मधेश की मांगें देशद्रोही है : केपी शर्मा ओली

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काठमांडू , १४ अक्टूबर | पुर्व प्रधानमन्त्री तथा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने मधेश की मांग को देशद्रोही करार दिया है | उन्होंने मधेश में दो प्रदेश बनाये जाने की मांग को देशद्रोही कहते हुए ऐसी बातें नहीं करने की सल्लाह दी है | ओली ने भाषा समस्या के बारे में हिंदी राष्ट्रीय भाषा नही हो सकती कहा है | मधेश की समस्या के बारे में ओली ने कहा है कि अपने प्रधानमन्त्रीत्व काल में उन्होंने मधेशी दलों को कई बार वुलाया था लेकिन मधेशी दल नहीं आये | मधेशी दलों पर आरोप लगाते हुए ओली ने कहा है कि मधेशी नेताओं को समस्या समाधान करने की ईच्छा ही नही है उनलोगों ने देश को ही मुश्किल में लाने का कम किया | मेरे विरूद्ध मुझे हटाने के लिये भोट गिराने का काम किया | मावोबादी द्वारा प्रस्ताव फिर्ता लियेजाने के क्रम में कभी होटल तो कभी दूतावास में भोज खाने का काम किये | ओली के अनुसार उन्होंने देश को सहज स्थिति में लाने का कम किया था मृतक परिवार को द्श्लाख दिया था | कैलाली की घटना की मुद्दा फिरता लेने के सम्बन्ध में ओली ने सीधा इंकार कर दिया | उन्होंने कहा की सुरक्षा निकाय को जो कोई जहाँ खिन भी नही मार सकता है |

 

भारत से सम्बन्ध सुधरने के बारे में पूर्व प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि यह प्रधानमन्त्री दहाल का भारत के साथ (घुड़ा टेकाई) समर्पण है | उन्होंने कहा की मेरे समय में नाकाबंदी हुई , सम्बन्ध बिगड़ा लेकिन हम सुधारे | हम प्रधानमन्त्री बनने के बाद भारत गये और बातचीत किये | ईपीजी ग्रुप बना | उसके मार्फत बातचीत हुई कहीं कोई समस्या नही थी तो सम्बन्ध कैसे बिगरा ? कहाँ दहाल जाकर सम्बन्ध सुधारें है ? दहाल का सम्बन्ध सुधारना दिखावा मात्र है | राजकीय भ्रमण दिखाने के लिए किया गया इसका कोई रिजल्ट नहीं दिखा | मेरे भारत जाने के समय समस्या थी समस्या हटी, असमझदारी थी असमझदारी हटाई गई , नयाँ बन्दरगाह लाया गया | हमने नाकाबंदी खुल्बायी | प्रधानमन्त्री कहतें हैं राष्ट्रीयता की बात नहीं करें ? भारत ऐस कहा होगा मुझे नहीं लगता है |

संविधान संशोधन के बारे में ओली ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव कराने के लिए हम कोई संवैधानिक कठिनाई नहीं देखेते है | अगर कोई कोई संवैधानिक कठिनाई है तब हो सकता है | किसी को खुश करने के लिए वा किसीको समर्पित करने के लिए संविधान का सन्शोधन नही होगा | ओली ने खा की अगर यह सरकार चुनाव नहीं करबा सकी तो इस सरकार का औचित्य समाप्त हो जायेगा | २०७४ माघ ७ तक संवैधानिक और राजनैतिक जटिलता को समाधान नही हुई तो देश के विरूद्ध अपराध माना जायेगा |

बालकृष्ण बस्नेत और शेखर अधिकारी के साथ हुई बातचीत के आधार पर आज के कान्तिपुर ने यह प्रकाशित किया है |

 

 

 

 

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