मधेश अब मातृभूमि की रक्षा के लिए पूकार रहा है : राजहंस मधेशी

राजहंस मधेशी

राजहंस मधेशी, सप्तरी, ३ अप्रिल |
मधेश का हृदयस्थल सप्तरी जिले में हुई फागुण २३ की घटना दर्साती है की खून से लतपत मधेश अब आजादी के लिए पुकार रहा है । अब हम सब मधेशियों को सोचने का वक्त आ गया है कि आखिर युवा–वीर मधेशी अपनी जान की परवाह किए बिना नेपाली पुलिस के आगे सिना चौड़ा करते हुए भगत सिंह, सुखदेव, राज गुरु और चन्द्रशेखर आजाद की तरह हँस–हँस कर अपनी जान की कुर्बानी देते हुए मधेश माँ की रक्षा के लिए आगे बढ़ चुका है ।
मधेश की शीर कहलाने वाले झापा जिले से नेपाली फिरंगी नेतागण द्वारा संचालित मेची–महाकाली रथ यात्रा झापा, मोरंग और सुनसरी जिले को पार करते हुए जब सप्तरी प्रवेश किया तो माँ कंकालिनी की पावन भूमि भारदह से ही अनेकों चुनौतियों की सामना करना पड़ा । क्योंकि वो तीसरा मधेश आन्दोलन के बीर पुरुष राजीव राउत, रामकृष्ण राउत जैसे मधेशी योद्धा की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों थी
जब ओली एण्ड कम्पनी की बटालियन कार्यक्रम स्थल रहे गजेन्द्र नारायण सिंह औधोगिक क्षेत्र पहुँची, तब मधेशी युवाओं की निगाहे उस पर पड़ी । उसी समय फिरंगी नेतागण के द्वारा ललकारे जाने के बाद वीर मधेशी पक्ष को बर्दास्त नहीं होने से वो मातृभूमि प्रेमी नारा लगाने लगे । वो जोर–जोर से कहने लगे ‘अब भी तुम फिरंगी लोग अपनी जुबान बंद करो, नहीं तो हम मुहतोड़ जवाब देंगे ।’ फिर भी फिरंगी लोग एक के बाद दूसरी जुबान खोल्ते रहे…….. ! दूसरी तरफ, नेपाली पुलिस अपनी घेरा डालते हुए तरह–तरह की गाली गलौज मधेशी युवाओं को करते रहे और मधेशी महिला जो घूँघट में सजी थी, उसको भी अपशब्द कहकर अपमानित करते रहे । ऐसी असहज परिस्थितियों को सामना करने के लिए अपनी जान की परवाह किए विना उस चक्रव्यूह में कुद पड़े । एक ओर कौरवों की सेना के रुप में नेपाली पुलिस जो हथियार से सजी थी, तो दूसरी ओर पाण्डवों की सेना रुपी मधेशी नौजवान निहत्थे होते हुए भी अपनी छाती फुलाते हुए और हाथ–पैर चलाते हुए इस महाभारत रुपी युद्ध का सामना करते रहे, जैसे भारत में आजाद हिंद फौज की सेना की काबिलियत की तरह आजाद मधेश फौज रुपी सेना के रुप में अपनी मधेश माँ की रक्षा के लिए डटे रहे ।
तब की स्थिति सिरियाली जैसी होगी इस निहत्थे मधेशी बटालियन के ऊपर नेपाली पुलिस द्वारा गोलियों की बौछार होने के बाद सबसे पहले शहीद हुए संजन मेहता, जिनके शीर को ही छलनी कर दिया था । जब युवा जनसमूह उनकी अपनी ही मातृभूमि में छटपटाते हुए देखा, तब बर्दास्त नहीं होने की बाद नेपाली फिरंगी के ऊपर दौड़ पड़ा । इसी महायुद्ध के सिलसिले में दर्जनों युवा मधेशी को घायल होना पड़ा और पाँच बीर शहीद हुए ।
वास्तव में मधेश की भूमि के खातिर मर मिटनेवाला बीर युवा तिरहुतिया सेना की तरह बीरता देखाते हुए सबको चौंका दिया और साबित कर दिया है कि असंगठित युवाओं के मन में भी मधेश प्रेम इतना बढ़ चुका है कि उन्हें प्रदेश में नहीं देश बनने से ही संगठित रुप में सामंजस्यता की जा सकती है । यहाँ पर सोचने का वक्त आ गया है कि देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत युवा मधेशी शहीद के मन में ऐसी बात गुञ्जती होगी की हम तो इस आम मधेशी के बीच से सदा के लिए अलविदा हो रहे हैं लेकिन उन शहीदों की आत्मा यही चाहती थी कि आनेवाले पुस्तों को ऐसी कुर्बानी नहीं देनी पड़े ।
इस बीर मधेशी शहीदों की मनसुवा को पूरा करने के लिए एक ही विकल्प बाकी है ‘स्वराज मधेश’ जिसके फलस्वरुप ही अपना मधेशी राज कायम होगा । इसके अन्तर्गत अपना मधेशी सेना, मधेशी पुलिस, मधेशी कर्मचारी, कुटनीतिज्ञ, मधेशी सीडियो, एसपी, डि आईजी, आईजीपि लगायत सभी पदों पर मधेशी मूल के ही लोग विराजमान होंगे । मधेशी लोग ही इस भूमि के नेता, राजनेता, मन्त्री, प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति और सेनापति होंगे । उस समय में ऐसी भयावह स्थिति कभी नहीं आएगी कि साधारण बिरोध करने पर भी गोली ही खानी पड़ेगी ।
इधर मधेश स्वराज की आवाज उठानेवाले  डा. सि के राउत भी बार बार यही कहते हैं कि कब तक एक ही चीज के लिए मधेशी युवा मरते रहेंगे । अब अन्तिम संघर्ष के लिए ही हम सभी तैयार हो जाएं, ताकि सदा के लिए अपना अस्तित्व बचा रहेगा । इसमें थोड़ा भी विलम्ब किया तो मधेश की धर्ती से हम सब को पलायन होना पड़ेगा । आज हम बहुसंख्यक स्थिति में रहते हुए भी ऐसी नाजुक स्थिति का सामना करना पड़ता है, जब हम अपनी ही भूमि में अल्पसंख्यक हो जाएंगे, तो हमें शरणार्थी होकर दूसरे देश में जाना पड़ेगा ।
मधेश को आजादी चाहनेवाले का नेतृत्व कर रहे डा. राउत शान्तिपूर्ण एवं अहिंसात्मक मार्ग से आगे बढ़ने के बावजूद आज जेल में बन्द हैं । उनके ऊपर सांगठनिक अपराध का आरोप है, जबकि उनकी सभा में आज तक एक भी क्षति नहीं हुई है । उनको राजद्रोह जैसे मुद्दें भी नेपाली प्रशासन के द्वारा लगाया गया है । जबकि राष्ट्रद्रोह उन्हें लगाया जाता है, जिनके नेतृत्व में गृह युद्ध फैल जाय ।
अब सप्तरी घटना की गहराई से अध्ययन करने के बाद डा. राउत के ऊपर लगाय गये बेबुनियाद मुद्दों के असली हकदार मधेश में आतंक मचानेवाले केपी शर्मा ओली और उनके संगठन ही होगा । इसके साथ–साथ सरकार की ओर से ऐसे वातावरण का निर्माण किया गया है जिसके लिए गृह प्रशासन भी कम जिम्मेदार नहीं है । इस में शान्तिपूर्ण आन्दोलन कर रहे मोर्चा के नेतागण से भी थोड़ी गलती जरुर हुई है, फलस्वरुप हम इतनी संख्या में भविष्य के होनहार नौजवान को खो बैठे ।
वास्तव में आज मधेश में नेपाली राज्य के द्वारा सांगठनिक अपराध करनेवाले को बढ़ावा ही मिल रहा है न कि इसे रोका जा रहा है । मधेश में खून की होली खेलने के लिए नेपाली मूल के लोगों को पूर्ण छुट दी गई है । इससे प्रमाणित होता है की नेपालियों कि नीति नस्लभेद, रंगभेद और उपनिवेशिक मानसिकता से भरा हुआ है । नेपाली शासन के भीतर मधेशियों का न कभी कल्याण हुआ था, न हो रहा है और न ही भविष्य में होगा । इसलिए समय रहते इसका विकल्प के लिए हर मधेशियों को सोचना होगा । सप्तरी घटना की वास्तविक छानबीन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय अदालत तक पहुंचना जरुरी हो गया है ।

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