भ्रष्टाचार नियन्त्रण कैसे करें
एन के मिश्रँ

भ्रष्टाचार की परिभाषा विभिन्न प्रकार से की है । शाब्दिक अर्थ में भ्रष्टाआचरण -गलत कार्य) ही भ्रष्टाचार है । समाजिक, धार्मिक, प्रशासनिक, न्यायिक, आर्थिक प्रशासनिक मूल्य-मान्यता विपरीत किया गया काम-काज को ही भ्रष्टाचार कहते हैं । रिश्वत लेना और देना ही मात्र भ्रष्टाचार मात्र नहीं है, पदीय दायित्व के अलाबा कानून विपरीत काम-काज करवाना भ्रष्टाचार कहलाता है । सीधे शब्द में सरकारी बजेट अनियमितता करना-करवाना अर्थात सरकारी आर्थिक कार्य क्षेत्र में किए गए व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नियम विपरीत आर्थिक क्रिया-कलाप को भ्रष्टाचार कहते हैं । आखिर भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है – इस ओर ध्यान देने से आर्थिक विपन्नता और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए आर्थिक लाभ करना ही भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है । धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक क्षेत्र में किए गए भ्रष्टाचार पर चर्चा नहीं सुनने में आता है । राष्ट्रिय भावना, स्वाधीनता और क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुँचकर नेपाल असफल राष्ट्र के रुप में चर्चित होने लगा है । आमतैर पर नेपाली नागरिक समाज कहा करते है कि नेपाल में बहुत भ्रष्टाचार हो रहा है । वह ऊँच्चे स्तर से ही हो रहा है । नीचे स्तरसे किए/कारवाये गये भ्रष्टाचार ओर भ्रष्टाचारियों का संरक्षण उच्चे स्तरसे मिलने के कारण उँचे स्तर में भ्रष्टाचार होता है और होता रहेगा । भ्रष्टाचार नियन्त्रण होनेपर नीचे स्तर में आपसे आप नियन्त्तण हो सकता है । ऊँचे स्तर में कार्यरत कुछ ऐसे भ्रष्ट नेता और कर्मचारी हैं, जिससे कानून के दायरे में लाकर कारवाही करना/करवाना कठिन है । वैसे भी हमारे देश में भ्रष्टाचार में अपराध कसूर की मात्र मापन संयन्त्र, दक्षजनशक्ति स्रोत औरु धान का अभाव है ।
प्रचलित राज्य का कानून अनुसार व्यक्ति, संघ/संस्था, उद्योग, व्यापार पेशा व्यवसाय कर्मी, बैंक, वित्त-कम्पनी निकायों द्वारा देने योग्य कर राजश्व नहीं देता है, कम देता है, तो यह भी भ्रष्टाचार है । कर चुकाने का कर्तव्य सभी नागरिकों को दायित्व बोध कराना राज्यका काम है । नागरिक द्वारा दिये गये कर से राज्यका आर्थिक कार्य संचालन के लिए बजेट निर्माण होता है । बजेट खर्च नियन्त्रित और व्यवस्थित होने की प्रत्याभूति जनमानस में नहीं होने के कारण कर चुक्त कार्य में ह्रास हो रहा है । बिकसित कई देशों में कर देना प्रतिष्ठा का कार्य समझा जाता है । हमारे दशे में कर चुराना ही प्रटिष्ठा का विषय बन रहा है । कानून से कर किसी को छूट नहीं । नेपाल सरकार द्वारा निर्धारित कानून बमोजिम देने योग्य सभी प्रकार के कर नहीं देनेका काम करना भ्रष्टाचार है ।
वि.सं. २००८ साल में महालेखापालको कार्यालय गठन किया गया था । आज तक ऐसे निकायों से नेपाल का आर्थिक प्रशासन का कार्य क्षेत्र में उल्लेखित योगदान करेवाला प्रमुख निकाय कें रुप में परिचित श्री महालेखा नियन्त्रक का कार्यालय है । यह एक मात्र नेपाल का मन्त्रालय स्तरीय प्रथम कार्यालय के रुप में परिचित है । राष्ट्र लेखा पालन करने वालों लेखापालों का महालेखापाल के रुप में परिचित है । वि.सं. २०२७ साल से पहले राज्य आम्दानी, खर्च की सूचना प्रकाशन र्सार्वजनिक नहीं होता था ।
र्    वर्तमान अवस्था में इमान्दार, कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के दो ही विकल्प है, एक वह कार्यालय का वातावरण अनुसार भ्रष्ट बन जाए, दूसरा नोकरी से इस्तीफा देदें । पहला विकल्प चयन करने से भ्रष्ट आचरण प्रति दण्ड सजाय का भागी होने का डर, त्रासपर्ूण्ा जीवन बिताने के लिए बाधय बने । दूसरा विकल्प चयन करने से अपने भविष्य, स्वभिमानपर्ूण्ा जीवन-यापन करने में कठिनाई सहने के लिए तेयार रहें । इसलिए राज्य सरकार द्वारा इमान्दार, कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के काम करने का उचित वातावरण ओर सुरक्षा की कानुनी प्रत्याभूति देना आवश्य है । केन्द्र में अवस्थित नियन्त्रण निकाय में काम करने का और जैसा वातावरण है, वैसा अन्य जिलों में नहीं, इसलिए कहा गया है कि- “ठुलालाई चैन, सानालाई ऐन ।” जिलों में ऐसी कोई भी कार्यालय नहीं है, जहाँ अनियमितता नहीं होती है । व्यक्तिगत प्रतिशोधर्,र् इष्र्या भाव से हो वा भ्रष्टाचार विरुद्ध कर्तव्यनिष्ठ नागरिको की भूमिका निर्वाह करने के भाव से हो, अथावा नियंत्रण निकाय का स्वयं जानकारी वा सूचना प्राप्त हुआ हो, अनियमितता का उजुरी दर्ता होने से, करने करवाने से अनुसंधान कार्य होता है और दोषी देखे जाने पर दण्ड सजाय दिया जाता है । जिसपर उजुरी नही पडÞता, वह दण्ड सजाय का भागी नहीं होता है, तो यह कर्मचारी प्रति राज्यसरकार द्वारा किया गया समानजनक न्यायोचित व्यवहार नहीं हुआ । और एक बात, जब सहायक कर्मचारी अपनी इच्छा शक्ति से सृजनशील कार्य कार्यालय प्रमुखों के आदेश, निर्ण्र्ााबेगर नहीं कर सकता है, तो सहायक कर्मचारी अनियमित कार्य में दण्ड सजाय के भागी क्यों – कार्यालय प्रमुख को सहायक फाँट वाला कर्मचारी से काई भी सरकारी कार्य सम्पादन में लिखित राय माँगकर राय अनुरुप किया हो, और वह कार्य अनियमित हो गया हो तो सहायक कर्मचारियों को दोषी माना जा सकता है ।
नेपाल सरकार का संवैधानिक अंग अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग द्वारा सरकारी, र्सार्वजनिक, अर्द्ध सरकारी निकाय में की गई आर्थिक अनियमितता की जानकारी सूचना, उजुरी प्राप्त होने पर अनुसंधान कार्य होता है और दोषी देखे जाने पर सम्बन्धित निकाय या व्यक्ति के ऊपर विभागीय कारवाही के लिए पत्र सम्बन्धित निकाय में भेजता है । कसुर की मात्रा और परिणाम को मध्ये नजर राखते हुए नेपाल सरकार की तर्फसे विशेष अदालत में दोषी उपर मुद्दा दायर करके क्षतिपर्ूर्ति, दण्ड सजाय दिलवाने का काम करता है । पर अनियमिता रोकने एवं नियन्त्रण करने का नहीं करता है । अनियमितता नियन्त्रण के कार्य आर्थिक काम काज करने, करवाने वाला निकाय से ही प्रभावकारी हो सकता है । सरकारी आर्थिक निर्ण्र्ाा र्सार्वजनिक खरीद, ठेक्का, बोलपत्र स्वीकृति कार्य में राजनैतिक हस्तक्षेप हरके क्षेत्र में है । राजनैतिक तन्त्र और कर्मचारी तन्त्र बीच बैधानिक सन्तुलन नहीं होने के कारण हरके क्षेत्र में भ्रष्टाचार बढÞता जा रहा है । अन्ततः भ्रष्टाचार नियन्त्रण के लिए वर्तमान में प्रचलित बजेट, निकास खर्च और लेखा परीक्षण प्रणाली में समय सापेक्ष परिवर्तन करना आवश्यक है । आर्थिक कार्य क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्र सेवक कर्मचारियों पर दृश्य-अदृश्य रुप में राजनैतिक एवं प्रशासनिक दबाव, हस्तक्षेप, निष्पक्ष आर्थिक कानून का अभाव और सेवा सुरक्षा की प्रत्याभूति नहीं होने के कारण अनियमित रुप से भ्रष्टाचार बढÞ रहा है । िि
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