुप में प्रत्येक दिन जिते है कि आज का दिन अंतिम दिन थे, तो किसी दिन आप पर्ूण्ा निश्चित रुप में ठीक सिद्ध होंगे। इसका प्रभाव मेरे ऊपर पडÞा और यह विगत ३३ वर्षों से है। मैं प्रत्येक दिन सुबह ऐना के सामने खडा होकर अपने से पूछता हूँ, ‘यदि आज का दिन मेरे जीवन का अन्तिम दिन है तो आज जो मुझे करना था क्या मैं उसे ही करना चाहुँगा -‘ और जब तक मेरा उत्तर ‘नहीं’ बहुत दिनों लगातार बना हुआ है तो मुझे ज्ञात होता है कि कुछ परिवर्तन की जरुरत है।
करीब एक वर्षपर्ूव मुझे क्यान्सर होने की पुष्टि हुयी। सुबह साढेÞ सात बजे मेरा स्केन हुआ और इसने स्पष्ट रुप में दिखाया कि मेरे पैंक्रियाज में मांसवृद्धि है। डाक्टारों ने मुझे बताया कि यह एक ऐसे खास किसीम का क्यान्सर है, जिसका उपचार संभव नहीं और मैं तीन से ६ महीने से अधिक जीवित रहने की आशा नहीं रखूँ। डाक्टरों की उसी पुष्टि के साथ मैं दिन भर रहा। उसी दिन देर संयमकाल मेरा आपसी -माँस की परीक्षा) की गई। मेरे क्यान्सर एक बिरले किसिम का पैंक्रिया का कैन्सर पता चला, जिसका उपचार शल्य चिकित्सा से सम्भव था। मेरी शल्य चिकित्सा की गई और अब मै स्वस्थ हूँ।
यह मेरी मृत्यु से अत्यन्त निकटतम रुप में आमना-सामना था और मैं आशा करता हूँ कि कुछ अधिक दशकों तक यह मेरे निकटतम रहेगा। इस रुप में उस तरह जीवित रहने के पश्चात मैं अब आप लोगों को कुछ विशेष निश्ंिचतता के साथ यह कह सकता हूँ कि तब मृत्यु उपयोगी तो था लेकिन एक शुद्ध बौद्धिक विचार था। कोई भी मरना नहीं चाहता है। वे लोग भी जो र्स्वर्ग जाना चाहते हैं, वहाँ जाने के लिए मरना नहीं चाहते हैं। और फिर भी मत्यु हम सबों के लिए गनतव्य है। कोई भी कभी भी इस से बच नहीं सका है। यह वैसे ही है, जिस रुप में इसे होना चाहिए क्योंकि मृत्यु संभवतः जीवन का सबसे सुन्दर एक मात्र आविष्कार है। यह जीवन के परिवर्तन का कारक तत्व है। यह पुरानों को हमेशा हटा कर नया के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। अभी आप नयाँ लोग है, लेकिन कुछ दिनों बाद, जो आज से बहुत दूर नहीं है, आप लोग भी धीरेधीरे पुराने होते जायेंगे और हटाए जायेंगे। इस तरह नाटकीय बनने में मुझे दुःख है, परन्तु यह सत्य है।
आप का समय सीमित है। अतः दूसरे का जीवन जीकर समय को बेकार मत करों। कर्ुतर्क के चंगुल में मत फंसिए, जो दूसरे के चिन्तन का परिणाम का जीवन है। अपने अन्दर की आवाज को दूसरों के विचार के हल्ला में मत डुबाइए और सबसे महत्वपर्ूण्ा बात यह है कि अपने हृदय और अन्तस्करण को अनुशरण करने की साहस रखिए। उन्हें किसी तरह से पहले से ज्ञात है कि असल में आप क्या बनना चाहते है। अन्य वस्तु गौण है।
जब मैं युवा था, तब एक आर्श्चर्यजनक प्रकाशन निकला था, जिसका नाम था ‘द होलअर्थ कैटलग’ यह स्टेवार्ट ब्राण्ड नाम के व्यक्ति द्वारा रचित था। जिसने एक कविता को रुप में इसे जीवन प्रदान किया था। यह पेपर बैक में गुगल जैसा ही था, जो स्वयं ३५ वर्षके बाद आया। यह अध्यात्मिक था, आदर्शवादी था। यह पवित्र और महान गति से ओतप्रोत था। अपना पाठ्यक्रम समाप्त होने पर अन्तिम अंक निकाल कर यह बन्द हो गया। अन्तिम अंक के पिछले पृष्ट पर किसी गाँव की सुबह की भडÞ का फोटो छापा था, जिसके नीचे ये शब्द लिखे थे, ‘भूखे रहिए, बुद्धु बने रहिए’ -स्टे हंगरी, स्टे फुलिस) ये उनके विदाईका सन्देश था, जब उन्होंने उसे बन्द किया।
अर्थात भूखे रहिए, बुद्धु बने रहिए। मैंने अपने लिए भी सदा यही इच्छा करता हूँ। अब आप आप लोग स्नातक होकर नयी शुरुवात कर रहे हैं, आप लोगों के लिए मैं यही चाहता हूँ, ‘भूखे रहिए, बुद्धु बने रहिए।’ आप सबों को बहुत-बहुत धन्यवाद।  

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