मधेश की मांगों को अविलम्ब संबोधन करने की आवश्यक्ता है : दिना श्रेष्ठ

काठमांडू, १० जुलाई | नेपाल हिमाल पहाड व तराई–मधेश से मिलकर बना है । इस प्रकार तराई–मधेश भी नेपाल का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । सदियों से मधेश और मधेशी समुदाय विभेद में पडे हैं । उनकी अपनी ही पीड़ा है । लोकतंत्र में अपने हक और अधिकार की प्राप्ति हेतु हर कोई लोग लड़ सकता है, अपनी आवाज उठा सकता है, उसे अधिकार लेने का फर्ज बनता है । वर्तमान में मधेशियों के साथ अनेक समस्याएं हैं । इन समस्याओं में से एक महत्वपूर्ण समस्या है — पहचान की समस्या । उनकी पहचान की समस्या को भावनात्मक रूप से संबोधन करने की नितांत आवश्यकता है, ऐसा मुझे लगता है ।
देश में संविधान जारी हो चुका है । स्थानीय निकाय चुनाव भी दो चरणों में संपन्न हो चुके हैं । मधेश केन्द्रित कुछ पार्टियां इन चुनावों में शामिल हो चुकी हैं । लेकिन इन पार्टियों में से एक शक्ति चुनाव में शामिल नहीं हुई है । तीसरे चरण का चुनाव आश्विन दो गते को तय किया गया है । यह चुनाव की तारीख भी राजपा नेपाल के अनुसार ही तय की गयी है । राजपा नेपाल भी तीसरे चरण के चुनाव में शामिल होने की उम्मीद की जाती है ।
दूसरी तरफ सरकार भी मधेशियों की मांगें पूरी करने हेतु मधेश केन्द्रित दलों के साथ वार्ता कर रही है । इसके साथ–साथ तीसरे चरण के चुनाव में राजपा नेपाल को शामिल करबाने के लिए कोशिश कर रही है । सरकार का कहना है कि मधेश नेपाल का ही एक हिस्सा है, मधेश को भी इस चुनाव मे शामिल किया जाय । इस सरकारी प्रयास को साकारात्मक रूप में लिया जा सकता है हालांकि, राजपा नेपाल अपनी डिमान्ड पूरी न होने तक चुनाव में शामिल न होने की बात कर रही है । उन्हें अपनी मांगों के लिए संघर्ष तो जारी रखना ही है, इसके साथ–साथ उन्हें आगे भी बढ़ना है । मौजूदा अवस्था में सात प्रदेशों में से छह प्रदेशों में निकाय चुनाव संपन्न हो गया है । अब सिर्फ प्रदेश नं. दो में ही बाकी है । इस सन्दर्भ में मेरी धारणा है की चुनाव सहज रूप में होने देना चाहिए । क्योंकि चुनाव हो जाने के बाद राजपा नेपाल को भी फायदा होगा । वैसे वहां की जनता चुनाव में शामिल होने के लिए इच्छुक हैं । उन्हें भी इच्छा है कि अपने जन प्रतिनिधियों को चयन करें । वहां के नेताओं भी चाहते है कि चुनाव हो जाने के बाद ही हम कुछ कर सकते हैं । साफ है कि जनमत दिखाने के लिए भी उन्हें चुनाव में शामिल होने की आवश्यकता है ।
आने बाले माघ सात से पहले अगर तीनों स्तर का चुनाव नहीं हुआ तो देश में संवैधानिक शंकट आ सकता है । यह सभी जानते है । दूसरी तरफ संविधान संशोधन कर आगे बढ़ने में भी संवैधानिक संकट है । इसलिए मधेश की जायज मांगों को अविलम्ब संबोधन करने की आवश्यकता है । इसी में देश की भलाई संभव है ।
(दिना श्रेष्ठ एक जाने–माने अधिवक्ता हैं ।)

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