मधेश आन्दोलन ! पर्दा के पीछे का खेल शुरू हो चूका है : मुरलीमनोहर तिवारी

मुरलीमनोहर तिवारी  ( सिपु) , वीरगंज. ८ जनवरी |

मधेश का राजनितिक घटनाक्रम बदलने वाला है। कई चेहरे एक होने वाले है, तो कई चेहरे बेनकाब होने वाले है। मधेश के संदर्भ में सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन विधेयक पुरे आंदोलन का निर्णायक बिंदु साबित होने वाला है।

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एक तरफ आंदोलनकारी इस बिधेयक को अपर्याप्त बताकर ख़ारिज कर चुके है, तो दूसरी तरफ सभामुख का बयान आया की मोर्चा के नेता ही इस बिधेयक के पक्ष में है, और उन्होंने ही व्यक्तिगत भेट में कहा की भले ही हम फ्लोर पर इसका बिरोध कर रहे है मगर इसे प्राथमिकता के साथ पहले सूची में रखा जाएं। यहाँ भ्रम की स्थिति पैदा होती है। पर्दा के पीछे का खेल शुरू हो  चूका है।

स्मरण होगा की इसे सुशिल कोइराला सरकार के समय दर्ता कराया गया था। उसी सुशिल कोइराला को दुबारा प्रधानमंत्री के लिए मोर्चा ने वोट भी किया था। उसी सुशिल कोइराला ने तिन दलीय भद्र सहमति तोड़ते हुए राष्ट्रपति की कुर्सी गवा दी।  सुशिल कोइराला के समर्थन करने के कारण मोर्चा की काफ़ी फजीहत भी हुई थी। बाद में मोर्चा ने दक्षिणी दबाव का चादर ओढ़कर खुद को बचाया।

गौरतलब है की ओली को भारत भ्रमण में जाना है। भारत जाने से पहले कुछ करके ही जाना होगा, जिस कारण मोदी या सुषमा स्वराज एअरपोर्ट पर स्वागत कर सके। भारत में मधेश मुद्दा पर क्षेत्रीय दल मोदी सरकार को घेर रही है, उसके लिए भी ये बढ़िया सांत्वना पुरस्कार होगा। वैसे भी कूटनीति का उद्देश्य समस्या समाप्त करना नहीं समस्या से खेलना होता है।s-2

जिसने नेपाल में कई दलो को जन्माया है, उसे उन दलों को जिन्दा भी रखना है। इस प्रस्ताव के पास होने से कांग्रेस को भी अपनी पीठ थपथपाने और मधेश में घुसने को मौका मिलेगा। साथ ही एमाले, माओवादी मौका में चौका लगाएंगे। तभी तो ये युद्धविराम होगा, तभी तो पहाड़ी दल भी अपने अडान और राष्टीयता का लोहा मनवा सकते है।

मोर्चा को दो बिकल्प दिए गए है या तो नक्कली बिरोध करते हुए इसे मान लो, नहीं तो नाका से भगा दिए जाओगे। राजेन्द्र महतो पहले ही नक्कली राजीनामा, शहीद को पचास लाख क्षतिपूर्ति और प्रधानमंत्री के भोट प्रकरण में नंगे हो चुके है, इसी कारण इलाज के नाम पर हॉस्पिटल में छुपे रहने का हथकंडा अपना रहे है। साथ ही अपने को पाक- साफ़ दिखाने के लिए अपना अलग कार्यक्रम कर रहे है, तो दूसरी तरफ मोर्चा छोड़कर अलग भी नहीं हो रहे है।

उपेन्द्र यादव भी इसके प्रत्यक्ष मार से बचने के लिए काठमांडू का प्रत्याग करके, आनेवाले खतरे में अपने पार्टी को बचाने में लगे है। वे लगातार अपने विश्वासपात्र कार्यकर्त्ता को समझाने में लगे है। महंथ ठाकुर भी अपनी अस्वस्थता के खोल में घुस के बचने के युक्ति में है।

प्रस्ताव पास होने के बाद ये संसद में अपनी संख्या कम होने का खोखला रोना रोयेंगे। जब संख्या बल से ही सब होना था तो आंदोलन की जरुरत क्या थी ? जिस संविधान को पहले ही जला दिया गया है, जो संसद अपना है ही नहीं, जिसे हम मानते ही नहीं, उसमे जब तक अपनी मांग पूरी नहीं होती, उसमे जाने की जरुरत ही क्या थी ?

उसके बाद आंदोलन और सशक्त करने की चेतावनी दी जायेगी। बिरगंज नाकाबंदी चलता रहेगा। कही- कही भिड़न्त भी होता रहेगा। इसी बिच मधेशी नेताओ को चीन भ्रमण पर बुलाया जायेगा। चीन में भी स्वागत और समर्थन मिलेगा। ये वहा से दोगुने उत्साह से लौटेंगे। दिखाया जायेगा की अब तो दोनों पडोसी देश मधेश के साथ है, अब आंदोलन सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।s-3

शहीद दीनानाथ साह को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। जयमोद ठाकुर ने प्रफुल्लित होते हुए फ़ोटो पोस्ट किए। लेकिन शहीद पुत्र को क्या आशीर्वाद दे। क्या कहे शहीद का सपना साकार हो गया ? काली रात कट चुकी है ? या ये कहा की उसे ये सपना पूरा करना है और उसे भी इस आग की भट्टी में धकेल थे। या उससे कहे की जिसने लूटा है, वही रोता है हमारे हाल पर, आप ही कहिए ये रोना क्या अदाकारी नहीं…..जय मधेश।।

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