भ्रष्टाचार बिरुद्ध क्रियाशील बास द्वारा संविधानसभा को को सुझाव

IMG_0869नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ श्रावण ८ गते ।
नयाँ बनने वाला संविधान में सुझाव देने के लियें किया गया सार्वजनिक आह्वान बमोजिम भ्रष्टाचार बिरुद्ध क्रियाशील बास ने संविधानसभा को श्रावण ५ गते को सुझाव दिया है ।
१३ बंूदे लिखित सुझाव बास ने सभासद द्धए बादशाह बर्मा और सर्बत आरा खानम मार्फत संविधानसभा के नागरिक सम्बन्ध तथा संविधान सुझाव समिति मे भेजा है ।
नेपालगन्ज के भेरी प्राविधिक शिक्षालय के बहुउद्धेश्शीय हाल में आयोजित सुझाव संकलन कार्यक्रम में वह सुझाव पत्र बास के कार्यवाहक अध्यक्ष मन भण्डारी, कार्यकारी निर्देशक नमस्कार शाह, केन्द्रीय सचिव छविलाल सुनार और बा“के जिला के शाखा सचिव शम्भु शाही ने हस्तान्तरण किया था ।
पेश किया गया सुझाव पत्र में मस्यौदा संविधान”२०७२ को प्रस्तावना में पे्रस स्वतन्त्रता मात्र लिखा गया है पूर्ण प्रेस स्वतन्त्रता उल्लेख होना चाहियेें, धारा १०७ के उपधारा ३ न्े प्रेस स्वतन्त्रता पर अकुश लगाने को खोजा है वँदा सँसोधन करें, मौलिक हक में सुशासन अनुभुति करना पायें और सार्वजनिक सेवा सरल, सहज और पारदर्शी रुप में पायें हक सभी नेपाली को हो कहने की अलग वंूदा थप करने की उल्लेख है ।
इसी तरह सुझाव पत्र में राज्य के निर्देशक सिद्धान्त में नेपाल को भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने के लियें राज्य ने जवाफदेहिता, पारदर्शिता और सदाचारिता जैसे असल शासन के आधार स्तम्भ अवलम्बन करेने की बात उल्लेख होना चाहियें , संविधान के धारा ८५ में बमोजिम नेपाल सरकार के कार्यबिभाजन और कार्यसम्पादन नियमावली सार्वजनिक जानकारी के लियें प्रकाशित हो और इस अनुसार काम न हुआ तो स्वतन्त्र न्यायलय में प्रश्न उठाने के लियेें प्रावधान होना चाहियें, संवैधानिक पदाधिकारी की नियुक्ति करते समय न्यूनतम ५ बर्ष पहले तक राजनीतिक दल के सदस्य नही होना चाहियें उल्लेख होना चाहियें ।
धारा २३८.१ में उल्लेखित अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग का काम, कर्तव्य और अधिकार में अनुसन्धान, तहकिकात और अभियोजन करने की अधिकार कटौती किया गया है वह बंूदा सँसोधन करके अख्तियार को अनुचित कार्य और भ्रष्टाचार सम्वन्धि बिषय में अनुसन्धान, तहकिकात और अभियोजन करेने की बिद्यमान अधिकार को निरन्तरता सहित थप अधिकार सम्पन्न कराने की मा“ग सुझाव पत्र में रखा गया है ।
इस्ी तरह अदालत के न्यायाधीश, नेपाली सेना, संवैधानिक निकाय के पदाधिकारी, मन्त्रीपरिषद की निर्णय और नीजि क्षेत्र को अख्तियार के अनुसन्धान को दायरा में नही रखा गया धारा २३८.१ को प्रतिवन्धात्मक बाक्या“श पूर्ण रुप में हटाकर अख्तियार ने अनुसन्धान करने की व्यवस्था होना चाहियें, भ्रष्टाचार बिरुद्ध के कार्य को प्रभावकारी बनान के लियें अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग को सशक्त बनाने के लियें बंूदा थप करने की मा“ग भी बास ने किया है ।
धारा ३२ की सूचना के हक में प्रत्येक नागरिक को अपना व सार्वजनिक सरोकार की कोई भी बिषय की सूचना मा“गना और प्राप्त करने की हक होगी बंूदा को परिमार्जन करके सूचना मा“गे, प्राप्त करें , सूचना प्रवाह करें और सूचना प्राप्त नही हो तो कानुनी उपचार ढूढने की व्यवस्था होना चाहियें, इसके साथ राष्ट्रीय सूचना आयोग को संवैधानिक आयोगको हैसियत प्रदान करने की बंूदा थप करना चाहियें , सार्वजनिक पदीय जिम्मेवारी में रहे व्यक्तियों ने सम्पत्ति विवरण पेश करेने की प्रावधान संविधानम में ही उल्लेख करने के लियें सुझाव दिया है ।
बास ने दिया सुझाव पत्र के अन्त में सभी सार्वजनिक निकाय के पदाधिकारीयों को स्पष्ट आचारसंहिता निर्माण करके कार्यान्वयन होना चाहियें बात संविधान में उल्लेख होना चाहियें , राजनीतिक दलों की आय, व्यय विवरण पारदर्शी होना चाहियें , बार्षिक रुप में लेखापरीक्षण कराके उसका प्रतिवेदन सार्वजनिक कराना चाहियें , वह कार्य नही हुआ तो उस राजनीतिक दलों को खारेज करने की बात संविधान में उल्लेख होने की सुझाव दिया है ।

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