मधेश आन्दोलन को अब एक जोरदार धक्के की आवश्यकता

काठमाडौं में मधेश कहते ही उन लोगो के दिमाग में आता है कि ये भारतीय या बिहारी या यूपी से आए लोग हैं । इतना ही नहीं हिंसा, भ्रष्टाचार, अपराध, बस इस मनोवृत्ति से मधेश को और यहाँ के लोगों को देखा जाता है ।
मधेश का सकारात्मक पक्ष उनके दिमाग में नही आता, उन लोगो के चश्मे का लेन्स खराब है । लेन्स जैसा होगा, आप वैसा ही देखेंगे ।
राष्ट्रीय मीडिया भी भ्रम फैलाती है मगर अभी तक आन्दोलन शान्तिपूर्ण हो रहा है । सामाजिक सद्भाव कहीं नहीं बिगड़ा है, कल के दिन में अगर सामाजिक सद्भाव बिगड़ता भी है, तो वह राज्य द्वारा प्रायोजित होगा ।
Dipendra jha 3

अधिवक्ता दिपेन्द्र झा

अधिवक्ता दिपेन्द्र झा जी किसी परिचय के मोहताज नही, बहुत ही कम आयु में उन्हाेंने बहुत अध्ययन कर अपनी पहचान अन्तराष्ट्रीय स्तर में बना चुके हैं । विगत कुछ महीनों से चल रहे मधेश आन्दोलन, मधेश की समस्याओ को उन्होंने अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है । वे मधेशियो के मसीहा के रूप में उभर रहे हैं । प्रस्तुत है राजबिराज से करुणा झा की मानवअधिकारर्मी संविधान विशेषज्ञ राजनीति विश्लेषक, अधिवक्ता दिपेन्द्र झा जी से बातचीत के कुछ अंश –
० दिपेन्द्र जी, आप एक संविधान विशेषज्ञ हैं, अभी जो मधेश में आन्दोलन चल रहा है आपकी नजर में किस प्रकार की त्रुटियाँ हैं, संविधान जिससे मधेशी या मधेशवादी दल संतुष्ट नहीं हैं ?
– मधेशियो के संतुष्ट नही होने के कई कारण हैं क्योंकि गिरिजा प्रसाद कोइराला द्वारा मधेश आन्दोलन १ के बाद २२ बुँदे सहमति कर एवं ८ बुँदे सहमति करके जो अधिकार उन्हाेंने मधेश को दिया था गिरिजा प्रसाद कोइराला द्वारा दिया गया अधिकार सुशील प्रसाद कोइराला द्वारा छीन लिया गया है, इसी बात से मधेशी असन्तुष्ट हैं । ब्याज की बात तो दूर असल मूलधन भी छीन लिया गया है । गिरिजा प्रसाद कोइराला द्वारा समावेशी समानुपातिक का हक, निर्वाचन प्रणाली जनसंख्या के आधार पर राज्य के संरचना में स्वायत मधेश एक प्रदेश दिया गया था इसबार वो सव छीन लिया गया है । ये अन्याय हुआ है, मधेशियों के साथ तो ऐसे में मधेशियो का आक्रोश स्वभाविक है ।
० अभी आप इस आन्दोलन को बहुत ही निकट से देख रहे हैं, निकट भविष्य में इसके निकास की कितनी सम्भावना आपको नजर आ रही है ?
– निकट भविष्य में जबतक इस विभेद का अन्त नहीं होगा और इस विभेद का अन्त होना मुश्किल लग रहा है । विभेद का कोई मापन यन्त्र नही होता जैसे कोई बीमारी हो और हम एंटिब्याटिक दवा खा ले बीमारी तुरन्त ठीक हो जायेगी । ऐसा नहीं है । संघर्ष बहुत लम्बा है । विगत ४ महीनों से ये संघर्ष चल रहा है और अब जोरदार धक्के की आवश्यकता है । अभी तक शासक सुनने को तैयार नहीं है तो लम्बा संघर्ष होना स्वाभाविक है मगर थकना नहीं है, रुकना नही है और इसके लिए मधेशी जनता को धन्यवाद देना चाहिए ।
० अभी एमाले द्वारा मधेश जागरण अभियान चलाया जा रहा है मधेशियों को संविधान समझाये जाने का अभियान है, तो आपको क्या लगता है की अभी तक मधेशी जनता संविधान को समझ नहीं पाई है ?
– ये बहुत ही महामूर्खता है । इसका मतलब तो ये हुआ की सारे मधेशी मुर्ख हैं, अशिक्षित हैं, या नेपाली भाषा नहीं समझ रहे हैं । तो क्या ये लोग अब नेपाली पढ़ के समझायेंगे मधेशी को ? भ्रम तो पहाड़ में फैला है, उन्हें तो पहाड में जाकर सम्झाना चाहिए की मधेश में आन्दोलन क्यों हो रहा है ?
० आसीन ३ गते संविधान जारी होने के कुछ ही दिन बाद आप जेनेवा गए थे, वहाँ आपलोगो ने संविधान जलाया, युएन द्वारा कैसी प्रतिक्रिया दी गई ?
– जी, जेनेवा मैं गया था । मगर संविधान वहाँ गए मधेशवादी दल के नेताओ ने जलाया था । वहाँ मौलिक अधिकार का जो उल्लंघन हुआ है इस विषय पर चर्चा हुई थी । ४५ लोग को जो गोली मारी गई इस बात की चर्चा भी हुइ थी जहाँ यह कहा गया कि ४५ लोगों पर गोली चलानेवालो पर कार्यवाही होनी चाहिए । सबने स्वीकार किया की संविधान विभेदपूर्ण है ।
० आप काठमाडौंं मे रहते हैं, काठमाडौं के राष्ट्रीय मीडिया द्वारा भारत विरोधी बात दिखायी जा रही है बार–बार भारत द्वारा अघोषित नाकाबन्दी की बात हो रही है ऐसे में आपको नहीं लगता कि सामाजिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है ?
– जी, अफ्रीका का नाम सुनते ही हमारे दिमाग मे आता है जंगल, काले–काले आदमी, बाघ आदि परन्तु अफ्रीका के भीतर का सुन्दर पक्ष हमारे दिमाग में नही आता, बस वैसे ही काठमाडौं में मधेश कहते ही उन लोगो के दिमाग में आता है कि ये भारतीय या बिहारी या यूपी से आए लोग हैं । इतना ही नहीं हिंसा, भ्रष्टाचार, अपराध, बस इस मनोवृत्ति से मधेश को और यहाँ के लोगों को देखा जाता है । मधेश का सकारात्मक पक्ष उनके दिमाग में नही आता, उन लोगो के चश्मे का लेन्स खराब है । लेन्स जैसा होगा, आप वैसा ही देखेंगे । राष्ट्रीय मीडिया भी भ्रम फैलाती है मगर अभी तक आन्दोलन शान्तिपूर्ण हो रहा है । सामाजिक सद्भाव कहीं नहीं बिगड़ा है, कल के दिन में अगर सामाजिक सद्भाव बिगड़ता भी है, तो वह राज्य द्वारा प्रायोजित होगा ।
० मधेशी मोर्चा अभी दो, तीन भागों में बँट गई है, इससे आप को नही लगता कि मधेश आन्दोलन कमजोर पड़ सकता है जब मंजिल एक ही है फिर रास्ते अलग–अलग क्यों ?
– जी बिल्कुल नही कमजोर होगा इससे और सशक्त होगा आन्दोलन । क्योंकि अगर एक पक्ष कोई गलत सम्झौता करेगा तो दूसरा पक्ष तत्काल विरोध करेगा । दोनों पक्षों का उद्येश्य एक ही है । अलग–अलग रास्ता सिर्फ देखने में आ रहा है । काम एक ही है और इनका उद्ेश्य और मंजिल भी एक ही है ।
० छठ पर्व के बाद सप्तरी में ४ लोगो ने शहादत प्राप्त किया । निर्दाेष लोगो को या तो छाती में या माथे में गोली मारी गई मानव अधिकार का कितना हनन् हुआ आपकी दृष्टिकोण में ?
– मानव अधिकार का बिल्कुल हनन हुआ है यहाँ आन्दोलन में बल प्रयोग का भी अपना सिद्धान्त है पहले इसे समझाया बुझाया जाना चाहिए, इससे भी नही हो तो पानी का फव्वारा दिया जाना चाहिए । उससे भी ना माने तो लाठी चार्ज होना चाहिए, उससे भी ना माने तो अश्रु गैस का प्रयोग होना चाहिए, उससे भी बात ना बने तो हवाइफायर में रबर की गोली प्रयोग की जानी चाहिए, फिर भी बात न बने तो मेटल की गोली कमर से नीचे मारी जाती है । ये अन्तराष्ट्रीय सिद्धान्त है । मगर यहाँ जानबूझकर मधेशियों को माथे और छाती में गोली मारी गई जो कि प्रायोजित थी ।
० आप एक कानून व्यवसायी की नजरों से बताइये की इस संविधान में क्या–क्या त्रुटियाँ हैं ?
– इस संविधान ने मधेशियों को बहुत सारे अधिकारों से वञ्चित किया है । समावेशी समानुपातिक का अधिकार के आधार पर निर्वाचन प्रणाली का न होना । विभेद्पुर्ण नागरिकता का प्रावधान जिससे भारत के साथ जो हमारा सम्बन्ध रहा है उस पर प्रत्यक्ष रूप से हमला हुआ है । पहले जितने अधिकार प्राप्त थे मधेशियों को वो भी छीन लिया गया है । जाहिर है इन बातों के विरोध में मधेशी उतरेंगे और चार महीनों से इसी बात की लड़ाई चल रही है । मधेश की जनता की मनःस्थिति को देखकर लगता है कि ये इस बार अपने अधिकारों को प्राप्त कर के रहेंगे ।
हिमालिनी के लिए आपने अपना समय दिया, आपको बहुत बहुत धन्यवाद ।
— जी, आपका भी आभार जो आपने यह अवसर दिया ।

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