मधेश में चुनाव होना मुश्किल है : डॉ. अवध किशोर सिंह (मुफस्सल की आवाज)

abadhkishor singh

जनता के लिए व देश के लिए चुनाव होना आवश्यक है । लेकिन मौजूदा हालात में चुनाव होना संभव नहीं दिखाई दे रहा है । इसलिए कि मधेशी जनता की मांगों के आधार पर मोरचा द्वारा जो परिमार्जन सहित संविधान संशोधन की मांग की गयी थी, वह संशोधन अभी तक नहीं हो सका है । यहां तक कि मौजूदा संशोधन विधेयक को पंजीकरण करने के लिए भी तैयार नहीं हैं वे लोग । सियासी पार्टियां व कथित बड़ी पार्टियां मौजूदा संशोधन विधेयक को दरकिनार कर चुनाव करवाने में जुटी हैं । इसी प्रसंग में मैं संस्मरण कराना चाहंूगा कि जिस समय में संविधान जारी किया गया, उस समय मधेशी जनता और नेताओं को धोखा में रखा गया । सदियों से वंचित रहे मधेशी, थारु, दलित, जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदायों को नेपाल के नये संविधान में जो अधिकार मिलना चाहिए था, उससे वंचित करवाया गया । अपने अधिकार की प्राप्ति हेतु मधेशी, थारु, दलित, जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय लंबे अरसे से आंदोलनरत हैं । और जब तक इन समुदायों की मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक मधेश में चुनाव होना संभव नहीं है । मुझे ऐसा लगता है कि मधेश की ९० प्रतिशत जनता ऐसी हैं, जो चाहती हैं कि चुनाव न हों । चुनाव तब तक नहीं हो, जब तक संविधान में परिमार्जन सहित संशोधन नहीं हो जाता । समग्रतः कहा जा सकता है कि जब तक संविधान में परिमार्जन सहित संशोधन नहीं होगा, तब तक चुनाव होना मुश्किल है ।
(पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, महेन्द्र विन्देश्वरी बहुमुखी कैम्पस, राजविराज)

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