मधेश के मुद्दे का समाधान होते ही भारत नेपाल सम्बन्ध सुधरेगा : भारतीय अधिकारी

बिग ब्रदर नहीं हम बराबर हैं । नेपाल और भारत एक ही शरीर के दो अंग हैं ।

बिम्मी शर्मा, दिल्ली, ६ जून |

भारत अपने सब से नजदीकी पड़ोसी देश नेपाल के साथ “ईक्वल ब्रदर” सिद्धान्त के आधार पर व्यवहार करना चाहता है । यह बात भारतीय उर्जा मंत्री पीयुष गोयल ने भारतीय विदेश मन्त्रालय के बाह्य प्रचार महाशाखा के निमन्त्रण पर भारत (दिल्ली और मुंबई) भ्रमण में गए नेपाल के विभिन्न संचार माध्यम में काम करने वाले १५ पत्रकारों की टोली से स्पष्ट रूप में कही । गत मई २२ तारीख रविवार शाम को उर्जा मंत्री गोयल ने नेपाली पत्रकारों की टोली द्वारा पूछे गए प्रश्न कि “क्यों भारत नेपाल के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहा है या नेपाल को कम महत्व दे रहा है ?” के जवाब में मंत्री गोयल ने स्पष्ट रूप से कहा कि “नेपाल और भारत एक ही शरीर के दो अंग हैं । शरीर के एक अंग मे खराबी आने से दूसरे पर इसका प्रभाव पड़ता ही है ।” भारत नेपाल की अस्थिरता से चिन्तित है ।

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गोयल ने कहा कि नेपाल की अस्थिरता का प्रभाव भारतीय सुरक्षा पर भी पड़ता है । यह हस्तक्षेप नहीं खुद की चिन्ता है । भारत की तरफ से नेपाल के स्वतत्रंता और अखण्डता पर कोई खतरा नहीं है । गोयल ने कहा हम “ईक्वल ब्रदर” सिद्धान्त के आधार पर नेपाल से सम्बन्ध रखना चाहते हंै । भारत और नेपाल के बीच पिछले छ महीने से चल रहे तनातनी को भी गोयल ने अस्थायी बताया । उन्हाेंने कहा यह अस्थायी सेट ब्याक है जल्द ही सम्बन्ध पहले के जैसा ही होगा ।

भारत के एक हप्ते के प्रवास के दौरान जितने भी सरकारी अधिकारी या नेतागण मिले सभी ने एक ही स्वर मे बताया की मधेश के मुद्दे का समाधान होते ही भारत नेपाल सम्बन्ध पहले की तरह हो जाएगा । संविधान संसोधन, सीमाकंन का पुनरावलोकन और संघीयता में जाने के बाद ६ से ७ राज्य के निर्माण मे अपनी अडान रखते हुए भारत की तरफ से नेपाल को देखने वाले अधिकारियों ने अपनी अडान दुहराई । यदि ऐसा न हो सका तो नेपाल लंबे समय तक अस्थिरता में चला जाएगा और इस का नकारात्मक प्रभाव भारत में भी पडेगा । वहां के अधिकारियों ने साफ शब्दो मे यह संदेश दिया है कि यदि सीमाकंन का बदलाव कर के मधेश मे दो राज्य बनाने की सहमति हुई तो भारत नेपाल के वर्तमान संविधान का समर्थन करेगा अन्यथा नहीं ।

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अनौपचारिक बातचीत के दौरान भारतीय अधिकारियों ने यदि संविधान में विवादित बांकी मुद्दाें को सुलझाने के लिए नेपाल के राजनीतिक दल तैयार हो गए तो नेपाल में जारी यह संविधान प्रगति उन्मुख ही है । वहाँ के अधिकारियों ने आश्वासन देते हुए कहा कि नेपाल, भारत दोनों तरफ के सम्बद्ध निकाय में जो मतभेद है वह मधेश मुद्धे के समाधान होते ही धीरे धीरे समाप्त हो जाएगा । भारतीय नेता और अधिकारियों ने नेपाल से गए पत्रकारों की टोली को बारबार यह कहा भी की नेपाल, भारत सम्बन्ध सुधारने के लिए क्या पहल किया जाए ?

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि भारत, नेपाल सम्बन्ध वर्तमान में जटिल और संवेदनशील मोड़ में होने कि बात स्वीकारते हुए तत्कालीन तथाकथित नाकाबंदी को तात्कालिक परिस्थितियों से उत्पन्न घटना और एक अपवाद के रूप में लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि भारत नेपाल का हरसंभव मदद करेगा । उन्होंने पत्रकारों की टोली से पूछा सम्बन्ध सुधार के लिए क्या–क्या करना चाहिए ? विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने पत्रकारों की टोली से कहा भी कि “भारत की तरफ से कोई मनोमालिन्य वा समस्या नहीं है, नेपाल के तरफ से है तो हम समाधान करने के लिए तैयार हैं ।”

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नेपाल और भारत की सीमा किसी नदी, समुद्र वा पहाड़ से विभाजित नहीं है । यह सीमा समान भूखण्ड में रहने वाले दो देश और दो पड़ोसी द्धारा आपसी सहमति से बनाया गया है । परापूर्व काल से भाषा, संगीत, चालचलन, रीति रिवाज, परपंरा, परस्पर शादी ब्याह और खानपान में बंधे एक जैसे दो देश हैं । भारतीय पक्ष का मनना है की इसी लिए भारत सीमा अन्य देशो से विशेष है और इस को बंद करने की बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबुत बनाया जाए ताकि सीमा में कोई गलत कार्य न हो ।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार नेपाल को कैसा संविधान और संघीयता चाहिए यह उसका निजी मामला बताते हुए विभिन्न राजनीतिक शक्तियों के बीच सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध स्थापित कर के मधेश मुद्धे को संवोधन करना एक मात्र विकल्प है । उन के विचार से यह नेपाल का आंतरिक राजनीतिक समस्या है और इसका समाधान राजनीतिक तरीके से ही करना चाहिए । सभी राजनीतिक दलों और असन्तुष्ट समूह को समेट कर सहकार्य करते हुए आगे बढ़ने के लिए भारतीय पक्ष ने जोड़ दिया है । भारतीय संस्थापन पक्ष ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि मधेश मुद्दे के स्थायी समाधान के बाद नेपाल में जो शान्ति आएगी उस के बाद दोनो देशों का सम्बन्ध फिर से सहज ढंग से आगे बढेगा ।

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भारतीय पक्ष के अनुसार नेपाल भारत सम्बन्ध सुधार के लिए एक सीमाकंन समस्या को एक सर्व स्वीकार्य राजनीतिक संयंत्र निर्माण कर के जाना चाहिए । उनके विचार में यदि किसी राजनीतिक दल वा समूह ने जातीय व साम्प्रादायिक अडान को त्याग कर मधेश मुद्धे को सुलझाने में पहल करे तो मधेश समाधान होने में समय नहीं लगेगा । नेपाल के प्रधान मंत्री और मंत्रियों की दिल्ली दौड़ की तरफ ईशारा करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि “उच्च तह की राजनीतिक भ्रमण या डेलिगेशन आने से ही सम्बन्धों में सुधार नहीं होगा, दोनो देशों के बीच सम्बन्ध संचालन करने और उसे बनाए रखने के लिए अन्य तत्व भी जरुरी है । जिसकी तरफ ध्यान देना जरुरी है ।” उन्होने अंत में स्पष्ट शब्दो में कहा कि “मधेश समस्या का हल जब तक सर्व स्वीकार्य तरिके से नहीं किया जाएगा तब तब दोनो देशों के बीच सम्बन्धों मे सुधार नहीं हो सकता ।”

नेपाल और चीन के बीच हाल के दिनों में बढ़ती नजदीकियों की तरफ इशारा करते हुए नेपाली पत्रकारों की टोली द्वारा पूछे गए प्रश्न पर भारतीय पक्ष ने कहा कि नेपाल को जिस देश से या जिस मे फायदा हो उसी दिशा में आगे बढना चाहिए । हम नेपाल, चीन सम्बन्ध पर और कुछ नहीं कहना चाहते ।Þ

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