मधेशी जनता को यदि लडना ही है तो प्रदेश के लिए क्यों..? : रोशन झा

रोशन झा, राजबिराज २१ मई | किसी भी देश में क्रांति की बीज वहाँ की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक अवस्था पर निर्भर करता है जो अनुकूल परिस्थिति पाकर प्रस्फुटित होता है | वैज्ञानिक डाक्टर सिके राउत और उनके नेतृत्व में मधेशी जनता मधेश के लिए मर मिटने को तैयार है । डा. राउत पिछले पाच वर्षों से शान्तिपूर्ण एवं अहिंसात्मक मार्ग द्वारा मधेश के लिए संघर्ष कर रहे हैं ।

वर्तमान राजनैतिक संरचना अनुसार मधेश का यह भूगोल नेपाल राज्य अन्तर्गत है और यहाँ पर नेपाल का ही नियम कानुन लागु है। अमेरिकि स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान अमेरिका में स्वतन्त्रता की निव रखने के लिए एक शिद्धान्त लागु किया गया था, जो की आज भी अन्य मुलुकों की स्वतन्त्रता के लिए मार्ग दर्शक के रुप में स्थापित है । अमेरिका में बेलायती शासन के दौरान वहाँ के नागरिकों ने आक्लन किया की यदि प्रकृति में सारा कुछ सामान है तो उसमें सभी का बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए । वहाँ पर सब से पहले सरकार क्या है उसे परिभाषित किया गया है और ये माना गया की सरकार का मतलव है की सभी के लिए समान हक अधिकार, नियम, कानुन की व्यवस्था करै और हरेक नागरिक की अधिकार की रक्षा करैं । यदि ऐसा नही होता है तो सरकार का परिवर्तन होना चाहिए और उससे भी ना हो तो खुद ही अपनी सरकार जनता द्वारा बनाई जानी चाहिए ।

ईन्ही विचारों के साथ अमेरिका में क्रान्ति हुआ और अमेरिका बेलायती उपनिवेश से स्वतन्त्र हुआ । स्वतन्त्र मधेश अभियान की अगर बात करे तो डा. सिके राउत भी ईन्ही मूल्य मान्यताओं के साथ वैचारिक क्रान्ति करते हुए दिखाई दे रहे है । हर कोई जानता है की मधेशीयों के लिए नेपाल में समान अधिकार, राजनैतिक प्रतिनिधित्व, साँस्कृतिक एवं भौगोलिक पहिचान नही है मधेशीयों का अस्तित्व संकट मे है और अस्तित्व रक्षा के लिए संघर्ष जरुरी है । नेपाल में सरकार परिवर्तन भी हुआ किन्तु मधेशीयों की हालत वैसी की वैसी ही रह गई, ईसलिए मधेशियों के पास एक विक्लप रह गया की खूद ही सरकार का निर्माण करैं । डा. राउत ने यही बात मधेशी जनता में जागृत की है और कर भी रहे हैं । मानव का प्रथम चाहना होता है की वो कूछ करैं अपने लिए अपनो के लिए अपने घर परिवार के लिए डा. राउत भी तो खूद को पहले नेपाली ही मानते थें, वो अमेरिका में अच्छि खासी कमाई के साथ के सोहरत और रुतवा भी हासिल किए थें किन्तु परिस्थितियों ने आज उन्हे नेपाली राज्य संरचना के लिए विद्रोही बना दिया । उन्होने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और समृद्धि के बारे में ना सोचकर समग्र मधेशी जनता के मुक्ति के बारे में सोचा और ईसिलिए आज वों मधेश के महानायक रुप मे स्थापित हो चुके है । मधेशी जनता उनके नक्सा कदम पर चल्ने को आतुर हो चुकी है और यही कारण है की मधेशी जनता खूद को नेपाली नही मानते हैं । मधेशीयों को विद्रोही बनाने के नाम नेपाल के राजनैतीक संरचना, शासन व्यवस्था और सत्ताधारी शासक व्यक्तित्व ने किया है । मधेशी जनता ने नेपाली राज्य अन्तर्गत हक अधिकार पाने के लिए अनेका-अनेक संघर्ष किया, राज्य सत्ता ने केवल उसे तिरस्कृत किया, यहाँ तक की संघर्ष के दौरान मारे गए नागरिक के परिवार जनों को न्याय तक नही मिला, मधेशीयों को अधिकार मिलने के बात तो कोशों मिल दुर है, मधेशी जनता ने अब ठान लिया है की यदि संघर्ष ही करना, सहादत ही देनी है, दमन का शिकार ही होना है, लडाई ही लडनी है तो मधेश प्रदेश के लिए क्यों, मधेश देश के लिए क्यो नही?

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