मधेश के मांग का सम्बोधन जरुरी, नहीं तो संविधान कार्यान्वयन कठिन : दुर्लभ थापा

काठमांडू , ३० चैत्र |

Durlav thapa
नेपाली कांग्रेस के भक्तपुर जिला सभापति दुर्लभ थापा ने कहा है कि मधेशी जनता की जायज मांग को सम्बोधन करना चाहिए । हिमालिनी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा है– ‘मधेश आन्दोलन की दौरान उन लोगों ने जो मांग आगे लया है । उसको सम्बोधन होना जरुरी है, नहीं तो संविधान कार्यान्वयन कठिन हो जाएगा ।’ मधेश सन्दर्भ में केन्द्रित रह कर हिमालिनी के लिए लिलानाथ गौतम से किया गया बातचीत का सम्पादित अंश यहाँ प्रस्तुत है–
० नयाँ संविधान को लेकर तराई÷मधेश में जो असन्तुष्टि है । इसके बारे में आप क्या कहते हैं ?
– पहली बात तो तराई÷मधेश में संविधान के बारे में जो प्रचार किया गया है, वह विलकुल गलत है । संविधान में ऐसी विभेदकारी नीति नहीं है, जो प्रचारित हो रहा है । लेकिन समावेश, समानुपातिक एवं पहचान के सम्बन्ध में मधेशी जनता ने जो मांग किया है, उनकी जगह से वह मांग भी विल्कुल सही है । अपने को मधेशवादी कहलानेवाले दल गड़बड़ कर रहे हैं । वे लोग संविधान को विल्कुल गलत ढंग से विश्लेषण करते हुए सर्वसाधारण जनता में भ्रम सिर्जना कर रहे हैं ।
नेपाली कांग्रेस भी चाहता है, मधेशी जनता की मांग को सम्बोधन हो । इसके लिए नेपाली कांग्रेस ने ही सबसे पहला संविधान संशोधन का मुद्दा दर्ता किया था । संविधान संशोधन भी हुआ है । संशोधन के माध्यम से कुछ मांग को सम्बोधन किया गया है, लेकिन सीमांकन लगायत कुछ मांग सम्बोधन होना बांकी है । सीमांकन ऐसी विषय है, जो जल्दबाजी में नहीं हो सकता । जो भी हो, मधेश में रहनेवाले सभी जनता नेपाली नागरिक हैं, उन लोगों की जायज मांग सम्बोधन करना राज्य का धर्म होता है ।
० अभी तक सीमांकन सम्बन्धी मांग सम्बोधन नहीं हो रहा है, मधेशवादी दल तराई÷मधेश में सिर्फ दो प्रदेश ही मांग रहे हैं । लेकिन प्रधानमन्त्री कह रहे हैं कि यह मांग सम्बोधन नहीं हो सकता । तब तो कैसे होगा समस्या का समाधान ? दो प्रदेश की मांग सम्बन्ध में आप क्य कहते है ?
– इसके लिए वर्तमान सरकार सबसे बड़ा दोषी है । आन्दोलन बिसर्जन के लिए कुछ सम्झौता हुआ था । लेकिन उसका अभी क्या हो रहा है, कोई अतापता नहीं है ।  अगर मांग सम्बोधन हो सकता है तो स्पष्ट कह देना चाहिए । वह भी नहीं हो रहा है । मैं मधेशवादी दलों की मांग क्या है, और उसको कैसे सम्बोधन किया जाए, इसके बारे में ज्यादा नहीं जनता । लेकिन तराई÷मधेश में रहनेवाले जनता क्या चाहती है, उसको सम्बोधन होना चाहिए । अगर कोई गलत मांग लेकर बैठा हो तो उसको भी सम्बोधन कर समझा देना चाहिए ।
जहाँ तक तराई÷मधेश में दो प्रदेश का सवाल है, मधेशी दल ही इसको सबसे विवादित विषय बना रहे हैं । मुझे लगता है– यह मांग जनता की मांग नहीं है । कुछ मधेशवादी दलों की मांग हैं । अगर जनता दो ही प्रदेश चाहती है तो उसको पूरा करना होगा । सबसे विवादित जिला अभी झापा, मोरङ, सुनसरी और कैलाली–कञ्चनपुर को बनाया गया है । मधेशवादी दलों ने जो कह रहे हैं, क्या झापा–मोरङ–सुनसरी की जनता उसको मानने के लिए तैयार हैं ? कैलाली–कञ्चनपुर की जनता क्या कहती हैं ? अगर जनता भी यही चाहती है तो मांग सम्बोधन करना ही बेहतर होगा । कुछ नेताओं की मांग, जनता की आवाज और मांग नहीं हो सकता ।
० मधेशवादी दलों का मानना है कि नेपाली कांग्रेस भी मधेश के प्रति उद्दार नहीं हैं, क्या कहते हैं ?
– यह विल्कुल झुट बात है । कांग्रेस भी मधेशी जनता की मांग सम्बोधन करने के लिए तैयार है । नेपाली कांग्रेसका आधार स्तम्भ ही है, मधेश । अगर हम मधेश की जनता की आवाज नहीं सुनेगें तो हम राजनीति कहाँ करेंगे ? मेरा व्यक्तिगत मान्यता भी है कि हर नेपाली जनता की मांग सम्बोधन होना चाहिए । चाहे व हिमाल का हो या तराई का ।
० मधेशीवादी दल बता रहे है कि वे लोग अभी आन्दोलन की तैयारी कर रहे हैं, इसके बारे में कुछ कहेंगे ?
– अपनी हक–अधिकार के लिए लडना और आन्दोलन करना स्वभाविक होता है । लेकिन जो मांग लेकर जिस तरह आन्दोलन हुआ हैं, वह विल्कुल गलत था । सीमा क्षेत्र अवरुद्ध करना र देशको आर्थिक रुप से धरासायी बनाना विल्कुल ठीक नहीं था । मैं जोर दे कर कह रहा हूँ, हर समस्या का समाधान वार्ता और सम्वाद के माध्यम से ही हो सकता है । आन्दोलन नहीं, सम्वाद में आना चाहिए ।
० फरक प्रसंग, नेपाली कांग्रेस ने अभी नयाँ नेतृत्व पाया है, अब कांग्रेस का प्राथमिकता क्या हो सकता है ?
– नेपाली कांग्रेस देश का ही सबसे बड़ा और प्रजातान्त्रिक शक्ति है । नयाँ संविधान तो जारी हुआ है, लेकिन उसका कार्यान्वयन सहज नहीं दिख रहा है । संविधान कार्यान्वयन के लिए नेपाली कांग्रेस अब अपनी भूमिका निर्वाह करेगी ।

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