मधेश के लिऐ जनमतसंग्रह क्याें नहीं ?- अब्दुल खानं।

अब्दुल खानं | अाज पुरी दुनियाँ से तानाशाही का अन्त हाे चुका है। हिटलर अाैर माेसाेलुनी जैसे शासक अपनी सलतनत काे नही बचा सके जनता के अागे नतमष्तक हाेना पडा है। दुनिया भर से अाैपनिवेशिक हुकुमत की तखता निश्चित रुप से पलट चुकी है। समय के बदलाव के अनुसार वह लाेग भी बदले अाैर भारत अमरिका जैसे देशाे के उपर से अपने हुकुमत का ताज समेटना पडा। अाज समता,समानता अाैर जन-चाहना अनुरुप हुकुमताे कि लकिरें बन रही है। दुनियाँ लाेकतन्त्र अाैर सर्वभाैमिकता जन निहित हाेने पर विश्वस्त हाे रही है।
दुनियाँ का खतरनाक अाैर शक्तिशाली संगठन, अाईयस, अाईस जाे अपने मिशन के अलावा लाेकतन्त्र अाैर मानवता का काेई प्रवाह नही, जिसने देशाें के लकिर काे मिटाकर ईस्लामिक स्टेट निर्माण का खुवाब देखने वाला अाैर इराक जैसे देश के शासन काे नकार कर जनता ने अलग कुर्दिसतान के लिऐ विना खाैफ जनमतसंग्रह का चुनाव कर लिया | स्पेन दुनियाँ की शक्तिशाली देशाे मे से एक है, वहांपर कैटाेलाेनिया की जनता ने जनमतसंग्रह कर सरकार भी घाेषणा कर चुका, वेलायत जैसे लाेकतान्त्रिक देश मे स्कटल्याण्ड के लिऐ वार वार जनमत संग्रह हाे जाता है, नेपाल मे निरदल, बहुदल ब्यवस्था के लिऐ भी जनमत संग्रह हुआ था ताे मधेश के लिऐ क्याें नही ? अाखिर मधेश सदियाें से साेषित, पिडित, अाैर अपमानित रहा है। हक अधिकार के लिऐ अनगिनत वीरों की कुरवानी अाैर महिलाअाें के मागं के सिन्दुर पाेछे गऐ हैं | शहिदाे के लास की सीढियाँ बनाकर लाेग सभासद अाैर मन्त्री ताे बन चुके है |
मन्त्री बनने के लिये अाज भी चुनाव पे चुनाव लडते जा रहे है, अर्बाै अरब लगानी कर सकते है, महिनाै महिना का नाकाबन्दी , सडक सदन मे अावाज उठा सकते है, ताे मधेश के लिऐ जनमतसंग्रह का अावाज क्याें नही उठाते ? क्या सही माने मे मधेश के नेताअाें मे नैतिकता नही है । या लालच के ठेकेदार है, यह लाेग, इस बिषय पर बहस हाेना जरुरी है ?
जब की माैजुदा संविधान विपरित राजतन्त्र अाैर हिन्दु राष्ट्र निर्माण हेतु जनमतसंग्रह की अावाज उठ रही हैं,नही हाेने पर अान्दोलन करने कि चेतावनी दी जा रही है। अाज पुरी दुनियाँ मे रह रहे मधेशी लाेग मधेश की अाजादी हेतु विभिन्न देशाे मे रहकर वहाँ से अावाज उठा कर सभा सम्मेलन कर रहे है | मधेश मे पुलिस प्रशासन के व्यापक दमन के वावजुद लाखाें की सभाऐं, नमुना जनमत संग्रह से लेकर हास्तक्षरिक अान्दोलन अाैर सैकडाे मधेशियाें पर देश द्राेह के मुकदमे चल चुके हैं जाे मधेश के लिऐ जनमतसंग्रह की माग कर रहे हैं, ताे मधेश अाजादी के लिऐ जन्मतसंग्रह क्याे नही ? यह  सरकार मधेश की जनभावना काे क्याें नकार रही है ? जब की मधेश का भाैगाेलिक बनावट, भाषा, संस्कृति , मनाेविचार नेपाल से बिलकुल भिन्न अाैर अलग है। मधेश का अपना पुरातन ईतिहास भी रहा है। जिस की जानकारी कहीं भी  शिक्षा के पाठ्यक्रम मे नही रखा गया है।
 

 

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