मधेशी मोर्चा का मधेश आन्दोलन और मधेशियो का भविष्य : कैलाश महतो

कैलाश महतो, पारशी ,५ सेप्टेम्बर |
     अकबर ने एकबार बिरबल से बोला, ” मुझे आकाश मे एक सुन्दर महल बनाना है तीन महिने के अन्दर । महल बनाने का इन्तजाम शुरू किजिए । ” अपने सम्राट का आदेश Madhesi-morcha-ka-4-netaसुनकर बिरबल को बडा अजिब सा लगा कि आकाश मे भला महल कैसे बनेगा । मजबुरीवश बिरबल ने “होगा हुजुर ” कह्कर योजना बनाने लगा । महल बनाने के सारी सामग्रीया व्यवस्था कर्ने के साथ  उन्होने एक सुन्दर सुगा भी ले आया और उसे १५ दिनो तक कुछ महत्वपूर्ण बाते सिखायी । १५ दिनो बाद बालु, सिमेन्ट आदी सारी चीजो को तैयार कर सुगा को आकाश मे उडा दिया । सुगा उपर आकाश मे छोडा गया और आकाश से सुगा ने सिखाए अनुसार ही, ” ईटा पहुचाओ, सिमेन्ट लाओ, पानी दो, आदी कह्ने लगा ।” उधर बिरबल सम्राट अकबर पास जाकर बिन्ती किया, ” सरकार, आकाश से महल बनाने के लिए ईटा, सिमेन्ट, छड्, पानी माँगा जा रहा है, कृप्या उसका व्यवस्था किया जाय । ”
बिरबल की बात सुनकर अकबर झल्लाते हुए बिरबल से पूछा, ” आकाश मे बालु, गिट्टी, ईटा, आदी कैसे पहुचाया जा सकता है ?” कह्कर यह प्रश्न किया । अकबर की बात सुनकर बिरबल को रास्ता मिल गया और उन्होने जबाव दिया, ” सम्राट, जब आकाश मे महल बनाने की सामग्रीया नही पहुचाया जा सकता तो फिर वहाँ महल कैसे बन सकता ?” बिरबल का जबाव सुनकर अकबर ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया ।
मधेश मे उठा स्वस्फूर्त आन्दोलन से एक बात तय है कि अपने अधिकार के लिए मधेशी- थारू जनता किसी नेता या पार्टी की राह देखने मे समय व्यतित करना नही चाह्ते । मधेश मे जारी आन्दोलन को कुछ नेता अपने नेतृत्व या अपने समुह के नेतृत्व का मानने लगे है,जो सर्वथा उनकी कोरा कल्पना है । मधेश्-थरूहटा आन्दोलन जिस रूप मे शान्तिपूर्ण रूप से चल रहा था, वह हिन्सात्मक कहलाने को बाध्य हो गया । मधेश-थरूहट आन्दोलन को हिन्सात्मक बनाने मे के पी, सिटौला, झलनाथ, भिम रावल, रामशरण महत लगायत के खस नेपाली हुर्द्ङ्ग नेताओ की भूमिका जोरदार रही । वे जानकर मधेश के आन्दोलन को हिन्सात्मक बनाने का काम किए ताकि यह आन्दोलन किसी के वस मे न रह पाए । टीकापुर आमसभा के अकल्पनीय सफलता को कमजोर करने के लिए राज्य के रणनैतिक योजना के मुताबिक ही थारूओ के घर घर मे घुसकर उनके परिवारजनों की ईज्जत से खेलवाड करने , उन्हे हैरान तथा परेशान करने के कारण विद्रोह मे उतरे थारूओ के शान्तिपूर्ण विद्रोह पर प्रहरीयो का अत्याचार और थारूओ के प्रतिकार के बिच घटे घटना मे सैकरो थारू के साथ साथ राज्य से निर्देशित अपने कर्तव्यो को पालन कर रहे नेपाली वरिष्ठ प्रहरी लगायत के प्रहरी के अन्य जवानो को अनाहक मे प्राणो की आहुती देनी पडी ।

मधेश आन्दोलन अब वास्तव मे तिराहे पर खडा है । पहला, यह श्वासफूर्त आन्दोलन रहा, जिसका नेतृत्व मधेशी आन्दोलन्कारियो ने शुरू मे किसी भी नेता य पार्टी को लेने देने से इन्कार किया था । दुसरा, अब मधेशी दल के नेता लोग इस आन्दोलन को अपने या उनके मोर्चा के नेतृत्व का आन्दोलन का नाम देकर अपने तरफ आन्दोलन को आकर्षित करने की कोशीश  भी की गयी है । तीसरा, इस आन्दोलन से मधेशियो को नेपाली सरकार की  ओर से क्या और कितना मिलेगा, इसका शंका मधेश मे होने लगा है । उधर नेपाली राज्य मधेशियो के बिच मे फिर से महा-दुरी बढाने के चेष्टा मे लग चुकी है । कारण थारू, मुस्लिम तथा दलितो को कुछ दिनो के लिए अपने तरफ आकर्षित करने के लिए उनके माङ्गो को सम्बोधन विशेष रूप करने की योजना मे है ताकि किसी तरह बाजी मधेशी, थारू मधेशी और दलित मधेशी के बीच कुछ दिनो के लिए दुरी बनाकर मधेश मे अपनी बस्ती को बढाकर मधेश के बाकी रहे भूमियो को कब्जा किया जा सके ।

अब सोचनीय बात यह बनता है कि अकबर के प्रस्ताव अनुसार के मांगे  जो मधेशी नेताओ का है, क्या इस से मधेश और मधेशियो की मुक्ति, उन्मुक्ति, विकास या उनके अवसर के लिए ऐसा कोई जगह बन पाएगा ? हाँ, एक अभिमान मधेशी नेताओ का जरूर पूरा होने बाला है कि वो यह साबित करबा लेङ्गे कि मधेश के मुद्दो के विषय मे अगर कोई वार्ता करने बाला है तो सिर्फ मधेशी नेता लोग है और उस अवसर का फायदा उठाकर फिरसे राज्य से उन्हीका रिश्ता कायम होगा । क्यूकी राज्य ने भी जान बुझकर एक बेहतरीन चलाकी कर चुकी है कि नागरिकता, समावेशी, दलित्, मुस्लिम आयोग का कमी दिखाकर जब मस्याउदा लाया जाएगा, उनपे मधेशी लोगो का विरोध होना स्वाभाविक होगा, हम उसका सुधार कर देङ्गे और सिधा साधा मधेशी- थारू जनता यह मानने पर मजबूर हो जाएगी कि हमारे आन्दोलनो से बहुत सारे बुन्दो का सुधार हुआ है, बान्की के लिए अगले बार फिर कभी लडा जाएगा, क्यूकी तब तक मधेशी- थारू थक चुके रहङ्गे ।

हमारे मधेशी-थारू पार्टी तथा नेताओ
से भी यही माङ्गा जाएगा कि मधेश्- थरूहट प्रदेश के लिए आधर दो, प्रमाण लाओ, परिभाषा सुनाओ, सामर्थ्य दिखाओ, इतिहास मङ्गाओ । आदि, इत्यादी का बात सुनाएङ्गे और हमारे नेता लोगो को पद और पैसा के अलावा न मधेश की परिभाषा से मतलव होगी, न उस के इतिहास से, न उसके प्रमाण  आदी से कोई दिलचस्पी होगा, और तब मधेशियो का सपने ठीक वैसे ही चक्नाचुर हो जायेंगे, जैसे सम्राट अकबर का । इसिलिए मधेश आन्दोलन को शान्तिपूर्ण रूप मे ही सशक्त बनाना होगा, कभी सेना के लिए, तो कभी पुलिस बनने के लिए, कभी खण्ड्, कभी अखण्ड, तो कभी पानी, कभी मलखाद, तो कभी दो किलो चिनी, एक जोर कपडे आदी के लिए आन्दोलन नही, अपितु अब आजाद मधेश का आन्दोलन ही मधेशियो के लिए कारगर एवम सर्वोत्कृष्ठ होगा । बांकी सब मिथ्या और व्यर्थ है ।

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