मधेश के हित में नहीं बना तो संविधान जलाएंगे सभासद चतुर्वेदी

“मम्मी क्या हम इन्डियन हंै” – अपने बेटे के इसी प्रश्न का उत्तर पाने के लिए आशा चतर्ुर्वेदी को राजनीति से लगाव हो गया । तर्राई के एक अच्छे परिवार से सम्बद्ध होने के कारण राजनीतिकर्मी उनके घर आते जाते थे । प्रजातन्त्र की पुनर्स्थापना के बाद नेपाल सदभावना परिषद, नेपाल सद्भावना पार्टर्ीीें परिणत हो गया था और इसी दौरान आशा की मुलाकात गजेन्द्र नारायण सिंह से हर्ुइ । मधेश के अधिकार के लिए संर्घष्ारत गजेन्द्र बाबू के संर्घष्ा से प्रभावित होकर आशा भी राजनीति में आ गयीं । लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वो बहुत दिनों तक गौण ही रहीं । जन आन्दोलन-२ के बाद वो सक्रिय रुप में राजनीति में शामिल हो गयीं और मधेशी जनाधिकार फोरम से आबद्ध हो गयीं । पार्टर्ीीूटने के बाद वह मधेशी जनाधिकार फोरम लोकतान्त्रिक के कित्ते में आ गयीं । और इसी पार्टर्ीीी ओर से वह अभी संविधान सभा में समानुपातिक सदस्य हैं । आशा चतर्ुर्वेदी का संर्घष्ा और आगामी योजना के संबन्ध में हिमालिनी प्रतिनिधि कञ्चना झा से हर्ुइ बातचीत का अंश –_r2_c2
० संविधान के विवादास्पद मुद्दों मे सहमति बनाने की जो समय सीमा तय की गयी थी, उसमें  सहमति नहीँ बन सकी, अपनी जीद छोडने को कोई दल तैयार नहीं । ऐसे में जनता को संविधान कैसे मिलेगा –
– गर्भ में बच्चा है तो जन्म तो होगा ही, ठीक वैसे ही संविधान तो बनना है और बनेगा ही । एक राष्ट्र बिना संविधान का रह सकता है क्या – संविधान बनेगा और वो भी जनता के पक्ष में ।
० वैचारिक विभेद तो लोकतन्त्र का गहना है, लेकिन  साझा एजेन्डा पर सहमति बननी चाहिए । आखिर यह सहमति क्यों नहीँ बन पा रही है – कौन है दोषी –
– इस देश की जनता परिवर्तन चाहती है । और यह बात जनव्रि्रोह, लोकतान्त्रिक आन्दोलन, मधेश आन्दोलन, थरुहट आन्दोलन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता क्या चाहती है । पर दर्ुभाग्य कुछ मुठ्ठी भर लोग जन भावना की कदर नहीं कर पा रहे हैं । वे लोग भूल गये हंै कि जनता अगर जाग जाये तो ज्ञानेन्द्र को रातों रात फेंक सकते है । जनता चाहती है कि पहचान सहित की संघीयता और संघीयता सहित का संविधान बने और अगर इसमें कोई बाधक बनेगा तो पार्टर्ीीौर नेता दोनों की खैरियत नहीं ।
० संविधानसभा में तो आप लोग भी हैं । जनता की अपेक्षा है कि संविधानसभा संविधान दे । जन प्रतिनिधि के हिसाब से आप लोग दबाब क्यों नहीं बना रही हैं –
– हमारी संख्या बहुत कम है और जितना दबाब चाहिए वो देने में हम लोग अर्समर्थ हैं । लेकिन समझने की बात है कि- संविधान जनता के लिए बन रही है और उनके अनुकूल बनना चाहिए । काँग्रेस और एमाले संख्या के हिसाब से बडÞी पार्टर्ीीैं, वह सोचते हैं कि वो जो चाहेंगे कर लेंगे । अगर उनकी सोच ऐसी है तो मंै कहती हूँ उनकी सोच बिल्कुल गलत है ।
० अगर संविधान बन भी जाता है तो क्या ग्यारेन्टी है कि नयाँ संविधान मधेश की जनता की अपेक्षा पूरी करेगी –
– पहली बात तो मधेश की अपेक्षा पूरा होने वाला संविधान बनेगा । विभिन्न समय में हुए आन्दोलन और समझौता को ध्यान में रखकर ही संविधान बनेगा और मधेश की जनता की अपेक्षा पूरी होगी । अगर ऐसा नहीं होता है तो संविधान जलाने वाली स्थिति आयेगी ।
 ० खासकर प्रदेश, पहचान और भाषा को लेकर कथित बडे दल आप लोगों से भिन्न मत रखते हैं । अगर मधेश की जनता की अपेक्षा पूरी करने वाला संविधान नहीँ बनता है तो आप लोग क्या करंेंगे –
– अगर मधेश की जनता की मांग को नजरअन्दाज किया गया तो हम फिर से सडÞक आन्दोलन में जायेंगें । और इस बार का आन्दोलन ६२-६३ का आन्दोलन से भी ज्यादा भयंकर होगा ।
० विषयवस्तु परिवर्तन कर थोडÞा महिला के सवाल पर आना चाहती हूँ, नेपाल की महिला की अवस्था को आप कैसे देखती हैं –
– शिक्षा की कमी, पर निर्भरता, पितृसत्तात्मक सोच, रुढिÞवादी परम्परा और महिला उत्थान में पुरुष का निराशाजनक सहयोग के कारण महिला की स्थिति कमजोर है ।
० मधेशी महिला की स्थिति तो और भी खराब है, क्या समस्या है वहाँ –
– यह समस्या मधेश में और ज्यादा है । पहाडÞ के महिलाओं में परिवर्तन आया है । वे लोग आत्म निर्भरता की ओर उन्मुख हैं । काम  छोटा हो या बडÞा वे लोग करने में नहीं हिचकिचाते और पुरुष की ओर से भी उनको सहयोग मिल रहा है । लेकिन यह बदलाव मधेश में नहीं आया है ।
० मधेशी महिला को विकास के मुख्य धार में लाने के लिए क्या करना होगा – और इसमें आपकी क्या भूमिका या योजना है –
-घर घर में शिक्षा का दीप जलाना होगा । लडÞका शिक्षित न भी हो तो कोई बात नहीं, लडÞकी को शिक्षित बनाना होगा ।  शिक्षा से उन लोगों में आत्मविश्वास बढेÞगा  । और यह सिर्फभाषण में नहीं व्यवहार में लाना होगा । मधेश में महिला शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए कुछ योजनाएं है, इसके लिए मैं बार-बार सरकार से बात कर रही हूँ ।
० अन्त में आप तो पर्सर्ााे संबद्ध है, अपने जिला के लिए क्या करने की योजना है –
– पर्सर्ााी बात करें तो यह नेपाल प्रवेश का मुख्य द्वार है । औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटकीय हिसाब से यह एक समृद्ध जिला है । लेकिन दर्ुभाग्य इसके साथ कभी न्याय नहीं हुआ । सडÞक बदहाल है, स्वास्थ्य और शिक्षा की हालत भी दिनोदिन बदतर होती जा रही है । ऐसी स्थिति में सबसे पहले तो जनता को तय करना होगा कि उनके लिए कौन ठीक और कौन गलत । जनता अच्छे लोगों को चुने, ऐसे लोगों को अपना जन प्रतिनिधि चयन करके भेजें जो विकास चाहते हों । मेरा सबसे पहला पहला प्रयास ही यही है कि जनता को सचेत बनायें ताकि वो अच्छे लोगों का चयन कर सकें ।

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