मधेशी मोर्चा ने मौजूदा संकट हल के लिए नौ सूत्री प्रस्ताव रखा ।

काठमांडू: ७ पुस । संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा ने मौजूदा राजनीतिक संकट को हल करने के लिए दलों के बीच आम सहमति बनाने पर जोर देते हुए शनिवार को नौ सूत्री प्रस्ताव के रुप मे पैकेज डिल की आवश्यकता पर जोर दिया है । मोर्चा के आज हुइ बैठक मे पहचान और समथ्र्य पर आधारित संघीयतावादी और संघीयता विरोधीयों के बिच के द्वन्द्व को ही अभी का मुख द्वन्द्व कराड दिया है ।
मोर्चा व्दारा प्याकेज के रुप मे सहमति के लिये लाये गये शर्तो मे विघटित संविधानसभा व्दारा की गइ सहमति, राज्य पुनःसंरचनासम्बन्धी समिति व्दारा तयार किया गया १४ तथा आयोग व्दारा तयार किया गया १० और अल्पमत का ६ प्रदेश का प्रस्ताव को विवाद के रुप मे ही ग्रहण करके विचार विमर्ष और अन्तिम निर्णय के लिये संविधानसभा प्रस्तुत करने का माग रखा है, इसके अतिरिक्त संविधानसभा का समयसीमा ५ वर्ष का होना चहिये और संविधान बनने के बाद केवल बाकीँ समय के लिये संसद्मा का रुपान्तरित होना चहिये और २०७० साल बैशाख मसान्त के अन्दर संविधानसभा का निर्वाचन की सुनिश्चितता होना चहिये इसपर जोड दिया है ।
इस प्रकार पिछले संविधानसभा के निर्वाचन के लिये तयार किया गया मतदाता नामावली मे अद्यावधिक करके दुसरा संविधानसभा का निर्वाचन कराने का मधेसी मोर्चा का सर्त है। अगर प्याकेज मे सहमति हो पाइ तो चुनावी सरकार गठन के लिये मधेसी मोर्चा ने ३ विकल्प सामने रखा है ।

वर्तमान प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई के नेतृत्व वाली सरकार को राष्ट्रीय स्वरुप देने के लिये पहला विकल्प के रुप मे आगे किया है दुसरा विकल्प मे संघीय लोकतान्त्रिक गणतान्त्रिक गठवन्धन के कोइ भी नेता के नेतृत्व मे सरकार के गठन को रखा है । इसप्रकार अगर प्रस्तावित प्याकेज के विषय पर सहमति हो गयी तो चुनावी सरकार के नेतृत्व के लिये अन्य विकल्प भी खोजे जाने के रुप मे मधेसी मोर्चा ने तिसरा विकल्प रखा है ।
मधेसी मोर्चा ने प्याकेज मे सहमति के बाद बनी राष्ट्रीय सहमति की सरकार अगर दिये गये समयसीमा के अन्दर चुनाव नही करा सकी तो प्रधानमन्त्री का पद स्वतः पदमुक्त होने का संवैधानिक व्यवस्था करने का सर्त भी आगे किया है ।

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