मधेश की मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा : डिम्पल झा

Dimpal Jha
डिम्पल झा, काठमांडू, १ फरवरी | सरकार द्वारा अगहन १४ गते संविधान संशोधन विधेयक संसद् सचिवालय में पंजीकृत किया गया । जबकि इस संशोधन विधेयक में हमारी मांगों को संबोधित नहीं किया गया है । खासकर विधेयक में सीमांकन्, नागरिकता की प्राप्ति, समानुपातिक प्रतिनिधित्व एवं भाषा संबन्धित प्रावधाननों को स्पष्ट रुप से संबोधित नहीं किया गया है । जैसे, मधेश में झापा से लेकर कंचनपुर जिले तक दो प्रदेश, वैवाहिक अंगीकृत महिला को वंशज की तरह अधिकार और नागरिकता की व्यवस्था तथा मधेश में बोली जानेवाली विभिन्न भाषाओं के साथ–साथ हिन्दी भाषा को संवैधानिक मान्यता । हमारी इन मांगों को दरकिनार कर सरकार ने इस संशोधन विधेयक को पंजीकृत किया है ।
इसी प्रकार महिला प्रतिनिधित्व का भी अहम सवाल है । मौखिक रुप से महिलाओं के लिए समावेशी समानुपातिक प्रतिनिधित्व की बात की जाती है । परन्तु व्यवहारतः क्रियान्वित हुए कहीं भी नहीं देखा गया है । इसलिए मेरे ख्याल से महिलाओं के लिए कुछ चुनाव क्षेत्र आरक्षित होना चाहिए । चाहे उसे हम ‘कोटा’ कहें या ‘आरक्षण’ । जहां सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ सकें । ऐसे प्रावधान होने पर सभी जाति, समुदायों की महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं ।
जहां तक चुनाव करने, करवाने का सवाल है । मेरे ख्याल से जब तक विधेयक में परिमार्जन सहित हमारी मांगों को संबोधित नहीं किया जाता है, तब तक चुनाव होने की संभावना ही नहीं है । अगर सरकार संशोधन विधेयक को उपेक्षा कर जबर्दस्ती चुनाव करवाती है, तो वह चुनाव मधेशी मोर्चा और हमारी पार्टी को स्वीकार्य नहीं होगी ।
समग्रतः कहा जा सकता है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक हमारा संघर्ष और आन्दोलन जारी रहेगा । स्व. गजेन्द्र बाबू के शब्दों में ‘जब तक शोषित इंसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा । खासकर हमारी पार्टी शोषितों, पीड़ितों व वंचितों के अधिकार दिलाने हेतु सदैव प्रयत्नशील है और रहेगी ।
(डॉ. डिम्पल झा सांसद तथा नेपाल सद्भावना पार्टी की प्रवक्ता हैं ।)
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