मधेश की मूल समस्या का जड है मधेश का बौद्धिक समूह : अब्दुल खानं


अब्दुल खानं, बर्दिया। संसार का विकास मानव के अपार बाैध्दिक क्षमता अाैर कडा परिश्रम से सम्भव हुआ है | मानव अपनी क्षमता से चन्द्रमा तक जा पहुंच चुका है। अासमान की बुलन्दी अाैर जमीन में सैकडाे मिटर दबी चिज काे नाक से सुंघ कर बता देता है । दुनया अाज जितना तकनिक मे अागे है उतना ही भंयकर बिनास का सामान भी निर्माण कर चुका है।अाज दुनिया मे दहसत का वह खाैफ मिसाईल अाैर बम्ब बनचुके है जाे ऐक झटके मे दुनया काे बरबाद कर सकता है | यह बिनास अाैर विकास दाेनाे बाैद्धिक समुहाे द्वारा ही समभव हुवा है। ज्ञान प्राप्त व्यक्ति पर निर्भर हाेता है अपनी क्षमता काे किस काम के लिऐ प्रयाेग करे |  वैसे ही मधेश के अपने स्वार्थ मे लिप्त समुहों ने मधेश मे समस्या कायम रखने की अनेकन तजविज निकाल कर जनता में भ्रम सृजना कर रहें हैं।
अाज पुरी दुनियाँ अपने सम्मान,पहिचान,अधिकार के लिऐ शासकों से लाेकतान्त्रिक मूल्य मान्यता काे स्विकार कर स्वतन्त्रता प्राप्त कर रही है। लेकिन मधेश मे सदियाे की गुलामी काे शिराेधार्य कर पुन: वहि १०/२० वर्ष पुरानी मागाें के साथ अपनी राजनीतिक राेटी सेकने के लिऐ चुनाव पे चुनाव लड रहें हैं | जाे सहिद हुये, जाे अपागं है, जाे जेल की राेटी खा रहे है उनकी काेई प्रवाह नही की जा रही है । मधेश के कुछ बाैद्धिक लाेग अपना विश्लेषण करते जा रहे है, पुन: अन्दाेलन की रणनीति बना रहे है, पुन: वही पहिचान, सम्मान,अधिकार की अावाज लगाकर शासक वर्ग काे खुश करने मे लगे है।
सीधा साधा जनता काे भटकाने के लिऐ वे लाेग राष्ट्र , राज्य अाैर देश की परिभाषा देकर अन्तरिक उपनिवेशवाद की समस्या काे उजागर कर अपनी अपनी मनगढ़ंत कहानी बना रहे है | देश के शासक से मिलकर देशी/ बिदेशी दाताअाें काे रिझाने के लिऐ अपनी अनुठी चाल चल रहे है। इन्ही विद्वान लोगों के कारण सवा कराेड मधेशी जिनका अपना भूगाेल, भाषा, संस्कृति, ईतिहास हाेते हुये भी परजीवी हाेकर जीना पड रहा है। अपनी सभा सम्मेलन, गाेष्टी, तालिम मे अान्तरिक उपनिवेश कहकर नेपाल , मधेश दाेनाे मे बने रहना चाहते हैं।
वास्तव मे मधेश मे उपनिवेश है अाैर अान्तरिक उपनिवेश भी है। नेपाली लाेगाे द्धारा सिर्जित समस्या पहिचान, सम्मान अाैर विभेद की समस्या है जाे जबरन लादा गया है |
मधेश मे विभिन्न जात धर्म निच, उंच, धनी, गरिब जैसे अनेकाै अायाम मे समस्या है | यह अान्तरिक उपनिवेश है,इसमे शासक अाैर शासित जनता नही हाेती, यहाँ पहुंच के अाधार पर विभेद हाेता है इसमें पहिचान, सम्मान रगं के अाधार पर विभेद की समस्या नही हाेती यहाँ के लाेग शासक वर्ग के साथ कदर अाैर सम्मान काे अपना फर्ज बनाडालते है।
इतना नही अब तो वकिल, डॉक्टर, इंजीनियर वा पत्रकार जैसे लोग भी अपना मनचाहा पार्टी पसन्द करके उस पार्टी में लग रहे हैं । उनका एक ही मकसद है पार्टी के जरिये सत्ता के करीब रहें । इस सबसे मधेश मुद्दा को धक्का पहुंच रहा है । इसलिए मेरा विनम्र आग्रह है कि बौद्धिक वर्ग अपने को नियन्त्रण में रक्खें । पद,पैसा और प्रतिष्ठा इस सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मधेश की मुद्दा है ।

 

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz