मधेश को लुटने बाले एक संजय नहीं, लाखों नेपाली संजय है,उनपर कारबाई क्यूँ नहीं ?

कैलाश महतो , पराशी , २२ अप्रिल | संजय साह अपराधी है या नहीं, यह अनुसन्धान की बात है । मगर नेपाली साम्राज्य अत्याचारी जरुर है ।

एक वो शख्स जो नेपाल के संविधान सभा में जनता द्वारा निर्वाचित सदस्य रहे हैं । मधेश केन्द्रित एक दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, नेपाल सरकार के मन्त्रिमण्डल में एक सदस्य रह चुके श्री साह जनकपुर के एक प्रतिष्ठित युवा भी रहे हैं ।

Sanjya Kumar Sah. Photo: THT/ File

Sanjya Kumar Sah. Photo: THT/ File

उनके उपर नेपाल सरकार ने जनकपुर के रामानन्द चौक पर हुए बम काण्ड, हाथ हथियार तथा पत्रकार सिंघानियाँ के हत्या अारोप लगाने का प्रपञ्च रचा है । उतने बडे ह्रिदय विदारक अपराधिक घटनाअों मे से नेपाल सरकार ने एक भी घटना में साह का संलग्नता की प्रमाण नहीं जुटा पायी है । जबरजस्ती अपने शासन के बल पर उन्हें एक पर एक नये नये मुद्दों में फसाने की रणनीति तैयार की जा रही है ।

वे बारम्बार नेपाल सरकार से यह अनुरोध कर रहे हैं कि सरकार द्वारा उनपे लगाये गए सारे इल्जामों को पर्दाफास करने के लिए संसार में वैज्ञानिक रुप में सत्य तथ्य उजागर करने बाले पोलिग्राफी सिस्टम का प्रयोग से सत्य तथ्य जनकपुर लगायत सारे संसार के सामने लाये । अगर वो अपराधी प्रामाणित होते हैं तो किसी को उनके पक्ष में वकालत करने की बात ही नहीं रहेगी । उनको हर वो सजा मिलने ही चाहिए, जिनके वो भागिदार होंगे। मगर नेपाल सरकार यह करने से घबराती क्यूँ है ? शंका वहाँ पर अब सिर्फ जनकपुर बासी मधेशी जनता में ही नहीं, बल्कि अब यह अाम मधेशी जनता की बनती जा रही है ।

वैसे भी नेपाल सरकार अौर उसके पुलिस प्रशासन करती क्या है, उसपर नजर डालते हैं । २०७२ अगहन २४ गते के दिन स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के कार्यक्रम करने हेतु मलंगवा के एक विद्यालय में कार्यक्रम शुरु होने से पहले ही नेपाल तथा शसस्त्र प्रहरी के कुछ सौ जवान वहाँ पहुँचकर कार्यक्रम नही करने देने की बात की । हमें वहाँ से बाहर निकल जाने के लिए कहा गया अौर हम सभी लोग उनके बातों को मानकर बाहर चले गए । बाहर जब निकले तो स्वाभाविक रुप से मधेशी जनता हमारे साथ बिल्कुल शान्तिपूर्ण रुप में एक शब्द भी बोले बिना सडक पर चल रहे थे । उतने में ही हमारे सामने प्रहरियों की गाडियाँ आकर हमें रास्ते से उठाकर प्रहरी कार्यालय ले गयी अौर मुद्दा यह बनाया गया कि हम उनपे हाथपात किए । गाली बेइज्जत किए अौर पत्थरबाजी किए अौर हम पर देशद्रोह का मुद्दा दायर करने की धमकी दी जाने लगी । शायद वह मुद्दा स्वीकार न हो पाने के बाद सार्वजनिक मुद्दा दायर कर दी गयी । हमें हप्तों तक थुना में रखा गया अौर फिर पाँच महिनों तक अदालत की चक्कर लगानी पडी ।

नेपाली साम्राज्य ने आजतक न जाने कितने मधेशियों को फँसाकर उनके सम्पति हरण की, उसके नागरिकता छिन ली, उसे पलायन कर दी, उनकी भाषा छिन ली अौर लाखों को गुलाम बना ली ।

संजय साह पर एक अौर गंभीर अारोप यह है कि वो गुण्डा है । गुण्डागर्दी से चन्द ही वर्षों में हजारपति से अरबपति हो गए । अब जरा विचार करें कि मधेश पर राज कौन कर रहा है ? शासन किसके है ? प्रशासन कौन चलाता है ? हर जगह नेपाली शासन अौर प्रशासन का हुकुमत है अौर उसके हुकुमत को सलाम करते हुए साह ने उतने जायदाद जोडे । सवाल यह नेपाली साम्राज्य क्यूँ नहीं उठाता कि जिस शासन अौर प्रशासन के अाड में साह ने अर्बों कमाया, उसके प्रशासन ने कितना कमाया होगा ?

दुसरी बात, संजय साह जब गुण्डागर्दी कर रहे थे, पैसे लुट रहे थे तो उस समय प्रशासन क्य कर रही थी ? प्रशासन ने उन्हें कानुनी दायरे में क्यूँ नहीं लाया ? जाहिर है कि संजय साह ने अर्बों कमाया तो प्रशासन ने खरबों कमाया होगा । उसका भी छानबिन क्यूँ नहीं होता ? 

२०५३-५४ की बात है । एक नेपाली प्रहरी इंसपेक्टर, जिनका मैं भूल रहा हूँ, मेरा अच्छा मित्र बना उसी जनकपुर में । वो वहाँ करीब १३ महीना रहे अौर १४ करोड से ज्यादा पैसे कमाये । वैसे लाखों नेपाली है जो कल्ह तक उसको अण्डरबियर अौर पैरों में बीस रुपये की चप्पल नहीं लगा पाते थे । मगर नेपाली शासन के सहयोगों से मधेश में आते ही कुछ ही वर्षों में धनपति, महलपति, गाडीपति, जमीनपति, उद्योगपति, शासनपति, प्रशासनपति, ऎशपति, व्यापारपति, फैशनपति, रोजगारपति आदि कैसे हो गए ?

कुछ ही दशक पूर्वतक मधेश के जमिन्दार, सम्पन्न तथा मालिक रहे मधेशी अाज भूमिहीन, विपन्न तथा नौकर कैसे हो गए ? सरकारी नौकरियों को नकारने बाले मधेशी अाज ५-१० हजार के नौकरी के लिए भी तरसता क्यूँ है ? कभी भाषाविद्, मैथिलीभाषी, अवधीभाषी, भोजपुरी तथा उर्दुबनाषी, थारु तथा सन्थाली-कोचेभाषी नेपाली भाषी कैसे अौर क्यूँ हो गए ? उनके भाषा अौर संस्क्रितियों को संरक्षण क्यूँ नहीं मिला ? मधेशी नेपालियों के दास, गुलाम, कमैया अौर कम्लरी क्यूँ अौर कैसे हो गए ?

संजय साह अगर लुटा है तो मधेश को लुटा है । मधेश को लुटने बाले सिर्फ एक ही संजय नहीं, लाखों लाख नेपाली संजय है । उनपर कारबाही क्यूँ नहीं ?

क्या संजय साह सिर्फ नेपालियों के कहे अनुसार चलना बन्द करे, राजनीति में भाग ले लें अौर अपने समाज को नेपालियों के दुश्चक्र से बचाने के लिए हिम्मत करें तब वह बदमाश, गुण्डा, लुटेरा अौर हत्यार बन जाता है ? संजय ने मधेशियों के साथ बदमाशी की तो फिर वही मधेशी उसे उतने भारी मतों से जिताया क्यूँ अौर कैसे ? या संजय के सामने किसी नेपाली पार्टी का कुछ नहीं चल पाने का झोंक निकाल रही है नेपाली शासक लोग ?

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