मधेश की चित्कार और ओली के हुँकार दोनो मधेश पीडा के विपरीत है : कैलाश महतो

कैलाश महतो, परासी, १५ नोभेम्बर |

६ नोवेम्बर २०१५ के दिन सहलेश एफ.एम ने मुझे अन्तरवार्ता के लिए अपने रेडियो में बुलाया था । मैं सिरहा के सहलेश रेडियो को धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्यूँकि कुछ ही दिन पहले मधेश के लगभग सारे रेडियो को नेपाल सरकार के सूचना तथा संचार मन्त्रालय से मधेश के रेडियो पर कानुनी कार्रबाई करने की नोटिस रेडियो स्टेशनों को भेजा जा चुका था । क्यूँकि मधेश के एफ. एमों ने जारी मधेश आन्दोलन को सहयोग करने तथा आन्दोलनों को उकसाने का आरोप नेपाली सरकार की रही थी । तथापि सहलेश एफ. एम रेडियो ने स्वतन्त्र मधेश के मुद्दों पर हमारी अन्तरवार्ता ली ।

shradhanjli-2

तकरीबन चार रोज के बाद नेपाली प्रधान मन्त्री के.पी. ओली का भी निर्देशन आया कि मधेश में कार्यरत मधेशी रेडियो स्टेशनाें पर कानुनी कार्रबाई हो और बन पडे तो उन्हें बन्द भी करने का निर्देशन भी दिया गया  । मगर कुछ बुद्धिमान संचार कर्मियों ने उस घटना से नेपाल सरकार को अकल्पनीय मूल्य चुकाने तक की हिदायतों के साथ संचार पर आक्रमण करना अनुचित होने की सलाह दी ।

विद्वानों की राजनीति वाकई विद्वान जैसा ही होती है । राजनीति करना और राज्य चलाना दो अलग अलग बातें हैं । दोनों में बहुत नजदिक का तालमेल नहीं हो सकता । अगर ज्यादा हुआ तो फिर गडबड होगी और कोई न कोई दुघर्टना भी निश्चित है । और नेपाल के राजनीतिक इतिहास में प्रायः दुर्घटना ही घटी है, क्यूँकि नेपाल में हमेशा राजनेता की कमी रही है, और जिन्हें राज नेता समझा गया, उनमें राजनीतिक योग्यता की कमी रही । योग्यता अध्ययन से निर्माण होता है और सूत्रबद्ध अध्ययन महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की अनुशासित अध्ययन और अध्यापन से निर्माण होता है, जिसकी कमजोरी नेपाल के राजनीति में हर काल में देखी गयी । अगर राजनीति में शिक्षा की जरुरी और महत्व नहीं है तो महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की आवश्यकता भी नहीं होनी चाहिए ।

मधेश की चित्कार और ओली के हुँकार दोनों मधेश पीडा के विपरीत है ।

हमें ज्ञात होना चाहिए कि सन् १९२५ में एडोल्फ हिटलर के विश्वास पात्र बने जोसेफ गोयबल्स को सन् १९३३ में हिटलर ने अपना असल मित्र और विश्वास पात्र मानकर उन्हें प्रोपागनिष्ट का जिम्मेबारी देते हुए संचार क्षेत्र का बादशाह बनाया था, जिन्होंने धिरे धिरे जर्मनी के सम्पूर्ण रेडियो, प्रेस, सिनेमा घर तथा थिएटरों के साथ साथ जर्मन संस्कृति तथा परम्परा समेत पर हिटलर राज्य के हित अनुसार बन्देज लगाने तथा हिटलर के तानाशाही को उच्च स्थान देने के कामों की शुरुवात की । हिटलर का तानाशाही और गोयबल्स का जनविरोधी हिटलर सहयोग बढता गया और हिटलर अपने जनप्रेम के कामों से ज्यादा अपने गलत शासन पद्धतियों के घेरे में फँसते गये । १ मई १९४५ के दिन हिटलर के उन्हीं कमजोरियों के कारण रुस ने उनपर आक्रमण की, जोसेफ गोयबल्स को आत्महत्या करनी पडी और अन्ततः हिटलर के जर्मनी और हिटलर को समाप्त होना पडा । ओली की बोली से जिस दिन मधेश और मधेशियों के विचारधारा, संस्कार, संस्कृति, रीतिरिवाज तथा परम्परा को ध्वस्त करने की रणनीति नेपालियों के द्वारा बनी, नेपाल और नेपालियों की अस्तित्व मिटना निश्चित है । मधेश को तो नेपाल के रहने नरहने से भी कोई फर्क नहीं पडेगा, क्यूँकि यह आजाद देश है और इसे सिर्फ पूनस्र्थापना करना है, जो निश्चित है ।

वैसे ही नेपाली मीडिया मधेश के जनता के प्रतिकुल होना ही अपने को राष्ट्रबादी होने का दावा करती है । सुगा रटान और एक नश्लीय प्रचार प्रसार तथा मधेश के सारे जल, जमीन और जंगल पर उपनिवेशिय शासन को वैध्य मानने का काम करने बाले नेपाली संचार क्षेत्रों ने भी मधेश का विश्वास खोता जा रहा है । मधेशियों को मधेश से खदेडने, उनके सारे जल, जंगल और जमीनों के साथ साथ उनके कृषि, व्यापार, राजनीति, भाषा, संस्कृति, शिक्षा, रोजगार, अवसर आदि समस्त आधारभूत स्तम्भो को नेपाली राज्य, उसके शासन, प्रशासन और जनताद्वारा कब्जा करने करबाने, उनके विभेदयुक्त कुकर्मो के विरुद्ध आवाज उठाने बाले मधेशी वर्ग और समुदायों को अराष्ट्रिय, राष्ट्रघाती, देशद्रोही, विखण्डनकारी, भारतीय, पाकिस्तानी, कटुवा, धोती आदि सम्बोधनों से उनके राष्ट्रियता को प्रताडित करने के कामों को मधेश अब बर्दास्त नहीं कर सकता ।

मधेश के २३,०६८ वर्ग कि.मी के क्षेत्रफलों मे से नेपालियों ने १५,१०० वर्ग कि.मी से ज्यादा जमीन को हडप चुका है । मधेश के रोजगार, व्यापार, राजनीति, सरकारी तथा गैर सरकारी संघ संस्था, पानी तथा मधेशी युवाओं के जवानी पर भी ९६ प्रतिशत से ज्यादा कब्जा जमा चुका है । दश लाख से ज्यादा मधेशी युवा विदेश में हैं–जिनकी शोषण भी नेपाली सरकार और उनके लोग कर रहे हैं । ये सब अभी राजकीय, सरकारीय, शासकीय, प्रशासनीय, कर्मचारीय तथा व्यापारीय रुप से मधेश को कब्जा किया गया है । मधेश में जनघनत्वीय रुप में आज भी मधेशी ही मजबूत है, जिसको नेपाली राज्य कमजोर करने के योजना में है । सारे मधेशियों को एक होना तथा अपने आजादी के लिए शान्तिपूर्ण आन्दोलन में भाग लेकर आगे बढना ही एक अन्तिम उपाय रह गया है । और यह मार्ग हमारे जित के लिए वेहद मजबूत मार्ग है । हमें कोई नहीं रोक सकता । न इन गोर्खालियों की बन्दुक, न इनकी सेना, न सशस्त्र, न जनपद, न इनकी शासन, न प्रशासन, न राजनीति और न इनकी कर्मचारीतन्त्र ।

इनकी मीडिया क्या बोलती है, क्या बकती है, उससे हमें कोई मतलब नहीं रखना है । धिरे धिरे हम अपना मीडिया खडा कर लेंगे । समय नहीं लगेगी हमें आजाद होने में । जो भी समय लगेंगे, बस, हमें तैयार होने में लगेंगे । जित हमारी निश्चित है, मधेश की आजादी तय हो चुकी है, मधेशियों की मुक्ति अवश्यम्भावी है । आये, जुडें, आगे बढें । शून्य क्षति में पूर्ण सफलता और आजादी ।

loading...