मधेशींयो को मार-मार कर अपना रास्ता साफ कर रही है ओली सरकार, लोकतंत्र अब शोकतंत्र बन गया,

आ अब गावं लौट चलें !
बिम्मी शर्मा, काठमांडू,२४ नोभेम्बर |
कुछ साल पहले एक फिल्मआई थी “आ अब लौैट चलें । ” उस फिल्म में कौन कौन कहाँ लौटा यह तो मालूम नहीं । पर हम सभी देशवासी पि.एम. ओली की कृपा से पुराने जमाने कीऔर लौट रहे हैं । राजा के शासनकाल में जब पञ्चायती व्यवस्था खूब फलऔर फैल रहा था । उस समय “गाउँफर्क अभियान” का नारा जोरों पर था । अब यह नारा पञ्चायती व्यवस्था में तो उतना सफल नहीं हो सका जितना अभी हो रहा हैं ।इसका सारा श्रेय हमारे महान पि.एम.ओली को जाता है ।

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देश ४६ साल में पञ्चायती व्यवस्था से निकल कर बहूदलीय व्यवस्था में चला गया । उस के बाद ६३ साल के जन आन्दोलन के बाद देश में लोकतन्त्र भी आगया । लोकतन्त्र के बहाने अफरा, तफरी में देश से हिन्दू धर्म आधारित व्यवस्था को गधे की सिंग की तरह गायब कर दिया गया । अब इस लोकतंत्र यानी शोकतंत्र मे पि.एम.ओली की सरकार अभाव का पहाड पैदा कर देश कीजनता को गावं लौटने के लिए कह रही है । शहर में सुख, सुविधाओं की दास बन चूकी जनता के पास कोई विकल्प भी नहीं है । क्यों कि शहर में खाना बनाने के लिए गैस नहीं है । कहीं आने जाने के लिए, निजी सवारी या सार्वजनिक यातायात के लिए तेल नहीं है । देश में दवाओं का किल्लत हो रहा है । कम से कम गावं जाएगें तो कोई घरेलू दवा या जडिबूटी से इलाज तो कर पाएगें ।
एमाओवादी के सुप्रिमो कमरेड प्रचण्ड तो पहले ही कह चूके हैं कि यदि भारत से इन्धन आयात करने मे कठीनाई आई तो हमलोग साईकल या पैदल चल कर लोकतान्त्रि व्यवस्था की सैर करेगें । प्रचण्ड का ईशारा शायद गावं की तरफ ही था । अब चीन से तो वह इंधन मगा नहीं सके इसिलिए साइकल या बैलगाडी में चढ कर गावं लौटने के लिए कह रहे हैं । ”अब मरता क्या नहीं करता“वाले अंदाज में जनता भी देश प्रेम यानीओली प्रेम का लौ जलाए रखनाचाहती है । आखिर कब तक यह तथाकथित प्रेम की लौ जलती रहेगी ? मधेश से जो अपने अधिकारों के लिए बवंडर उठा हुआ है । उस मे यह लौ बुझेगीही । पर डर सिर्फ इस बात का है कि कंही यह लौ चिगांरी बन कर सब कुछ राख न कर दे ? तब ओली का लोकतंत्र और एमाले का नयां जनवादतंत्र में परिणत हो जाएगा ।

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गवं मे खाना बनाने के लिए चूल्हा है, जलाने के लिए लकडी है ।शहर में क्या है ? घटों या कई दिनों तक लाइन लगने पर जैसे, तैसे आधा सिलिडंर गैस लो, ५ लिटर पेट्रोल और डिजल पसिना चुहाते हुए लो और घर चले जाओ । फिर कुछ दिनों बाद अपना अन्य जरुरी काम द्धोड कर गैस और तेल के लाईन में फिर से लग जाओ । देश के नागरिक को और कुछ काम नहीं है ? अरे यह नागरिक भी कहाँ है ? यह तो जनता भी नहीं सिर्फ जंतु है । सडक में मिमियाते जानवर जैसे जंतु, जिनकी दूम तो नहीं है पर दिखते वैसे ही हैं । हाँ किसी किसी के पिछवाडे मे पार्टी और नेता पिछे हिलते रहनेवाली अदृश्य दूम जरुर है । जो सभी को दिखता नहीं ।
नकाबंदी में तो सूई भी सम्बन्धित देश में घूषने नहीं दिया जाता है । पर यहां तो भारत से नेपाल की तरफ बडे, बडे तेल के टैकंर और गैस बुलेट घुस रहे है । पर यह देश की सीमा के अंदर घुषने के बाद नेकपाएमाले औ एमाओवादी के कार्यकर्ता और आयलनिगम के कर्मचारीयों के घर के अंदर अपने आप घुष जाता है । शायद इन तेल और गैस से भरे टैकंर और बुलेट को सिर्फ इनके घर का ही पता मालूम है , हमारे घर का नहीं । अब देश में लाख से ज्यादा विभिन्न राजनीतिक दल के कार्यकर्ता है । इन में सब से ज्यादा हमारे महान पि.एम.ओली की पार्टी नेकपा एमाले की ही कार्यकर्ता ज्यादा हैं । अब बेचारे सभीकार्यकर्ता भूखे है, सभी के सभी मूहं बाए खडे हैं । अब ईन के पेट में भी तो कुछ डालना पडेगा । ईसी लिए दयावान ओली सरकार अपने भूख और पद लोलूप कार्यकताओं को ईस अभाव के समय में कालाबजारी करने के लिए उदार मन से छूट दे रही है । जब छूट है तो सभी नियम कानून को धत्ताबता कर लूट रहे है ।
जनता बेचारी क्या करेगी ?अपना डेरा, डंडा समेट कर बैल गाडी मे गावं की तरफ कुच कर रही है । कम से कम गावं मे रहेगें तो अंगिठी मे मडगिला बना कर खाएगें और अपने बच्चों को तो जिंदा रखेगें । यह उदारमना सरकार तो जनता कों बोली का आश्वासन और गोली का राशन दे कर यमपूरी पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड रही जब से ओली सरकार में विराजे हैं । तब से मधेश कीजनता का फ्री का यमपूरी का टिकट मिल रहा है । अन्नकी राशन तो इस सरकार से उम्मिद करना बेकार है पर अपने लाइसेन्स धारी यमदूतों के माध्यम से गोली का राशन बांट रही है । क्यों कि यह गोली तो डलर, पौण्ड और युरो के साथ फ्री मे मिल जाता है ।
म्धेश है तो मधेशी हैं । मधेशी है तो अपना हक, अधिकार मागेंगे ही । पर धिरे धिरे सभी मधेशीयों को गोली का राशन खिलाया जाए तो न मधेशी बचेगें न अधिकार ही मांग पाएगें ? ईसीलिए न रहेगी बांस न बजेगी बासुंरी की तर्ज पर मधेशींयो को मार कर अपना रास्ता साफ कर रही है यह सरकार । जब खाने को राशनऔर बैठ्ने को आशन नहीं और दिन रात ओली की भजन मंडली की भाषण ही सुनना है तो कोई क्यों बैठे इस शहर में ? जब जलाने के लिए गैस की जगह मूढा अ\और लकडी, अंधेरा हटाने के लिए डिबीय या मोमबत्ती ही जलाना है तो ईस के लिए शहर से अच्छा गावं ही है ।
पंचायतीव्यवस्था में राजा गाउँ फर्क अभियान को जितने मूर्त रुप से जनता में लागू नहीं कर पाई थी । उस से भी कठोर रुप में टेढें तरिके से राष्ट्रवाद का जामा पहना कर और जनता की भावनाओं से खेल कर यह ओली कि गोली बरसाने वाली सरकार जनता को गावं लौटाना चाहती है । क्यों कि अभी देश में राष्ट्रवाद और देशप्रेम बनाम ओली और राष्ट्रघात और घृणा बनाम भारत और मोदी को बना कर जो ककटेल जूस जनता को पिने के लिए मजबुर कियाजा रहा है । यह कडवा मिक्सचर काला न्तर में ओली की सरकार के लिएजहर ही सावित होगी । जिसे पीने के लिए उनकी सरकार को तयार रहना होगा ? क्यों कि ओली निलकंठ नहीं है । “व्यग्ंय”

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