मधेश को लावारिस नेता नहीं असली वारिस की आवश्यकता है : निर्मल मण्डल

निर्मल मण्डल  | बर्तमान समय मे मधेश की स्थिति राजनितिक रूप से बहुत बड़ी समस्या के बिचजुझ रही है। इस बिकराल स्थिति से मधेश को जल्द से जल्द बाहर निकालना जरूरी है। हम २१वीं शताब्दी मे आ चुके है। लेकिन हम अभी भी  १८ वीं शताब्दी की सोच लेकर समस्या को देख रहें हैं। संसार मे जितना भी परिवर्तन हुआ है सब इंसान के सोच के बदौलत हुआ है। आज हम मधेशी भी यदि सोच ले कि हमे स्वाधिनता चाहिए हमे परधिनता मन्जुर नहीं है। तभी कुछ परिवर्तनका नयाँ किरण मधेश को देखने को मिलेगा। मधेश आज से नही पिछले ६८ बर्ष से राजनिति का शिकार बनते आ रहा है। मधेश मे कोई भी क्रान्ति करने की सम्भावना बहुत ही न्युन है। मधेश के राजनिति मे जितने चेहरा सामने आया वो सब सिर्फ राजनिति का एजेण्डा को मजबुत और बढाबा दिया। ताकि आनेबाले दिन मे भी राजनीति मे कोई दिक्क्त ना हो।
मधेश शब्द का प्रयोग मे लाकर बिभिन्न आन्दोलन भी हुआ और हो भी रहा है। परन्तु मधेश मे रहनेबाले आदिवासी, थारू, मुश्लिम, दलित और सिमान्तकृत समुदाय को क्या मिला ? जिन समुदाय से मत लेकर केन्द्र सरकार के प्रमुख पद पर गए वे क्या कुछ कर पाए ? जैसे उपेन्द्र यादब आत्म निर्णयसहित का स्वायत मधेश एक प्रदेश के आन्दोलन से नेता बने । उन्होंने मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल गठन किया और मधेश की भावना के साथ चलने का वादा भी किया । पर परिणाम देखा जाय तो कुछ दिन के बाद आत्म निर्णय का माग छोड दिये, स्वायत मधेश एक प्रदेश का भी माग छोड दिये। सिर्फ उतना ही नही बल्की अपने पार्टी से मधेश शब्द को भी सदा के लिए हटा दिया गया। और दुसरा महन्थ ठाकुर ने कहा था कि हमे ‘सत्ता नही चाहिए, हमे जनता चाहिए’ जैसा नारा लगाया। अब मधेश से कम्युनिष्ट का जर हटाकर प्रजातन्त्र स्थापना करेंगे जैसा बडा आश्वासन भी दिया । परिणाम देखा जाय तो प्रभु सत्ता अथार्त जनता को छोडकर सत्ता मे जाने के लिए पार्टी का ही बिभाजन करबा दियें और कम्युनिष्ट को मधेश से हटाने की बात तो दुर पहले कम्युनिष्ट सरकार मे ही सामिल हुये | उसी पार्टी के बौद्धिक सरकल की छवि वाले नेता हृदेश त्रिपाठी आज उसी कम्युनिष्ट मे समाहित हो गये। समग्र मे देखा जाय तो राजनीति मे इन मधेशी नेता का कोई स्थायी जगह नही है।आज यहाँ तो कल कहाँ । इस लिए मधेश को “लावारिस नेता नहीं एक सच्चा वारिस” की अति आवश्यक्ता है।
हर युग मे समाज को जबतक एक सच्चा, वीर, दुरदर्शी, पराकर्मी और निर्मलभाव युक्त गुण बाले नेता न मिलजाए तब तक समाज और देश को सम्पुर्ण बिकास सम्भव नही होता। जब जब मधेश की जनता अपना जंजीर खोलना चाहता है। तब तब लावारिस नेता लोग मधेश मुदा को सौदागर साबित होजाता है। इस लिए आज हमे एक हिम्मतवाला सच्चा निष्ठावान वारिस की अति जरूरत है। आप लोग अच्छा से सुन रहे है कि पहाडि पार्टी एक होकर अगले चुनाव मे सामिल होने जारहा है। इससे साफ देखाई दे रहा है कि आजतक जो भी आन्दोलन हुआ है उस आन्दोलन का कोई भी माग पुरा न होने देने के लिए। और मधेश के उपर अपना बर्चश्व कायम रखने के लिए नेपाली राजनीति एकिकृत होरहा है। कुछ मधेशी नेता मधेशको फिरंगी के साथ मे देखना चाहता है। अपना कुछ स्वार्थ मे पुरा मधेश को ही काल के मुख मे दे रहा है। यदि अभी भी हम मधेशी अपना जगह से स्वतन्त्रता के लिए आगे नही बढते है तो मधेश के लिए दिन अवस्था नाजुक होता जाएगा। हम मधेशी इस मधेश केन्द्रित पार्टी पे बिश्वास करके सयौं सपुत को खो चुके है। अभी के स्थिति मे हमे मरना नही कुछ करना होगा। आने बाले दिन मधेश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।  इसलिए आप लोग दल और पार्टी के चकर छोडकर एक स्वतन्त्र संगठन से जुडे और मधेश का जो रावण है उसे परस्त करे। कहाबत है- “नेपाली राज सुख साज सजे सब भारी। सब धन विदेश चलि जात इहै अति ख्वारी।। हे प्रभु!अब मधेश के दुर्दशा देखी ना जाई।।”

 

निर्मल मण्डल

 

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