मधेश की समस्याओं को संबोधन करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय नेताओं की हैं : विनीता कार्की


काठमांडू | मेरा घर मलंगवा है और मधेश की समस्याओं के बारे में मुझे अच्छी तरह ज्ञात है । मधेश में ढेर सारी समस्याएं हैं । वहां के रहने वाले सभी लोग नेपाली ही हैं । कुछ लोग भारतीय होंगे वह अलग बात है, लेकिन सभी नागरिकों को इंडियन कहना या संबोधित करना हास्यास्पद विषय है । वहां कौन मधेशी, कौन पहाड़ी सभी मिलजुल कर बसे हुए हैं । हालांकि मधेश में कुछ वर्ष पूर्व राजनीति में उथल–पुथल हुई थी, लेकिन मेरे ख्याल से वह उथल–पुथल राजनीतिक परिवर्तन के लिए ही हुई थी जबकि अभी वैसा कुछ नहीं है ।
मधेशियों की अधिकांश मांगें जायज हैं, जिन्हें संबोधन करने की आवश्यकता है । लेकिन मधेश के नेताओं की कमजोरी की वजह से उनकी मांगें अभी तक पूरी नहीं हो पायी हंै । जिस समय वे सत्ता में थे, उस समय वे सभी पद लिप्सा में लीन हो गये । यहां तक कि मधेश के मुद्दों पर एकजुट भी नहीं हो पाए । संविधान निर्माण प्रक्रिया के दौरान ही अगर वे एकजुट होकर आवाज उठाते तो मधेश की समस्याएं पूरी हो सकती थी, ऐसा मुझे लगता है । हालांकि मधेश की समस्या सिर्फ मधेश की ही नहीं बल्कि देश की भी समस्या हैं । इसलिए मधेश की समस्याओं को संबोधन करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय नेताओं की है ।
वर्तमान में मधेशियों की मांगें पूरी नहीं होने की वजह से प्रदेश नं. दो में चुनाव नहीं हो सका । इस सवाल पर अभी बहस जारी है । उनकी मांगें चुनाव से पूर्व संबोधित हो या चुनाव के बाद, इसके लिए दोनों पक्षों के बीच एक विश्वसनीय सहमति व समझदारी होने की आवश्यकता है । और यह सहमति व समझदारी चुनाव के पूर्व या बाद जब कभी हो, संबोधन करने की आवश्यकता है । देश में लोकतंत्र की मजबूती व चहुंमुखी विकास के लिए चुनाव होना आवश्यक होता है । इसलिए चुनाव में सभी को शामिल कराना चाहिए । अंत में मैं कहना चाहंूगी की मधेश की जनता भी नेपाली ही है । इसलिए उनके अधिकारों का संबोधन होना चाहिए और इसकी पहल सरकार द्वारा होनी चाहिए । उनकी मांगों को अनदेखी, अनसुनी नहीं करनी चाहिए ।
(विनीता कार्की अधिवक्ता हैं ।)

विनीता कार्की अधिवक्ता हैं ।

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