मझधार में फंसी झा की नैया पार्टी

कैलास दास:किसी समय तर्राई में एमाले के सबसे बड नेता के रुप में उभर रहे रामचन्द्र झा ने नेकपा एमाले और एकीकृत नेकपा माओवादी बीच पद की बारगर्ेर्निङ्ग को लेकर वे खुद उलझ गये हैं। हवा की तरह राजनीतिक क्षेत्र में उडने की लालसा ने उन्हे कहीं का नहीं छोड। कुछ दिनों से पार्टी भीतर ही स्थायी समिति के सदस्य पद को लेकर रुष्ट रहे नेता झा से कल्पना भी नहीं किया जा सकता था कि वो इतने उतावले होकर माओवादी में जाने की सोच बना सकते हैं –
एमाले महासचिवर् इश्वर पोखरेल के निकटतम रहे झा माधव कुमार नेपाल और झलनाथ खनाल के भी प्रिय पात्र थे। परन्तु पार्टी के वक्त उन नेताओं से तथा स्थानीय नेताओं से भी उन्होंने कोई सल्लाह नहीं लिया, ऐसा एमाले स्रोत ने बताया है।
धनुषा में क्षेत्र नं. १ और क्षेत्र नं. ७ को कब्जा करनेवाली एमाले पार्टी मधेश आन्दोलन के बाद

रामचन्द्र झा

रामचन्द्र झा

कुछ मत्थरता नजर आ रही है। क्षेत्र नं. १ एमाले के दिग्गज नेता रामचन्द्र झा के पकडÞ में रहा है तो क्षेत्र नं. ७ में शत्रुधन महतो की पकडÞ है। लेकिन एमाले के भीतर विभिन्न गुटबन्दी के कारण पार्टर्ीींक्रमणकाल से गुजर रही है। जिसका फायदा अन्य पार्टी माओवादी और काँग्रेस को प्रत्यक्ष रुप में नजर आ रहा है।
गठबन्धन के कारण एकीकृत नेकपा माओवादी के अध्यक्ष पुष्पकमल दहाल भी एमाले नेता झा को अपने पार्टी लाने के लिए झा के निवास तक पहुँचे थे। लेकिन बात कुछ उटपटाङ्ग होने के कारण दोनों पक्ष बीच की दूरी बरकरार रही। नेता झा एमाले में स्थायी समिति सदस्य नहीं बनाए जाने पर पार्टर्ीीे अलग रहने लगे थे तो माओवादी में सचिव पद नहीं मिलने पर उलझ गए।
एक कार्यक्रम में एमाले नेता झा ने र्सार्वजनिक भी किया, हम बामपन्थी विचारधारा के हैं और ये विचारधारा माओवादी से मिलती-जुलती है, इसलिए हम माओवादी में प्रवेश कर सकते हैं। वामपन्थी संघीयता चाहता है जो एमाले कभी भी नहीं स्वीकारेगा। मधेश और मधेशी को संघीयता चाहिए जो सिर्फमाओवादी ही दिला सकता है, इस लिए हम माओवादी में रहकर मधेश के हित एवं अधिकार के लिए लडÞेंगे। लेकिन पद की बारगर्ेर्निङ्ग को लेकर बात बन नहीं पाई। विशेष सूत्र के अनुसार एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्डÞ झा को अपने पार्टी प्रवेश कराने के लिए उनके निवास पहुँचे थे। प्रवेश मिति भी प्रायः तय हो चुकी थी।
इधर एमाले नेता झा ने, एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्डÞ धनुषा में आने से एक दिन पर्ूव, अपना इस्तीफा एमाले कार्यालय काठमाण्डू में दे चुके थे। परन्तु झा द्वारा एमाओवादी के सचिव पद के बार्गेनिङ्ग को लेकर बात आलटाल पर रुक गई।
नेपाल की राजनीति में किंग मेकर बनने के लिए किसी भी दल के लिए मधेश सबसे अहम मानी जाती है। यही कारण है कि सबसे बडÞे दलों के रुप में रहे नेपाली काँग्रेस, एकीकृत नेकपा माओवादी और नेकपा एमाले की राजनीतिक पृष्ठभूमि मधेश रही है। अभी एमाओवादी के आगे काँग्रेस की राजनीति कमजोर दिखती है तो एमाले में संक्रमणकाल चल रहा है। अर्थात् एमाले मधेश में अपना बचर्स्व नहीं बनाने के कारण डÞुबती नैया जैसी दिखती है। शायद एमाले की मधेश में डÞुबती नैया को नेता झा ने अच्छी तरह भांप लिया है। अतः वे अपना बर्चस्व बचाने के लिए एक ओर एमाले में रोब दिखा रहे हैं तो दूसरी तरफ माओवादी में जाने की घुडÞकी। र्
वर्तमान में देखा जाए तो एमाले नेता झा ने जिस बेग से हवा में उडÞने की चेष्टा की है उतना ही उनका कद छोटा हो चुका है। लेकिन जिस पार्टर्ीीे उन्हे केन्द्रिय सदस्य से लेकर स्थानीय विकास मन्त्री तक का पद दिया हो, उस पार्टी द्वन्द्व मचाकर किताना अच्छा किया है वो अब स्वयं समझ रहे होंगे। अब उनके पास एक ही विकल्प है कि फिर से एमाले में अपना विश्वास जगावें।
एमाले स्रोत के अनुसार झा वामपन्थी के अवसरवादी नेता हैं। संघीयता का बहाना बनाकर दूसरी पार्टी राजनीतिक हाइट बढÞाने के लिए ही उन्होंने इतना नखरा किया है। एमाओवादी में जाने से उनका हाइट कम हो सकता है, बढÞने की उम्मीद तो नहीं है।
नेपाल का र्सवशक्तिशाली दल के रुप में एकीकृत नेकपा माओवादी है, और अगला निशाना उसका मधेश ही है। एक कार्यक्रम में एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्डÞ ने खुलकर कहा कि ‘हमारी राजनीति की पृष्ठभूमि मधेश है, और हम मधेशी बनकर मधेश से ही चुनाव लडÞेंगे। शायद इसी के तहत उन्होंने सबसे पहले एमाले नेता रामचन्द्र झा, जो मधेश का शक्तिशाली नेता माने जाते है, उन्हे अपनी पार्टी लाने का प्रयास जारी रखी है।
लेकिन एक व्यक्ति के जाने से मात्र कोई खास फरक नहीं पडÞ सकता। एक समूह लेकर जाने पर झा का व्यक्तित्व प्रभावशाली दिखेगा। झा के खास सहयोगी शत्रुघ्न महतो, योगनारायण यादव और श्रीप्रसाद साह ने एमाले में ही रहने का निर्ण्र्ाालिया है। विद्यार्थी नेता सब भी उनके साथ जाने की स्थिति में नहीं है। हाँ, जनता में उनका प्रभाव है। लेकिन, अपनी जमात के बिना सिर्फनेता के पार्टर्ीी्रवेश से पार्टर्ीीो क्या फायदा होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
अब देखना यह है कि एमाले नेता झा एमाओवादी में जा कर अपनी राजनीतिक हाइट बढÞाएंगे या एमाले में रहकर अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा बरकरार रखते है !
इस प्रकार यूएमएल के नेता रामचंद्र झा का बहुचर्चित माओवादी पार्टर्ीीे प्रवेश अभी अनिश्चितता में डूब गया है। इधर माओवादी के अध्यक्ष प्रचण्ड भी झा को पार्टी एक वरिष्ठ पद प्रदान करने में पार्टर्ीीे वरिष्ठ सहयोगियों सहमत नहीं कर पाए। पार्टर्ीीी केद्रीय समिति की बैठक में झा को पार्टी दिये जाने वाले पद के बारे में कोई भी निर्ण्र्ाानहीं लिया जा सका। माओवादियों के कुछ मधेशी नेता ने झा को शर्ीष्ा पार्टर्ीीद प्रदान करने पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है।
मधेश आधारित माओवादी नेताओं द्वारा आपत्ति के बाद झा जनकपुर में पार्टी आयोजित समारोह में शामिल नहीं हो पाये थे जहाँ अध्यक्ष दहाल खुद उनके स्वागत के लिये मौजूद थे। माओवादी केद्रीय समिति के सदस्य रामरिझन यादव ने कहा है कि यह एक अच्छी बात नहीं है कि पार्टी शामिल होने से पहले पद के लिए सौदा किया जाए। उन्होंने कहा कि झा को पहले केंद्रीय समिति में शामिल होना चाहिए फिर वाद मे हम उनको पार्टी पद दिलाने के लिए लडÞ सकते हैं।
यादव के अनुसार इसमें कोई शक नहीं है कि वे उस पद के काबिल नहीं हैं जो उनको सीपीएन-यूएमएल मे मिला था। झा यूएमएल में पोलित व्यूरो के सदस्य थे। यादव ने कहा कि संदेह तब पैदा हुआ, जब पार्टर्ीीेतृत्व ने झा के साथ संगठनात्मक संरचना को दरकिनार करके सीधी बातचीत शुरु कर दी।
श्रवण यादव सहित मधेशी नेताओं द्वारा गंभीर आपत्तियों के बाद दाहाल ने फोन किया था और उनसे आग्रह किया था कि झा को वरिष्ठ पद देने के खिलाफ उनलोगों को नहीं जाना चहिए। केंद्रीय समिति के सदस्य रामकुमार यादव के अनुसार, श्रवण यादव धनुषा में झा के घर भी नहीं गए थे, जहाँ दाहाल, विश्वनाथ शाह और हरिवोल गजुरेल के साथ उनसे मिलने गए थे।
रामकुमार यादव ने तर्क दिया है कि कम्युनिस्ट पार्टियों की प्रवृत्ति के अनुसार झा को केवल केद्रीय समिति के सदस्य का पद दिया जा सकता है लेकिन कोइ भी उच्च पद नहीं मिल सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि झा के लिए पोस्ट के बारे में मधेशी नेताओं के बीच कोई विवाद नहीं है।

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